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गांव में गोबर उठाते थे जयदीप अहलावत:आज बॉलीवुड के ‘महाराज' बने, इरफान खान से तुलना पर छलके आंसू, शाहरुख को अपना इश्क बताया

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी शख्सियत हैं, जो चीख-चिल्लाहट नहीं, बल्कि एक सुकून भरे सुर की तरह आपके दिल में बस गई है। यह सुर इतना गहरा है कि आप शायद कभी अपनी फिल्मों से इन्हें निकाल ही न पाएं। जयदीप अहलावत ने हरियाणा के गांव-खेतों से निकलकर, एसएसबी के रिजेक्शन और कई अनगिनत जागती रातों से गुजरते हुए, एफटीआईआई पुणे से मुंबई की इस चकाचौंध भरी दुनिया में उन्होंने अपनी मजबूत जगह बना ली है। कभी गांव में गोबर उठाते थे, आज बॉलीवुड के ‘महाराज' कहलाये जाते हैं। फिल्म ‘महाराज' में जयदीप ने अपने मस्कुलर फिजीक और इंटेंस लुक ने दर्शकों को चौंका था। आज वो शाहरुख खान की ‘किंग’ और अजय देवगन के साथ ‘दृश्यम 3’ जैसी फिल्में कर रहे है आज की सक्सेस स्टोरी में आइए जानते हैं जयदीप अहलावत के करियर और जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें.. गांव का सादगी भरा जीवन बहुत याद आता है जयदीप अहलावत हरियाणा के रोहतक जिले के खरकरा गांव में एक जाट परिवार में पैदा हुए। उनका बचपन साधारण ग्रामीण परिवेश में बीता, जहां उन्होंने स्थानीय सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की।​ जयदीप अहलावत कहते हैं- जब अपने गांव की बात याद आती है, तो दिल में बस वही साधारण सी जिंदगी उभर आती है। सीधा-सादा जीवन, कोई कॉम्प्लिकेशंस नहीं। बस अपने खेत, पशु, घर गांव के बच्चे वो अतरंगी खेल खेलते, मिट्टी में लोटते-पोटते रहते थे। मैं गांव में हाथ से गोबर उठाता था। गांव की जिंदगी कठिन जरूर थी, लेकिन वह बेहद कमाल की थी। स्पोर्ट्स ने जीवन में बहुत कुछ सिखाया फिर रोहतक शहर में पढ़ाई के लिए आया। सब बढ़िया था, कोई ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं। आज भी याद आती है वो सादगी। मम्मी फिजिकल एजुकेशन टीचर थीं, उनकी वजह से स्पोर्ट्स का शौक लगा। पापा की वजह से लिटरेचर पढ़ने का। ये दोनों रुझान लंबे समय तक मेरे साथ रहे। स्पोर्ट्स ने जीवन में बहुत कुछ सिखाया। कई बार अजीब लगता है, लेकिन मेरी एक्टिंग के उदाहरण स्पोर्ट्स और फौज से मिली। मैंने बहुत खेला है। वो रोज प्रैक्टिस, खुद को बेहतर बनाने का जज्बा, जैसे ट्रैक पर एथलीट्स वॉच देखकर दौड़ते हैं। किसी और से नहीं, खुद से रेस। एक्टिंग में भी यही है, कॉम्पिटिशन अपनी पुरानी टाइमलाइन से, जो मुझे बेहतर बनाए। लिटरेचर से वास्ता पापा की वजह से पड़ा लिटरेचर से वास्ता पापा की वजह से पड़ा। वो तो हमेशा पढ़ते रहते थे। उनके लिए सोने से पहले भी किताब हाथ में लाजमी थी। मुझे छठी क्लास में प्रेमचंद की कहानियों का संग्रह दिया। मैं तब फालतू के काम कर रहा था। बोले, सिलेबस की किताबें ही सब कुछ नहीं, ये भी पढ़ लो। पहली बार मजा आया। फिर बड़ी बहन की हिंदी लिटरेचर वाली किताबें, इंग्लिश सिलेबस के हिंदी अनुवाद पढ़ने लगा। कहानियां पसंद आने लगीं। धीरे-धीरे कविताएं भी समझ आईं। एक्टर बनने की राह पर तो और ज्यादा लगाव हो गया। मुझे ‘सारा आकाश’ नॉवेल बहुत अच्छा लगा। ‘अंधा युग’ और ‘सूर्य की अंतिम किरण’ नाटक बहुत लगा। हमने 'सूर्य की अंतिम किरण' का प्रोडक्शन शुरू किया था। एक-डेढ़ महीने प्रैक्टिस भी की, लेकिन मंच तक नहीं पहुंच सके। उसके कुछ अलग कारण थे। हालांकि उस दौरान अन्य नाटक किए। एक्टर्स की ट्रेनिंग फौज जैसी होती है खैर, जब मैं स्पोर्ट्स खेलता था तभी फौज की तरफ रुझान हुआ, वो लाइफस्टाइल हमेशा आकर्षित करती रही, आज भी करती है। दोस्त जुड़े हैं वहां। हमारे टीचर पांडे जी कहते थे, एक्टर्स की ट्रेनिंग फौज जैसी होनी चाहिए, डिसिप्लिन और कंसिस्टेंसी। ये बहुत जरूरी है। मेरी ये सोच इंडस्ट्री की इनसिक्योरिटी में बहुत काम आती है। जैसे यूनिवर्सिटी का बेस्ट 100 मीटर एथलीट जानता है दूसरे का टाइम, फिर भी अपना प्रैक्टिस करता रहता है। असली मुकाबला ग्राउंड पर। अभी बस अपना बेस्ट दो, खुद को बेहतर बनाओ। एंग्जायटी हर जगह है, लोग क्या सोचेंगे, ये मत सोचो। नौकरी की कोशिश में हर बार नाकाम रहा फिल्मों में आने से पहले मैंने सेना और सरकारी टीचर की नौकरी के लिए बहुत कोशिश की। सेना में अफसर बनने का सपना था, इसलिए NDA(राष्ट्रीय रक्षा अकादमी), CDS(संयुक्त सेवा चयन) और SSB (सेवा चयन बोर्ड) में कई बार परीक्षा दी, लेकिन हर बार नाकाम रहा। रोहतक के जाट कॉलेज में पढ़ते समय दोस्तों के NDA-CDS सिलेक्शन देखकर जोश आया। इलाहाबाद में SSB के दो इंटरव्यू दिए, लेकिन दोनों बार स्क्रीनिंग में ही फेल हो गया। NDA का रिटन क्लियर न होने से उम्र भी निकल चुकी थी। खुद को बेकार और निकम्मा समझने लगा था 1999-2000 में JBT(Junior Basic Teacher) कोर्स किया। वो तब प्राइमरी टीचर के लिए पक्की नौकरी का रास्ता था। गुड़गांव में इंटरव्यू देते हुए मन ही नहीं लगा, कुछ भी बोलकर निकल आया। पापा को छिपाया, वरना डांट पड़ती। चंडीगढ़ वाले इंटरव्यू में थोड़ा सीरियस हुआ, लेकिन दिल कहीं लगा ही नहीं। रिजेक्ट होकर घर लौटता था तो बहुत बुरा लगता था। खुद को बिल्कुल बेकार और निकम्मा समझने लगा था। समझने या छोड़ने की उम्र भी नहीं थी। इतना कुछ झोंक चुके थे उसमें, उसके बिना सांस नहीं आती थी। रंगमंच से हीनभावना दूर हुई फिर थिएटर शुरू हुआ तो सारा गुस्सा, हीनभावना, रोना-धोना स्टेज पर निकलने लगा। सारी ऊर्जा वहीं लगी, नींद बेहतर हो गई। अब सोचा, जो होगा देखा जाएगा। एक्टिंग की शुरुआत में बहुत मजा आता था। सुबह उठते ही 'अरे, एक और दिन' जैसा मन नहीं होता था। आगे कुछ न दिखने का डर न था। मंच ने लोगों और खुद से जुड़ाव बेहतर कर दिया। मेरे गुरु सुनील चटकारा जी ने एफटीआईआई के बारे में बताया। उनके साथ 2-3 साल थिएटर किया। उन्होंने कहा, ‘’एफटीआईआई जाओ, फिल्म से रिलेटेड है।" गूगल किया तो लगा सही जगह है। अप्लाई कर दिया। पिता को नहीं पता था कि एक्टिंग भी सीखी जाती है जब मैंने पापा को एफटीआईआई के बारे में बताया, तो पहले हैरान हुए कि एक्टिंग सीखना मतलब? मैंने समझाया कि ऐसे-ऐसे लोग वहां से निकले हैं। उन्होंने कहा, "ठीक है, तुझे यही करना है तो कर ले।" घर में कोई बड़ी जिम्मेदारी भी नहीं थी, बहन सेटल, भाई नौकरी में। सबकी रोटी-पानी चल रही थी। सोचा होगा, ट्राई कर ले, न चला तो खेती या JBT कर लेगा। डर नहीं था कि कुछ न कर पाऊंगा। मम्मी-पापा को ये नहीं चाहिए था कि मैं टीचर बनूं। बस इतना चाहते थे कि सेटल हो जाऊं, इनकम हो, घर हो, दुखी न रहूं। कोई खास प्रोफेशन की जिद नहीं थी। डैड तो चाहते थे फौजी बनूं। खैर, एफटीआईआई में शुरुआत शॉकिंग लगी। सिनेमा सिर्फ फिल्में नहीं, इसकी दुनिया बहुत बड़ी है। पहले 6 महीने जनरल ट्रेनिंग-एडिटिंग, साउंड, डायरेक्शन, कैमरा सब सीखा। उसके बाद एक्टिंग स्पेशलाइजेशन में गया तो लगा, "ये क्या हो गया?" अलग राज्यों के लोग, थोड़ा कल्चर शॉक। फिर मजा आने लगा। प्रियदर्शन ने दिया पहला मौका वहां देश का हर त्योहार धूमधाम से मनाया जाता था। बैसाखी, होली, दिवाली से लेकर ओणम तक सभी त्योहार। ऐसा नहीं लगता कि आप किसी राज्य से अलग हैं। हर जगह से लोग होते हैं। एफटीआईआई से निकलने के बाद में प्रियदर्शन सर के साथ दो फिल्में आक्रोश और खट्टा-मीठा मिलीं। इनकी वजह से आगे चटगांव फिल्म मिली। फिर अनुराग कश्यप ने गैंग्स ऑफ वासेपुर में मौका दिया। इसके बाद कमल हासन सर के साथ विश्वरूपम, कमांडो- ए वन मैन आर्मी, गब्बर इज बैक, रईस और मेघना गुलजार की राजी से अलग पहचान बनी। हाथीराम चौधरी के किरदार से घर-घर फेमस हुए इन फिल्मों के अलावा वेब सीरीज पाताल लोक में एक पुलिस वाले (हाथीराम चौधरी) की भूमिका निभाने के लिए प्रशंसा हासिल की और ड्रामा सीरीज में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर ओटीटी पुरस्कार जीता। जयदीप अहलावत कहते हैं- फैमिली मैन के दौरान डेविड धवन जी का फोन आया। उनकी पहली लाइन थी- "अरे बेटा, तू मेरे इंस्टीट्यूट का जूनियर है!" उनकी खुशी सुनकर पुराना बॉन्ड महसूस हुआ। पाताल लोक' के क्रिएटर सुदीप भाई (सुदीप शर्मा) ने मुझे बर्थडे पर एक कार्ड दिया था। उसमें लिखा था कि आपका जुड़ाव सिर्फ उस कमाल के अभिनेता से नहीं, बल्कि उस भाई जैसे इंसान से भी है। फिर एक लाइन थी- "अगर आपके साथ काम न कर पाता, तो जिंदगी भर मलाल रहता कि मैंने इरफान साहब (इरफान खान) के साथ काम नहीं किया।" वो पढ़कर मैं बहुत रोया। इरफान खान की जगह कोई नहीं भर सकता मैंने सुना है कि लोग मेरी तुलना इरफान साहब से करते हैं। नहीं करना चाहिए। लेकिन अगर इससे थोड़ी खुशी मिलती है, तो मैं खुद को धन्य मानता हूं। इरफान साहब की जगह कोई नहीं भर सकता, पर उनकी कमी में मेरे होने से अगर किसी को सुकून मिले, तो सर आंखों पर। 'महाराज' की मस्कुलर फिजिक और इंटेंस लुक ने दर्शकों को चौंका था जयदीप अहलावत को फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ (2022) में अपनी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। तब से उन्होंने 2023 की फिल्मों ‘जाने जान’ और ‘थ्री ऑफ अस’ में शानदार अभिनय किया है। करीना कपूर के साथ फिल्म ‘जाने जान’ में अपने प्रदर्शन के लिए जयदीप ने वेब ओरिजिनल फिल्म (क्रिटिक्स) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर ओटीटी पुरस्कार और 2024 की फिल्म ‘महाराज’ के लिए वेब ओरिजिनल फिल्म में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फिल्मफेयर ओटीटी पुरस्कार जीता। शाहरुख खान की ‘किंग’ और अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ में नजर आएंगे हाल ही में जयदीप दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ में नजर आए। इसके अलावा वे शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ में भी नजर आएंगे। इस फिल्म के लिए शाहरुख खान ने खुद जयदीप को कॉल किया था। जयदीप कहते हैं- 'शाहरुख खान साहब मेरा इश्क हैं, वो बहुत प्यार से बात करते हैं।' शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ के अलावा जयदीप ‘दृश्यम 3’ में काम कर रहे हैं। इस फिल्म में उन्होंने अक्षय खन्ना को रिप्लेस किया है। शिद्दत से किया गया काम लोगों तक पहुंच जाता है जयदीप कहते हैं- जब आप अपने काम को शिद्दत से करते हैं और वो लोगों तक पहुंच जाता है,चाहे कोई भी फील्ड हो, असली सफलता यही है। आपका काम परिवार को खुश रखे, उनकी जिंदगी में खुशी लाए और समाज को कुछ दे। पैसा-नाम कमाना जरूरी है, लेकिन ये सतत प्रक्रिया है, कोई एक इवेंट नहीं। ----------------------------------- पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... स्टार बनने के बाद चॉल में रहे जैकी:सक्सेस के बाद दिवालिया हुए, दोगुनी मेहनत से कर्ज उतारा, पिता की मौत के बाद शूटिंग की बॉलीवुड के 'जग्गू दादा' के नाम से मशहूर जैकी श्रॉफ की कहानी संघर्ष, दृढ़ता और स्मार्ट निवेश का एक शानदार उदाहरण है। मुंबई के तीन बत्ती इलाके की चॉल में जन्मे जैकी ने जिंदगी के हर मोड़ पर चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी। 'हीरो' की रिलीज के बाद भी जैकी श्रॉफ पांच-छह साल तक उसी चॉल में रहे। पूरी खबर पढ़ें..

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WPL में आज RCB Vs GG:दोनों टीमें सीजन में पहली बार भिड़ेंगी; गुजरात के पास पॉइंट्स टेबल के टॉप पर आने का मौका

विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का नौवां मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात जाएंट्स (GG) के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से शुरू होगा। दोनों ही टीमें इस सीजन पहली बार आमने-सामने होंगी। बेंगलुरु 2 मैच में 2 जीत के साथ पॉइंट्स टेबल के टॉप पर बनी हुईं हैं। वहीं गुजरात ने इस सीजन 3 मैच खेले हैं। टीम को 2 जीत और एक हार का सामना करना पड़ा हैं। टीम 4 पॉइंट्स के साथ तीसरे पायदान पर हैं। दोनों टीमें बराबरी पर WPL में दोनों टीमों के बीच मुकाबला अब तक पूरी तरह बराबरी का रहा है। गुजरात और बेंगलुरु के बीच 6 मैच हुए हैं। 3 RCB ने तो इतने ही GG ने जीते हैं। हैरिस टॉप बैटर RCB इस सीजन सबसे मजबूत टीम के रूप में उभरी है। स्टार ऑल-राउंडर एलिस पेरी की गैरमौजूदगी के बावजूद स्मृति मंधाना की कप्तानी में टीम ने लगातार दो बड़े मुकाबले जीते हैं। यूपी वॉरियर्स के खिलाफ 143 रन का लक्ष्य सिर्फ 12.1 ओवर में हासिल कर RCB ने अपना नेट रन रेट +1.964 तक पहुंचा दिया है। ग्रेस हैरिस ने फिनिशर की भूमिका में खुद को साबित किया है, वे टीम की टॉप बैटर हैं। उन्होंने 2 मैच में 110 रन बनाए हैं। इसमें 85 रन उनका बेस्ट स्कोर रहा हैं। गेंदबाजी में लॉरेन बेल और नदीन डी क्लर्क ने टीम को संतुलन दिया है। क्लर्क ने इस सीजन 2 मैच में 6 विकेट निकाले हैं। उनका बेस्ट 26 रन देकर 4 विकेट रहा हैं। डिवाइन बेस्ट ऑलराउंडर गुजरात जायंट्स इस सीजन पूरी तरह बदली हुई नजर आ रही है। पिछले सीजन में आखिरी स्थान पर रहने वाली टीम ने 2026 की शुरुआत लगातार दो 200+ स्कोर से की। हालांकि मुंबई इंडियंस के खिलाफ उन्हें हाल ही में हार झेलनी पड़ी, लेकिन कप्तान एश्ले गार्डनर की आक्रामक रणनीति ने टीम को लीग की सबसे तेज रन बनाने वाली यूनिट बना दिया है। चोटों के चलते यास्तिका भाटिया टूर्नामेंट से बाहर हैं, जबकि अनुष्का शर्मा भी फिटनेस कारणों से नहीं खेल रही हैं। इसके बावजूद जॉर्जिया वेयरहम और इस सीजन GG में शामिल हुईं सोफी डिवाइन मिडिल ऑर्डर को मजबूती देती हैं। डिवाइन टीम की टॉप बैटर और टॉप विकेट टेकर दोनों हैं। उन्होंने 141 रन बनाने के साथ-साथ 5 विकेट भी लिए हैं। पिच रिपोर्ट नवी मुंबई के DY पाटिल स्टेडियम की पिच आमतौर पर बैटिंग-फ्रेंडली मानी जाती है। नई गेंद से यहां अच्छा बाउंस और कैरी देखने को मिलता है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल पाते हैं। इस पिच पर स्पिन गेंदबाजों को ज्यादा मदद नहीं मिलती, जबकि तेज गेंदबाज शुरुआती ओवरों में कुछ प्रभाव डाल सकते हैं। नाइट मैचों में ओस मैच का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा छोटी बाउंड्री और तेज आउटफील्ड रन बनाना और आसान बना देती है। वेदर रिपोर्ट शुक्रवार को DY पाटिल स्टेडियम में तापमान अधिकतम 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।​​​​​ हवा 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-XI रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB): स्मृति मंधाना (कप्तान), ग्रेस हैरिस, दयालन हेमलता, नदीन डी क्लर्क, ऋचा घोष (विकेटकीपर), गौतमी नायक, लिंसी स्मिथ, श्रेयांका पाटिल, अरुंधति रेड्डी, राधा यादव और लॉरेन बेल। गुजरात जायंट्स (GG): बेथ मूनी (विकेटकीपर), सोफी डिवाइन, भारती फुलमाली, एश्ले गार्डनर (कप्तान), आयुषी सोनी, कनिका आहूजा, जॉर्जिया वेयरहम, काश्वी गौतम, तनुजा कंवर, रेणुका सिंह ठाकुर और राजेश्वरी गायकवाड़।

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  Sports

SA20 का असर दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दिख रहा है : Mark Boucher

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व विकेटकीपर मार्क बाउचर ने कहा कि एसए20 लीग का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में उनके देश के प्रदर्शन पर बड़ा असर पड़ा है क्योंकि इससे युवा खिलाड़ियों को विभिन्न तरह की मैच परिस्थितियों में खेलने का अनुभव मिला। पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण अफ्रीका ने काफी सफलता हासिल की है।

टीम 2024 के टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची और इसके बाद पिछले साल भारत में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जीतने के साथ एक टेस्ट श्रृंखला भी अपने नाम की। एसए20 द्वारा चुनिंदा मीडिया से आयोजित वर्चुअल बातचीत में बाउचर ने कहा, ‘‘दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एसए20 का असर साफ दिखाई दे रहा है, इसमें जरा भी शक नहीं है। जब से एसए20 शुरू हुई है, इसने हमारे स्थानीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अलग मैच परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिया है। ’’

बाउचर ने भारत की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हमने देखा है कि आईपीएल में क्या हुआ। आईपीएल में जैसे ही युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के साथ खेलने लगे और उनसे सीखने लगे, उनका खेल एक अलग ही स्तर पर पहुंच गया। आज भारतीय क्रिकेट में इतनी गहराई है। ’’

उन्होंने युवा ऑलराउंडर कॉर्बिन बॉश का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हालांकि यह आईपीएल के स्तर का तो नहीं है, लेकिन एसए20 फिर भी बहुत अच्छी है। इसने वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है और हमारे क्रिकेटरों को सिर्फ टी20 में ही नहीं बल्कि एकदिवसीय प्रारूप और टेस्ट क्रिकेट में भी मदद की है। कॉर्बिन बॉश को ही देखिए। उनका एसए20 में प्रदर्शन शानदार रहा, फिर वह वनडे क्रिकेट खेलने लगे और उसके बाद टेस्ट क्रिकेट में भी खेलते नजर आए। इसलिए एसए20 शत प्रतिशत ‘गेम-चेंजर’ है जो हमारे देश में क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है। ’

हालांकि 49 वर्षीय बाउचर का मानना है कि एसए20 को बाजार में पकड़ बनाने और प्रतिभा की खोज के मामले में अभी आईपीएल और बिग बैश लीग के स्तर तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना है।

उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एसए20 को काफी ऊंचा दर्जा देते हैं और इनमें से कई बिग बैश लीग और आईपीएल में भी खेल चुके हैं। लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा कि आईपीएल हमेशा आईपीएल ही रहेगा और मुझे नहीं लगता कि आईपीएल से कोई प्रतिस्पर्धा है।

Fri, 16 Jan 2026 18:13:24 +0530

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