ईरान में बिगड़ते हालातों का असर हवाई उड़ानों पर भी देखने को मिलने लगा है। ईरान ने सभी के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने पायलटों को नया फरमान जारी किया है। एयरस्पेस के बंद होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है। खासकर मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण ईरान के ऊपर से गुजरने वाली सभी उड़ानों के रूट में बदलाव करने का बड़ा फैसला किया गया है। इस बदलती स्थिति में एयर इंडिया ने अपने यात्रियों के लिए एक ट्रेवल एडवाइज़री जारी की है। एयर इंडिया ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ईरान में बन रहे हालात, उसके एयर स्पेस बंद होने और हमारे यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एयर डिया की जो फ्लाइट्स उस इलाके के ऊपर गुजर रही थी, वह अब दूसरे रास्ते का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे देरी हो सकती है।
इसके साथ ही इंडिगो ने भी यात्रियों के लिए ट्रेवल एडवाइस जारी करते हुए कहा कि ईरान का हवाई क्षेत्र बंद होने से कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ाने प्रभावित हो सकती हैं। इस स्थिति पर एयरलाइंस का नियंत्रण नहीं है। इसलिए यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए में खेद है। ईरान के ऊपर से ना उड़ने का मतलब है कि विमानों को लंबा रास्ता तय करना होगा। उदाहरण के लिए दिल्ली से लंदन या पेरिस जाने वाले फ्लाइट्स को अब घंटों का अतिरिक्त समय लगेगा। ज्यादा दूरी का मतलब ज्यादा ईंधन और ज्यादा ईंधन का मतलब हवाई टिकट के दाम में भारी बढ़ोतरी। वहीं जानकारों का मानना है कि इंटरनेशनल फ्लाइट्स के टिकट 20 से 30% महंगे हो सकते हैं। दरअसल ईरान और अमेरिका के बीच मिसाइलें किसी भी वक्त तैनात हो सकती हैं। ऐसे में सिविल एिएशन को सबसे ज्यादा खतरा होता है। इतिहास गवाह है युद्ध की स्थिति में गलतफहमी की वजह से यात्री विमानों को निशाना बनाया गया है। कोई भी एयरलाइंस 2026 में वैसा जोखिम नहीं लेना चाहती और यही वजह है एयर इंडिया और इंडिगो ने यह बड़ा फैसला किया है। वहीं इस एडवाइज़री के बाद दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर अफरातफरी का माहौल है।
ईरान का हवाई क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
ईरान का हवाई क्षेत्र महाद्वीपों के बीच छोटे मार्ग उपलब्ध कराता है क्योंकि यह देश विमानन कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम मार्ग पर स्थित है। यह महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम हवाई मार्ग मध्य पूर्व से होकर गुजरने वाला यूरोप-एशिया हवाई गलियारा है, जिसमें ईरानी हवाई क्षेत्र एक केंद्रीय कड़ी के रूप में कार्य करता है। यह यूरोप और दक्षिण एशिया, दक्षिणपूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के बीच सबसे सीधा वृत्ताकार मार्ग है, जिससे विमानन कंपनियों को समय और ईंधन की बचत होती है। ईरान के चारों ओर से होकर जाने पर विमानन कंपनियों को घंटों का अतिरिक्त समय और लागत का नुकसान होता है। अंतर्राष्ट्रीय एयरलाइंस ईरान के आसपास उत्तर और दक्षिण की ओर डायवर्ट की गईं, लेकिन एक बार प्रतिबंध बढ़ाए जाने के बाद, ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रतिबंध समाप्त हो गया है और कई घरेलू उड़ानें सुबह 7 बजे (स्थानीय समय) के तुरंत बाद उड़ान भरने लगीं। जर्मनी ने एक नया निर्देश जारी कर देश की एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनी दी, यह निर्देश क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच लुफ्थांसा द्वारा मध्य पूर्व में अपने उड़ान परिचालन में बदलाव करने के कुछ ही समय बाद जारी किया गया।
ईरान की घातक विमान पहचान की गलती
पिछले साल जून में ईरान ने इज़राइल के खिलाफ 12 दिनों के युद्ध के दौरान अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। इस दौरान तेहरान और तेल अवीव के बीच इज़राइल-हमास युद्ध को लेकर गोलीबारी हुई थी। ईरान ने अतीत में एक वाणिज्यिक विमान को शत्रुतापूर्ण लक्ष्य समझ लिया था, जो एक घातक गलती थी और जिसमें 170 से अधिक लोग मारे गए थे। 2020 में, ईरानी वायु रक्षा ने यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की उड़ान PS752 को दो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से मार गिराया, जिसमें सवार सभी 176 लोग मारे गए। ईरान ने विमान को मार गिराने के आरोपों को पश्चिमी दुष्प्रचार बताकर कई दिनों तक इनकार किया, लेकिन अंततः इसे स्वीकार कर लिया।
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