टेस्ला से ग्राहकों ने बनाई दूरी, 2025 में बिकी केवल 225 गाड़ियां
नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी कार कंपनी टेस्ला से भारतीय ग्राहकों ने दूरी बना ली है। कंपनी ने पिछले साल केवल 225 यूनिट्स की बिक्री की है। यह जानकारी इंडस्ट्री डेटा में दी गई।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के डेटा के मुताबिक, टेस्ला ने सितंबर में 64 यूनिट्स, अक्टूबर में 40 यूनिट्स, नवंबर में 48 यूनिट्स और दिसंबर में 73 यूनिट्स की बिक्री की है।
अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी ने मुंबई में शोरूम खोलकर भारत में कदम रखा था।
मौजूदा समय में कंपनी भारत में अपने मॉडल वाई की बिक्री कर रही है, जो कि रियर-व्हील-ड्राइव (आरडब्ल्यूडी) कार है।
मॉडल वाई के स्टैंडर्ड आरडब्ल्यूडी वेरिएंट की कीमत 59.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) है, जबकि लॉन्ग रेंज आरडब्ल्यूडी की कीमत 67.89 लाख रुपए (एक्स-शोरूम) है। विदेशों में पूरी तरह से निर्मित वाहनों को भारत में आयात करने पर लगने वाले उच्च शुल्क के कारण टेस्ला मॉडल वाई की कीमतें विदेशी बाजारों की तुलना में काफी अधिक हैं।
टेस्ला गुरुग्राम, मुंबई और दिल्ली में एक्सपीरियंस सेंटर संचालित करती है, जिनमें लगभग 12 सुपरचार्जर और 10 डेस्टिनेशन चार्जर हैं।
टेस्ला का दावा है कि मॉडल वाई की रेंज 500 किलोमीटर तक और लॉन्ग रेंज की रेंज 622 किलोमीटर तक है। स्टैंडर्ड वेरिएंट 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार 5.9 सेकंड में और लॉन्ग रेंज 5.6 सेकंड में पकड़ लेती है; दोनों की अधिकतम गति 201 किमी प्रति घंटे है। कंपनी का दावा है कि फास्ट चार्जिंग से केवल 15 मिनट में स्टैंडर्ड मॉडल में लगभग 238 किमी और लॉन्ग रेंज में लगभग 267 किमी तक रेंज हासिल की जा सकती है।
वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत के कुल वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत हिस्सा पर पहुंच गई है और कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री 23 लाख यूनिट तक पहुंच गई।
इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) की रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों की बिक्री 1,75,000 यूनिट रही, जिसमें छोटे और हल्के वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों की बिक्री में मजबूत वृद्धि देखी गई।
--आईएएनएस
एबीएस/
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Health News: वजन घटाने वाले इंजेक्शन एक बड़ा खतरा, छोड़ते ही लौट रहा मोटापा; इन परेशानियों से भी जूझ रहे लोग
मोटापे से आज दुनिया भर के लोग परेशान हैं. वे वजन कम करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन्हीं में से एक तरीका है- दवाईयों का सहारा लेना. लोग वजन कम करने के लिए वेगोवी और मौनजारो जैसे इंजेक्शन लगवा रहे हैं. इनको GLP-1 एगोनिस्ट कहा जाता है. दावा है कि दवाएं तेजी से वजन घटाने में मदद करती है. इस बीच, एक स्टडी सामने आ रही है, जिसने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मेडिकल जर्नल BMJ द्वारा हाल में एक रिपोर्ट पेश की गई. रिपोर्ट में सामने आया कि जो लोग GLP-1 इंजेक्शन लेना बंद कर रहे हैं. वे 18 महीनों के अंदर-अंदर घटाया हुआ अपना पूरा वजन दोबार हासिल कर ले रहे हैं. खास बात है कि वजन घटने से कोलेस्ट्रोल और दिल से जुड़े जो फायदे होते हैं, वे भी खत्म हो जाते हैं.
इन परेशानियों से जूझते हैं लोग
मेडिकल एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ वजन बढ़ना ही समस्या नहीं है बल्कि वजन जो बढ़ता है, वह चर्बी के रूप में बढ़ता है. रिसर्च की मानें तो इन इंजेक्शन्स की वजह से घटने वाले वजन का 25 से 60 प्रतिशत हिस्सा मांसपेशियों से जुड़ा होता है लेकिन वजन जब वापस आता है तो सिर्फ फैट ही बढ़ता है.
डॉक्टरों का कहना है कि इन इंजेक्शनों का साइड इफेक्ट भी है. करीब 70 प्रतिशत लोगों को मतली होती है. इन दवाओं के वजह से पेट खाली होने की प्रक्रिया को बहुत धीमी हो जाती है. आम तौर पर खाना दो से चार घंटे में पच जाता है लेकिन इन इंजेक्शनों की वजह से खाना पचने में आठ से नौ घंटे घंटे लग जाते हैं. इससे बदबूदार डकार, पाचन संबंधी दिक्कतें और गैस होती है. इंजेक्शनों की वजह से मांसपेशियों की कमजोरी, चेहरे का सूखापन, हड्डियों का घनत्व कम होना और फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ जाता है. इससे पेट की स्थाई समस्या और आंखों की गंभीर बीमारी भी होने की आशंका रहती है.
वजन कम कैसे होता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंजेक्शन मोटापे को जड़ से सही नहीं करता. वजन घटाने का बेहतर तरीका कम कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट वाला भोजन, इंटरमिटेंट फास्टिंग और नियमित व्यायाम है. हालांकि, इन इंजेक्शनों को बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि ये इंजेक्शन सुरक्षित हैं और डॉक्चटरों की निगरानी में ही लेने चाहिए.
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