"अमेरिकी बेस को बनाएंगे निशाना..." ईरान की US को खुली चुनौती, क्या अब होने वाला है युद्ध?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कतर में स्थित अल उदीद एयर एक बार फिर चर्चा में है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अगर वाशिंगटन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, तो उन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा जो पड़ोसी देशों में स्थित हैं. यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के आंतरिक हालात और विरोध प्रदर्शनों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.
कर्मचारियों को हटने के लिए निर्देश
तीन राजनयिक सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य कर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और कुछ कर्मचारियों को क्षेत्र के मुख्य अमेरिकी एयर बेस से हटने की सलाह भी दी गई है. हालांकि, अभी तक बड़े पैमाने पर निकासी के संकेत नहीं मिले हैं, जैसी स्थिति पिछले साल ईरानी मिसाइल हमले से पहले देखी गई थी.
अल उदीद एयर बेस क्यों है अहम?
कतर में स्थित अल उदीद एयर बेस अमेरिकी सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड हेडक्वार्टर है. यही कमांड मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी करता है. इस बेस पर करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. यहां से खाड़ी क्षेत्र, इराक और सीरिया में हवाई अभियानों, खुफिया गतिविधियों, निगरानी और लॉजिस्टिक्स को संचालित किया जाता है.
पिछले साल, जब अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे, तब भी इस क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी ठिकानों से कर्मियों और उनके परिवारों को पहले ही हटा लिया गया था. जून में हुए उन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अल उदीद एयर बेस पर मिसाइल हमला किया था, जिसने इस ठिकाने की संवेदनशीलता को और उजागर किया.
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
अमेरिका की सबसे घनी सैन्य मौजूदगी खाड़ी देशों में मानी जाती है. Bahrain में नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन स्थित है, जहां से अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट खाड़ी और अरब सागर में नौसैनिक अभियानों की निगरानी करता है. Kuwait में कैंप आरिफजान और अली अल सालेम एयर बेस अहम लॉजिस्टिक केंद्र हैं, जो इराक और सीरिया में अमेरिकी तैनाती को समर्थन देते हैं. वहीं United Arab Emirates में अल धफरा एयर बेस पर अमेरिकी विमान और खुफिया संसाधन तैनात हैं.
इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकाने
ईराक में अमेरिकी बल अल असद और एरबिल जैसे ठिकानों से काम करते हैं. इनका मुख्य उद्देश्य आईएसआईएस विरोधी अभियान है, हालांकि हाल के वर्षों में सैनिकों की संख्या घटाई गई है. पूर्वी सीरिया में अमेरिका छोटे सैन्य ठिकानों के जरिए कुर्द नेतृत्व वाली सेनाओं का समर्थन करता है. ये औपचारिक रूप से स्थायी बेस नहीं माने जाते, लेकिन अग्रिम सैन्य चौकियों की तरह काम करते हैं.
इजरायल और सऊदी अरब की स्थिति
अमेरिका के पास इजरायल में कोई बड़ा पारंपरिक सैन्य बेस नहीं है, लेकिन संयुक्त मिसाइल रक्षा और रडार सिस्टम वहां तैनात हैं, जो मिसाइल हमलों की शुरुआती चेतावनी के लिए अहम माने जाते हैं. सऊदी अरब में अमेरिकी सैनिक रोटेशनल आधार पर तैनात रहते हैं. इनमें एयर डिफेंस यूनिट्स और सैन्य सलाहकार शामिल हैं, हालांकि यहां किसी स्थायी अमेरिकी बेस की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.
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भारत और क्यूबा ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और क्यूबा ने आपसी सहयोग और एकजुटता के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 66वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह संकल्प व्यक्त किया गया।
भारत और क्यूबा के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1960 में स्थापित हुए थे। क्यूबा की क्रांति को मान्यता देने वाले शुरुआती एशियाई देशों में भारत शामिल था। शुरुआती दौर में चे ग्वेरा और फिदेल कास्त्रो की भारत यात्राओं तथा भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ हुए संवादों ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती दी।
पिछले वर्ष भारत-क्यूबा द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय गति देखने को मिली। इसका प्रमुख उदाहरण ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल के बीच हुई मुलाकात रही।
उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के तहत क्यूबा के उप प्रधानमंत्री एडुआर्डो मार्टिनेज डियाज की भारत यात्रा और भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा की क्यूबा यात्रा भी हुई। इन यात्राओं के दौरान कानूनी और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत क्यूबा के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक अहम साझेदार बना हुआ है। दोनों देश बायोटेक्नोलॉजी, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा और खनन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है, जिसके तहत क्यूबा के पेशेवर आईटीईसी कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन में भी नए प्रयास शुरू किए गए हैं।
शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग ने भी वर्ष भर द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त किया। दोनों देशों ने विश्वास जताया कि वर्ष 2026 में यह साझेदारी और मजबूत होगी, खासकर भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता से नए अवसर सृजित होंगे।
नवंबर में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ अर्थात सारा विश्व एक परिवार है, की भावना के तहत भारत ने तूफान मेलिसा से प्रभावित क्यूबा के लोगों के साथ एकजुटता दिखाई। भारत ने हवाना को लगभग 20 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी, जिससे दोनों देशों के बीच मित्रता और मानवीय सहयोग के संबंध और प्रगाढ़ हुए।
इस सहायता में ‘भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री’ चिकित्सा ट्रॉमा यूनिट, आवश्यक दवाइयां, बिजली जनरेटर, टेंट, बिस्तर, रसोई और स्वच्छता किट, सोलर लैंटर्न तथा अन्य जरूरी सामग्री शामिल थी।
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो एडुआर्डो रोड्रिगेज़ पैरिल्ला ने भारत के प्रति आभार जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हम तूफान मेलिसा से प्रभावित क्यूबा के पूर्वी हिस्सों के पीड़ितों के लिए भेजी गई सहायता सामग्री के लिए भारत का धन्यवाद करते हैं। भारत सरकार की इस मानवीय पहल के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर का आभार।”
--आईएएनएस
डीएससी
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