सीएम पुष्कर सिंह धामी से मिले मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री, उत्तराखंड में हरित क्रांति पर बनी बड़ी योजना
Uttarakhand News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में रविवार का दिन विकास की नई संभावनाओं के नाम रहा. प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री तथा नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख राकेश शुक्ला ने शिष्टाचार भेंट की. इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान उत्तराखंड सरकार के वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे. बैठक का माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण रहा, जहां दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक अनुभवों को साझा करने और जनकल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाने पर लंबी बातचीत हुई. दोनों ही नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश के दो प्रमुख राज्यों का यह तालमेल आने वाले समय में विकास के नए रास्ते खोलेगा.
विकास योजनाओं और जनहित पर गहन विमर्श
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला के बीच समसामयिक घटनाक्रमों के साथ-साथ दोनों राज्यों में चल रही प्रमुख विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि आम जनता के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए निरंतर नवाचार की आवश्यकता होती है. मध्य प्रदेश और उत्तराखंड, दोनों ही राज्य अपनी भौगोलिक और सामाजिक प्राथमिकताओं के अनुसार नीतियां बना रहे हैं. ऐसे में एक-दूसरे के सफल प्रयोगों से सीख लेकर अपने-अपने राज्यों में योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर सहमति बनी. दोनों प्रतिनिधियों ने माना कि जनहित के मुद्दों पर अंतर्राज्यीय संवाद लोकतंत्र और सुशासन को और अधिक मजबूत बनाता है.
हरित ऊर्जा और सतत विकास पर विशेष ध्यान
मध्य प्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की कमान संभाल रहे राकेश शुक्ला के साथ हुई इस चर्चा का एक बड़ा हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य पर केंद्रित रहा. उत्तराखंड अपनी जलविद्युत संपदा और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जबकि मध्य प्रदेश ने बीते कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया है. बैठक में इस बात पर विचार हुआ कि कैसे दोनों राज्य मिलकर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं. सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना, पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसे गंभीर विषयों पर तकनीकी ज्ञान और अनुभवों के आदान-प्रदान को बेहद जरूरी बताया गया. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालयी राज्य होने के नाते उत्तराखंड के लिए पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा समाधान बेहद महत्वपूर्ण हैं.
सांस्कृतिक रिश्तों और सहयोग की मजबूत डोर
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के बीच केवल प्रशासनिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आत्मीय स्तर पर भी बहुत पुराना और गहरा नाता रहा है. उन्होंने कहा कि जब दो राज्य अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को एक दूसरे के साथ बांटते हैं, तो इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है बल्कि नीतियों को जमीन पर उतारने की गति भी तेज हो जाती है. सीएम धामी ने इस बात पर बल दिया कि मध्य प्रदेश द्वारा ऊर्जा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए गए नवाचारों से उत्तराखंड भी बहुत कुछ सीख सकता है, ठीक उसी प्रकार जैसे उत्तराखंड के पर्यटन और पर्यावरणीय प्रबंधन के अनुभव अन्य राज्यों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं.
उत्तराखंड के विकास मॉडल की सराहना
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने भी उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे जनकल्याणकारी कार्यों की दिल खोलकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने अधोसंरचना, सड़क संपर्क और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है. राकेश शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार किस तरह से अपने नागरिकों तक सस्ती और निरंतर हरित ऊर्जा पहुंचाने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है. उन्होंने आशा जताई कि दोनों राज्यों के बीच शुरू हुआ यह सकारात्मक संवाद भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के कई नए द्वार खोलेगा. दोनों पक्षों ने भविष्य में भी इस प्रकार के संवाद को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई.
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SIR: देश के इन नामचीन लोगों को इलेक्शन कमीशन का नोटिस, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से जुड़ा मामला
दिल्ली में जारी SIR के दौरान, मतदाता सूची में सामने आ रही विभिन्न विसंगतियों के कारण कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर से लेकर पूर्व आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ जैसे कई नामचीन चेहरे शामिल हैं. इलेक्शन कमीशन के अनुसार, अधिकतर मामलों में पुराने मतदाता रिकॉर्ड से वर्तमान मतदाता रिकॉर्ड की मैपिंग न होने या फिर अन्य विवरणों में अंतर मिलने के वजह से नोटिस जारी किया गया है.
33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान, लगभग 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है. अधिकारियों के अनुसार, इनमें 31,63,930 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुका है. ये नोटिस चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में सामने आई अलग-अलग तार्किक विसंगतियों और पिछली SIR की मतदाता सूची से रिकॉर्ड की मैपिंग नहीं होने के मामलों में दिए जा रहे हैं.
सत्यापन के बाद फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया जाएगा नाम
चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि नोटिस मिलने का मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि मतदाता का नाम सीधे वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. नोटिस का उद्देश्य है कि मतदाता संबंधित विसंगतियों के जरूरी दस्तावेज और जानकारी देकर रिकॉर्ड का सत्यापन करवा दे. सत्यापन के बाद पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे.
किन-किन नामचीन लोगों को जारी किया गया नोटिस
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी, वजह- ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगिरी में जारी किया गया नोटिस
पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी को भी नोटिस, वजह- ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगिरी में जारी किया गया नोटिस
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई और उनके परिवार को SIR नोटिस, वजह- ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगिरी में जारी किया गया नोटिस
पूर्व दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को भी नोटिस, वजह- ‘Unmapped with Last SIR’ कैटेगिरी में जारी किया गया नोटिस
पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और उनके परिवार को SIR नोटिस, वजह- सिसोदिया की पत्नी के रिकॉर्ड में ‘Self Name Mismatch’, सिसोदिया के बेटे के रिकॉर्ड में ‘Parent Name Mismatch’
4 नवंबर को जारी की जाएगी फाइनल वोटर लिस्ट
दिल्ली के चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने मामले में साफ कहा कि नोटिस मिलने का मतलब वोटर लिस्ट से नाम कटना बिल्कुल भी नहीं है. बिना सुनवाई के और बिना उचित आदेश के किसी भी मतदाता का नाम नहीं कटेगा. जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें जवाब देने और जरूरी दस्तावेज पेश करने का पूरा मौका दिया जाएगा. 29 अक्टूबर तक नोटिस के मामलों को निपटाया जाएगा. 4 नवंबर को अंतिम और फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी.
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