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त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन चलाएगा रेलवे, मध्य प्रदेश के यात्रियों को भी होगा फायदा, देखें लिस्ट

आने वाले त्योहारों को लेकर भारतीय रेलवे ने कमर कस ली है। त्योहारों के समय बाहर रहने वाले स्टूडेंट्स और नौकरी करने वाले लोग अपने घरों की तरफ लौटते हैं। ऐसे में ट्रेनों में काफी भीड़ देखने को मिलती है। इसी को देखते हुए मध्य प्रदेश से 10 राज्यों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की तैयारी की गई है।

मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्टेशनों से देश के कई राज्यों तक ट्रेनों का संचालन किया जाने वाला है। आने वाले दिनों में दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं। ऐसे में रेलवे ने यात्रियों के लिए अतिरिक्त रेल सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है। चलिए जान लेते हैं कि किन राज्यों के लिए ट्रेनों का संचालन किया जाने वाला है।

इन राज्यों के लिए चलेंगी ट्रेन

भारतीय रेलवे द्वारा मध्य प्रदेश से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जाने वाली है। भोपाल मंडल से लेकर रतलाम मंडल तक के यात्री इन ट्रेनों से सफर कर सकेंगे।

 डॉ अंबेडकर नगर से रीवा के लिए स्पेशल ट्रेन

भोपाल मंडल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक डॉ अंबेडकर नगर से रीवा के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाने वाली है। ट्रेन नंबर 01710 और 01709 10 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चलाई जाएगी। रीवा से लेकर डॉ अंबेडकर नगर और डॉ अंबेडकर नगर से लेकर रीवा तक ये 6-6 फेरे में चलेगी। इसका ठहराव इटारसी, रानी कमलापति, नर्मदापुरम संत हिरदाराम नगर सहित अन्य स्टेशन पर रहेगा।

रीवा से ये ट्रेन रात 10.50 पर रवाना होगी। इटारसी, नर्मदापुरम, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर होते हुए यह डॉ अंबेडकर नगर स्टेशन अगले दिन 3:05 पर पहुंचेगी। वापसी में ये रात 9:20 पर डॉ अंबेडकर नगर स्टेशन से प्रस्थान करेगी। संत हिरदाराम नगर, रानी कमलापति, नर्मदापुरम और इटारसी होते हुए ये दोपहर 2.30 पर रीवा पहुंचेगी।

 

रानी कमलापति से पूजा स्पेशल

इसी तरह से रानी कमलापति से रीवा के बीच साप्ताहिक सुपरफास्ट सुपरफास्ट पूजा स्पेशल ट्रेन चलाई जाने वाली है। ट्रेन नंबर 02192 और 02191, 17 अक्टूबर से 14 नवंबर तक दोनों दिशाओं में चार-चार फेरे लगाएगी। इसका ठहराव विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी, मैहर और सतना में रहेगा।

रीवा से ये ट्रेन दोपहर 12:30 बजे 17 अक्टूबर, 24 अक्टूबर, 7 और 14 नवंबर को प्रस्थान करेगी और रात 9:15 पर रानी कमलापति पहुंचेगी। इसी तरह से यह रात 10:15 पर आने कमलापति से निकलेगी और अगले दिन सुबह 7:20 पर रीवा पहुंचेगी।

 

छठ और दिवाली के लिए 50 स्पेशल ट्रेन

भारतीय रेलवे द्वारा दिवाली और छठ के लिए अलग-अलग स्टेशन से 50 स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाने वाला है। इसमें जबलपुर से लेकर हरिद्वार, हजरत निजामुद्दीन, कटिहार से मनिहारी, गया से नई दिल्ली, अमृतसर से कोलकाता से लेकर कई ट्रेनें शामिल है। इसकी जानकारी भारतीय रेलवे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स के जरिए दी है।

 

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विश्व शांति दिवस: विश्व बंधुत्व से मानव कल्याण तक, जानिए इस दिन का इतिहास, उद्देश्य और महत्व

आज विश्व शांति दिवस है। हर साल 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दुनिया में शांति, अहिंसा, आपसी सहयोग और सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसका संदेश सिर्फ देशों के बीच युद्ध और संघर्ष को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सम्मान, संवाद और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है।

विश्व शांति दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से हमारे भारत ने विश्व शांति के संदेश के साथ विश्व बंधुत्व, मानव कल्याण और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। यह अवसर प्रेरित करता है कि समानता, सहयोग और सद्भावना से विश्व शांति में सभी सहभागी बनें।

क्यों मनाया जाता है विश्व शांति दिवस

विश्व शांति दिवस मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य दुनिया के देशों और लोगों को शांति के महत्व के प्रति जागरूक करना है। यह दिन युद्ध, हिंसा और संघर्ष के बजाय बातचीत, समझ और सहयोग का रास्ता अपनाने का संदेश देता है। साथ ही लोगों को यह याद दिलाता है कि स्थायी शांति सिर्फ सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की इसमें भूमिका होती है।

विश्व शांति दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1981 में की थी। उस समय सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के नियमित सत्र के उद्घाटन के अवसर पर शांति को समर्पित एक दिन मनाने का फैसला लिया गया था। पहला अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस सितंबर 1982 में मनाया गया।

इसके बाद वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 सितंबर को स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित किया। इस दिन को युद्धविराम और अहिंसा के संदेश से भी जोड़ा गया। इसके बाद हर साल 21 सितंबर को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति से जुड़े कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।

इस दिन का उद्देश्य 

इस दिवस का उद्देश्य लोगों और देशों के बीच शांति की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसके तहत हिंसा और संघर्ष को कम करने, आपसी संवाद बढ़ाने, मानवाधिकारों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। बच्चों और युवाओं को भी शांति, सहिष्णुता और सहयोग के मूल्यों से जोड़ना इस दिन की भावना का हिस्सा है।

आमतौर पर शांति को युद्ध की अनुपस्थिति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका दायरा इससे कहीं व्यापक है। किसी समाज में शांति तभी मजबूत मानी जाती है जब लोगों के बीच सुरक्षा, सम्मान, समानता और विश्वास का माहौल हो। भेदभाव, नफरत और हिंसा को कम करना तथा असहमति के बावजूद संवाद बनाए रखना भी शांति की प्रक्रिया का हिस्सा है।

आज के समय में बढ़ गया है महत्व

दुनिया में बदलते राजनीतिक और सामाजिक हालात के बीच शांति का महत्व और बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में संघर्ष, हिंसा और मानवीय संकट की स्थितियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही समाजों के भीतर भी अलग-अलग मुद्दों को लेकर तनाव और विभाजन की स्थिति भी देखने को मिल रही हैं। ऐसे समय में बातचीत और सहयोग के रास्ते खुले रखना जरूरी हो जाता है।

तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में सूचनाएं बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं। ऐसे में गलत जानकारी, नफरत और भड़काऊ संदेश भी तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए शांति का संदेश अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि रोजमर्रा के सामाजिक व्यवहार और डिजिटल संवाद में भी इसकी जरूरत महसूस होती है। विश्व शांति दिवस इसी बात की याद दिलाता है कि शांति किसी एक दिन का संकल्प नहीं बल्कि लगातार किए जाने वाले प्रयासों का परिणाम है।

https://twitter.com/DrMohanYadav51/status/2101856781417042410

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