उत्तराखंड में 160 किमी लंबे 51 Ropeway प्रोजेक्ट प्रस्तावित, 9 नवंबर से शुरू होगा काम
उत्तराखंड को देश का प्रमुख ‘रोपवे हब’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार और केंद्र की साझेदारी में करीब 160 किलोमीटर लंबाई की 51 रोपवे परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को नौ नवंबर तक परियोजनाओं का काम धरातल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
नौ नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस है। अधिकारियों ने कहा कि राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में रोपवे सड़क परिवहन का बेहतर विकल्प बन सकते हैं और इससे धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ ही सड़कों पर यातायात का दबाव और वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही इसके जरिए पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रोपवे संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटक और तीर्थयात्री उत्तराखंड पहुंचे थे। अधिकारियों के मुताबिक, देहरादून-मसूरी रोपवे का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
करीब 5.2 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के बनने के बाद देहरादून से मसूरी का सफर करीब 15 से 20 मिनट में पूरा हो जाएगा जबकि वर्तमान में इसमें लगभग एक-डेढ़ घंटे लगता हैं। इसी प्रकार, उत्तरकाशी जिले में जानकी चट्टी (खरसाली)-यमुनोत्री रोपवे से श्रद्धालुओं को करीब पांच किलोमीटर की खड़ी पैदल चढ़ाई से राहत मिलेगी, वहीं चंपावत जिले के ठुलीगाड़-पूर्णागिरि रोपवे से पूर्णागिरि धाम की यात्रा आसान होने की उम्मीद है। प्रदेश के आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि फिलहाल ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिद्वार की एकीकृत रोपवे परियोजना पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है।
नीलकंठ रोपवे की कुल प्रस्तावित लंबाई छह किलोमीटर है लेकिन पहले चरण में त्रिवेणी घाट से नीलकंठ महादेव मंदिर तक 4.1 किलोमीटर का रोपवे बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस रोपवे के बनने से ऋषिकेश में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रोपवे संपर्क से धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ सड़कों पर यातायात का दबाव घटेगा और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।
Summer Fashion: गर्मियों में दिखना है कंफर्टेबल और स्टाइलिश, तो इन आरामदायक फैब्रिक के कपड़ों को चुनें
Summer Fashion: अप्रैल का महीना शुरू होते ही गर्मी का प्रभाव बढ़ने लगा है। ऐसे सीजन में सबसे मुश्किल आती है, अपने लिए परफेक्ट ड्रेस सेलेक्ट करने में। इस सीजन में आपको ऐसे फैब्रिक की ड्रेस पहननी चाहिए, जो कंफर्टेबल होने के साथ-साथ गर्मी से भी राहत दिलवाए। हम आपको यहां कुछ ऐसे ही ड्रेस फैब्रिक के ऑप्शंस के बारे में बता रहे हैं।
कॉटन
गर्मी के मौसम के लिए कॉटन के आउटफिट्स, बेस्ट माने जाते हैं। इनमें पसीना काफी जल्दी सूख जाता है, इसलिए ये गर्मी के मौसम में काफी आराम पहुंचाते हैं। इस फैब्रिक में त्वचा को हवा मिलती रहती है, जिससे पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर ठंडा रहता है। इसीलिए कॉटन कुर्तियां या टॉप्स, इस सीजन के लिए सबसे अच्छे ऑप्शन माने जाते हैं। इसके अलावा आप कॉटन की साड़ियां भी कैरी कर सकती हैं। ये आपको ट्रेडिशनल लुक देने के साथ-साथ कंफर्टेबल भी होती हैं।
शिफॉन
शिफॉन फैब्रिक पहनने में काफी थिन, सॉफ्ट और लाइट फीलिंग देता है। हालांकि यह फैब्रिक स्वेट-फ्री नहीं होता, यानी इसमें पसीना तो आता है लेकिन इसका फ्लोई नेचर आपको गर्मी से राहत देता है। यह फैब्रिक साड़ी, सूट, पार्टी वियर ड्रेस और कुर्तियों के लिए परफेक्ट माना जाता है। इसमें आपको स्टाइलिश लुक मिलता है।
लिनेन
लिनेन भी ऐसा फैब्रिक है, जिससे बनी ड्रेसेस को इस सीजन में बहुत पसंद किया जाता है। आजकल यह फैब्रिक काफी ट्रेंड में भी है। यह कॉटन फैब्रिक से भी लाइटर होता है, और पहनने के बाद एलिगेंट लुक देता है। इस फैब्रिक के आउटफिट पहनने से ज्यादा गर्मी महसूस नहीं होती और साथ ही यह पसीना सोखने में भी असरदार साबित होता है। इस फैब्रिक के ट्राउजर, शर्ट, कुर्ता, साड़ियां और अन्य ड्रेसेस इस सीजन के लिए एक अच्छा ऑप्शन माने जाते हैं।
खादी
गर्मी से राहत पाने के लिए खादी को सुपर कंफर्टेबल फैब्रिक माना जाता है। गर्मी में यह आसानी से पसीने को सोख लेता है और शरीर को ठंडक का अहसास कराता है। ऐसे में खादी के कुर्ते, सूट, साड़ी, शर्ट, स्कर्ट कैरी कर सकती हैं। खादी का फैब्रिक, कॉटन फैब्रिक से थोड़ा मोटा होता है। साथ ही यह ईकोफ्रेंडली भी होता है। खादी भारतीय परंपरा का हिस्सा होने के साथ-साथ बेहद आरामदायक भी होता है। यह नेचुरल फाइबर्स से बना होता है, जिससे सेंसिटिव स्किन वाली महिलाएं भी खादी से बनी ड्रेसेस बिना किसी परेशानी के पहन सकती हैं।
रेयॉन
हालांकि रेयॉन एक सिंथेटिक फाइबर है, लेकिन इसकी बनावट नेचुरल फाइबर्स जैसी होती है, जिससे यह बेहद सॉफ्ट और कंफर्टेबल लगता है। गर्मी के मौसम के लिए रेयॉन के टॉप्स या अन्य ड्रेसेस का चयन, पार्टी वियर या रोजमर्रा के उपयोग के लिए किया जा सकता है। क्योंकि यह पसीना जल्दी सोख लेता है। इस फैब्रिक की ड्रेसेस, न केवल स्टाइलिश लुक देती हैं। बल्कि लाइटर भी होती हैं। देखने में यह बिल्कुल सिल्क जैसा लगता है। इस फैब्रिक से अनारकली, मैक्सी और वेस्टर्न आउटफिट तैयार कराए जा सकते हैं।
जॉर्जेट
जॉर्जेट एक लाइट और फ्लोई फैब्रिक होता है। यह फैब्रिक शिफॉन जैसा दिखता है, इसे साड़ियों के अलावा टॉप्स सूट ड्रेस, शर्ट और कुर्ते के रूप में पहना जा सकता है। यह समर सीजन के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह लाइट फैब्रिक गर्मियों में खूबसूरत लगने के साथ-साथ काफी सुकून भी देता है।
शॉम्ब्रे
शॉम्ब्रे काफी हद तक लिनेन और कॉटन जैसा ही होता है। यह दिखने में डेनिम की तरह होता है। लेकिन यह उससे अधिक लाइटर होता है। इस फैब्रिक की बॉटम्स, शर्ट्स और ड्रेस बनवाई जा सकती हैं या फिर बाजार से रेडिमेड ड्रेस खरीदी जा सकती हैं। गर्मियों में इसे पहनने से कूल लुक मिलता है।
(यह जानकारी फैशन स्टाइलिस्ट पल्लवी अग्रवाल से ललिता गोयल की बातचीत पर आधारित है)
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