Kerala University में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक के मसौदे का कर्मचारी यूनियन ने किया विरोध
केरल विश्वविद्यालय छात्र आचार संहिता नियमावली के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर विरोध बढ़ गया है। मसौदे में परिसर और संबद्ध कॉलेजों में राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियमों को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इन्हें लागू किया गया है। वाम-समर्थक ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ के सदस्यों के अनुसार, विश्वविद्यालय सिंडिकेट ने हाल में इन मसौदा नियमों पर विचार किया।
इन नियमों में छात्र संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन, धरना, नए सदस्य बनाना, दीवारों पर पोस्टर और नारे लिखना, चंदा इकट्ठा करना, राजनीतिक हस्तियों के साथ कार्यक्रम आयोजित करना और ऑनलाइन चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाने जैसी बातें शामिल हैं। यूनियन के सदस्यों ने कहा कि मसौदे में विश्वविद्यालय परिसर के विभागाध्यक्षों और संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देने की बात कही गई है। इसमें निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि हिंसक गतिविधियों में शामिल छात्रों को एक साल के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित दंड में छात्रों पर 5,000 रुपये, राजनीतिक संगठनों पर 10,000 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। बकाया जुर्माने को देय राशि माना जाएगा और इसके कारण राजस्व वसूली तथा संभावित रूप से संपत्ति कुर्क की जा सकती है।
साथ ही, परीक्षा के नतीजे रोके जा सकते हैं और ‘भारतीय न्याय संहिता’ व ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये नियम परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश हैं और अलोकतांत्रिक हैं।
यूनियन ने कहा है कि अगर ये नियम लागू किए गए तो वे प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि ऐसी पाबंदियों से संगठनात्मक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी कम हो जाएगी। केरल विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार रेशमी आर ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अभी सिर्फ एक मसौदा तैयार किया गया है और इसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
Salamabad Trade Centre: महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला से केंद्र के समक्ष मुद्दा उठाने की अपील की
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से उरी के पास नियंत्रण रेखा (एलओसी) स्थित सलामाबाद व्यापार सुविधा केंद्र को पर्यटन केंद्र में बदलने के मुद्दे को केंद्र के समक्ष उठाने का आग्रह किया। महबूबा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सलामाबाद व्यापार सुविधा केंद्र का निर्माण विभाजित परिवारों को जोड़ने, व्यापार को फिर से शुरू करने और घावों को भरने के लिए किया गया था, न कि इसे महज एक पर्यटन स्थल में बदलने के लिए। इसके लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और मुजफ्फराबाद चलो रैली के दौरान पीडीपी के कई कार्यकर्ताओं ने अपनी जान गंवाई।
मैं उमर अब्दुल्ला से आग्रह करती हूं कि वह इस मुद्दे को भारत सरकार के समक्ष उठाएं और इसका मूल उद्देश्य बहाल करें।’’ पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाले मार्गों को फिर से खोलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर को बाहरी दुनिया से और अधिक जोड़ने वाले पुलों की जरूरत है, न कि उन संपर्कों को बंद करने की।’’ सलामाबाद व्यापार सुविधा केंद्र की स्थापना 2008 में भारत और पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर एवं पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के बीच वस्तु-विनिमय आधारित व्यापार पर सहमति बनने के बाद की गई थी। भारत सरकार के अनुसार, सलामाबाद और चकन-दा-बाग के जरिये सीमा पार व्यापार अक्टूबर 2008 में शुरू हुआ था।
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2019 में नियंत्रण रेखा के पार होने वाले व्यापार को निलंबित कर दिया था। गृह मंत्रालय ने उस समय कहा था कि इन मार्गों का इस्तेमाल अवैध हथियार, मादक पदार्थ और जाली मुद्रा को लाने ले जाने के लिए किया जा रहा था। पिछले सप्ताह पर्यटन विभाग ने व्यापार सुविधा केंद्र को अपने अधीन ले लिया।
यह केंद्र पिछले सात वर्षों से निष्क्रिय था।
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