विदेशी निवेशकों ने Stock Market से की भारी निकासी, सितंबर में निकाले 20,974 करोड़ रुपये
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और बढ़ता बॉण्ड प्रतिफल, महंगे कच्चे तेल तथा कमजोर होते रुपये के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी हैं। एफपीआई ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयरों से 20,974 करोड़ रुपये निकाले हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में हुई बिकवाली से पहले विदेशी निवेशकों ने जुलाई और अगस्त में भारतीय शेयरों में क्रमशः 20,200 करोड़ रुपये और 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
सितंबर की बिकवाली के साथ ही 2026 में एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा 2025 में पूरे साल के दौरान हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है। हालांकि, इस दौरान प्राथमिक या आईपीओ बाजार के जरिये एफपीआई का निवेश जारी रहा।
वहीं, विदेशी निवेशकों ने भारतीय ऋण या बॉण्ड बाजार में भी बिकवाली की। उन्होंने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के जरिये 10,296 करोड़ रुपये, स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत 1,817 करोड़ रुपये और सामान्य मार्ग से 1,068 करोड़ रुपये की निकासी की। चॉइस वेल्थ के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौड़ के मुताबिक, एफपीआई की हालिया बिकवाली के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं।
अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ऊंचा बॉण्ड प्रतिफल, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें तथा भारतीय रुपये में कमजोरी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें 3.75-4 प्रतिशत के स्तर पर हैं। इससे भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का अंतर कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण घटा है।
दूसरी ओर, ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने महंगे तेल को लेकर चिंता और बढ़ा दी है, जिसका असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ सकता है। रुपये पर भी दबाव बना हुआ है।
पिछले सप्ताह रुपये में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो चार महीने में उसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। रुपया 95.92-95.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास कारोबार करता रहा और कारोबार के दौरान 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर गया। ‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेदांत गुप्ते ने कहा कि सितंबर की एफपीआई बिकवाली को मुख्य रूप से कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी का असर केवल भारत पर नहीं, बल्कि उभरते बाजारों पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।
Supertech की रुकी परियोजनाओं पर NCLAT सख्त, IRP की नियुक्ति एक सप्ताह में करने का आदेश
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सार्वजनिक क्षेत्र की निर्माण क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी द्वारा सुपरटेक लिमिटेड की अटकी आवासीय परियोजनाओं में निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने में देरी को लेकर चिंता जताई है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने रियल एस्टेट कंपनी के लिए अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) की नियुक्ति में हो रही देरी पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। सुपरटेक फिलहाल कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में है।
एनसीएलएटी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) को आईआरपी की नियुक्ति के लिए नाम सुझाने की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण ने शुक्रवार को पारित अपने पांच पृष्ठ के अंतरिम आदेश में कहा कि आईआरपी की नियुक्ति के लिए आवेदन पर एनसीएलटी द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है और आईबीबीआई को नाम सुझाने हैं। आदेश में कहा गया कि यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।
नियुक्त होने वाला समाधान पेशेवर अटकी हुई सुपरटेक परियोजनाओं की निगरानी कर रही उच्चतम न्यायालय की समिति का प्रमुख होने के साथ-साथ परियोजना-वार न्यायालय की समिति की अध्यक्षता भी करेगा। न्यायाधिकरण ने एनबीसीसी द्वारा पूर्व में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किए जाने का भी संज्ञान लिया। एनसीएलएटी ने छह मई, 2026 के अपने आदेश में सुपरटेक की परियोजनाओं में निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने के लिए विभिन्न शर्तों और समयसीमाओं का निर्धारण किया था।
न्यायाधिकरण के अनुसार, कुछ शर्तें 31 जुलाई, 2026 तक पूरी की जानी थीं। इनमें परियोजनाओं की उचित जांच, संबंधित वैधानिक निकायों से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करना, निर्माण कार्य का ठेका देना, परियोजनाओं का कब्जा एनबीसीसी को सौंपना और आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराना शामिल था। एनबीसीसी को निर्माण कार्य के ठेके की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक महीने के भीतर अनुबंध पूरा करना था और एक अक्टूबर, 2026 से निर्माण कार्य शुरू किया जाना था।
हालांकि, 10 सितंबर को उच्चतम न्यायालय की समिति द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट में एनबीसीसी को इन शर्तों को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में लंबित शर्तों के लिए नई संभावित समयसीमा नहीं बताई गई थी। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय की समिति की ओर से पेश वकील ने बताया कि 20 सितंबर को एनबीसीसी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक बैठक प्रस्तावित है, जिसमें लंबित शर्तों को पूरा करने और निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निश्चित समयसीमा तय किए जाने की उम्मीद है।
न्यायाधिकरण ने यह भी संज्ञान लिया कि एनबीसीसी द्वारा सुपरटेक के निलंबित पूर्व प्रबंधन से मांगे गए कुछ दस्तावेज अभी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। एनसीएलएटी ने इन दस्तावेजों की सूची पेश करने और उसे निलंबित प्रबंधन के वकील के साथ साझा करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर, 2026 को होगी।
गौरतलब है कि 12 दिसंबर, 2024 को एनसीएलएटी ने उच्चतम न्यायालय की समिति का गठन किया था और एनबीसीसी को सुपरटेक की 16 अटकी आवासीय परियोजनाओं को अपने हाथ में लेकर पूरा करने का निर्देश दिया था। परियोजनाओं की निगरानी के लिए परियोजना-वार समितियों के गठन और अलग-अलग खातों के रखरखाव का भी निर्देश दिया गया था। सुपरटेक के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया 20 मार्च, 2021 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने उसके प्रमुख ऋणदाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू की थी।
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