अमेरिका ने अपनी आव्रजन नीति में एक बडा और विवादास्पद फैसला लेते हुए 75 देशों से होने वाली इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। हम आपको बता दें कि इस सूची में पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार इन देशों से आने वाले प्रवासी अमेरिकी जनता के कल्याण संसाधनों पर अस्वीकार्य स्तर तक निर्भर हो जाते हैं और आगमन के तुरंत बाद ही सार्वजनिक बोझ बनते हैं।
यह निर्णय रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी देश लाखों लोगों को शरण देकर उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य का खर्च नहीं उठा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगले महीने की पहली तारीख से अमेरिका किसी भी सैंक्चुअरी सिटी को भुगतान नहीं करेगा। फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक आंतरिक ज्ञापन के हवाले से यह बताया गया है कि 21 जनवरी से 75 देशों के नागरिकों के लिए सभी प्रकार की वीजा प्रोसेसिंग रोक दी जाएगी। इस सूची में सोमालिया, रूस, ईरान, अफगानिस्तान, ब्राजील, नाइजीरिया और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।
दूतावास और वाणिज्य दूतावास अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नए आवेदनों को अस्वीकार करें जब तक कि स्क्रीनिंग और जांच प्रक्रिया का पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता। इस रोक की अवधि को लेकर कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। देखा जाये तो यह कदम दुनिया के लगभग दो सौ देशों में से एक तिहाई से अधिक देशों के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद करने जैसा है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि विभाग अपने दीर्घकालिक अधिकारों का उपयोग करते हुए ऐसे संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित करेगा जो अमेरिकी जनता की उदारता का दुरुपयोग कर सकते हैं। हम आपको बता दें कि इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने वीजा जांच प्रक्रिया को और कठोर किया था और पिछले वर्ष आवेदकों के सोशल मीडिया खातों की भी जांच अनिवार्य कर दी गई थी। यह फैसला उस व्यापक आव्रजन प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है जिसे ट्रंप ने पिछले वर्ष जनवरी में सत्ता संभालने के बाद तेज किया है। नवंबर में व्हाइट हाउस के पास एक गोलीबारी की घटना के बाद उन्होंने थर्ड वर्ल्ड देशों से आव्रजन को स्थायी रूप से रोकने की बात कही थी। इसके साथ ही सोमाली नागरिकों को मिलने वाली निर्वासन सुरक्षा भी समाप्त की जा रही है।
देखा जाये तो अमेरिका का यह फैसला केवल एक आव्रजन नीति नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में बदलते संतुलन का संकेत है। ट्रंप प्रशासन इसे आर्थिक सुरक्षा और घरेलू संसाधनों की रक्षा के नाम पर पेश कर रहा है लेकिन इसके निहितार्थ इससे कहीं अधिक गहरे हैं। 75 देशों पर एक साथ रोक लगाना यह दर्शाता है कि अमेरिका अब वैश्वीकरण की अपनी पुरानी भूमिका से पीछे हटकर सख्त राष्ट्रकेंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।
सामरिक दृष्टि से देखें तो यह कदम अमेरिका की सॉफ्ट पावर को कमजोर कर सकता है। दशकों से अमेरिका दुनिया भर के प्रतिभाशाली युवाओं और कामगारों के लिए अवसर की भूमि रहा है। वीजा रोक से न केवल मानव पूंजी का प्रवाह रुकेगा बल्कि उन देशों में अमेरिका के प्रति धारणा भी नकारात्मक होगी जिनके नागरिकों को सीधे निशाना बनाया गया है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में पहले से ही चीन और रूस जैसे शक्ति केंद्र सक्रिय हैं। ऐसे में अमेरिका का यह कदम प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के लिए कूटनीतिक अवसर खोल सकता है।
दूसरी ओर घरेलू राजनीति में यह फैसला ट्रंप के मूल समर्थक वर्ग को मजबूत संदेश देता है कि उनकी सरकार अमेरिकी करदाताओं के हितों को सर्वोपरि रखेगी। सार्वजनिक बोझ की दलील राजनीतिक रूप से प्रभावी हो सकती है लेकिन इसका तथ्यात्मक आधार हमेशा विवाद के घेरे में रहा है। कई अध्ययनों ने दिखाया है कि प्रवासी लंबे समय में अर्थव्यवस्था में योगदान भी करते हैं।
भारत जैसे देशों के लिए यह फैसला सीधे तौर पर लागू नहीं होता लेकिन अप्रत्यक्ष प्रभाव अवश्य होंगे। वैश्विक आव्रजन सख्ती का रुझान अन्य पश्चिमी देशों को भी प्रभावित कर सकता है। साथ ही दक्षिण एशिया में अस्थिरता और बेरोजगारी के दबाव और बढ़ सकते हैं जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां जन्म ले सकती हैं।
बहरहाल, यह फैसला अमेरिका की सामरिक सोच में आ रहे बदलाव को रेखांकित करता है जहां आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण को वैश्विक नेतृत्व से ऊपर रखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह संकुचित दृष्टि लंबे समय में अमेरिका को मजबूत बनाएगी या उसे दुनिया में और अलग थलग कर देगी। यही इस निर्णय की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
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दक्षिण अफ्रीका के पूर्व विकेटकीपर मार्क बाउचर ने कहा कि एसए20 लीग का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में उनके देश के प्रदर्शन पर बड़ा असर पड़ा है क्योंकि इससे युवा खिलाड़ियों को विभिन्न तरह की मैच परिस्थितियों में खेलने का अनुभव मिला।
पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण अफ्रीका ने काफी सफलता हासिल की है।
टीम 2024 के टी20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची और इसके बाद पिछले साल भारत में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जीतने के साथ एक टेस्ट श्रृंखला भी अपने नाम की।
एसए20 द्वारा चुनिंदा मीडिया से आयोजित वर्चुअल बातचीत में बाउचर ने कहा, ‘‘दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एसए20 का असर साफ दिखाई दे रहा है, इसमें जरा भी शक नहीं है। जब से एसए20 शुरू हुई है, इसने हमारे स्थानीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अलग मैच परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिया है। ’’
बाउचर ने भारत की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हमने देखा है कि आईपीएल में क्या हुआ। आईपीएल में जैसे ही युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के साथ खेलने लगे और उनसे सीखने लगे, उनका खेल एक अलग ही स्तर पर पहुंच गया। आज भारतीय क्रिकेट में इतनी गहराई है। ’’
उन्होंने युवा ऑलराउंडर कॉर्बिन बॉश का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘हालांकि यह आईपीएल के स्तर का तो नहीं है, लेकिन एसए20 फिर भी बहुत अच्छी है। इसने वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है और हमारे क्रिकेटरों को सिर्फ टी20 में ही नहीं बल्कि एकदिवसीय प्रारूप और टेस्ट क्रिकेट में भी मदद की है। कॉर्बिन बॉश को ही देखिए। उनका एसए20 में प्रदर्शन शानदार रहा, फिर वह वनडे क्रिकेट खेलने लगे और उसके बाद टेस्ट क्रिकेट में भी खेलते नजर आए। इसलिए एसए20 शत प्रतिशत ‘गेम-चेंजर’ है जो हमारे देश में क्रिकेट के लिए बेहद जरूरी है। ’’
हालांकि 49 वर्षीय बाउचर का मानना है कि एसए20 को बाजार में पकड़ बनाने और प्रतिभा की खोज के मामले में अभी आईपीएल और बिग बैश लीग के स्तर तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एसए20 को काफी ऊंचा दर्जा देते हैं और इनमें से कई बिग बैश लीग और आईपीएल में भी खेल चुके हैं। लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा कि आईपीएल हमेशा आईपीएल ही रहेगा और मुझे नहीं लगता कि आईपीएल से कोई प्रतिस्पर्धा है।
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