साइबर लिटरेसी- पोर्न देखने के चक्कर में बैंक अकाउंट खाली:सरकार की चेतावनी, एडल्ट एप्स की लिस्ट जारी, भूलकर भी ये एप न खोलें
साइबर ठग लोगों को चूना लगाने के लिए रोज नए हथकंडे अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर एडल्ट पोर्न कंटेंट का विज्ञापन दिखाकर लोगों को निशाना बनाना ठगों का नया हथियार है। स्कैमर यूजर्स को एडल्ट एप्स का विज्ञापन दिखाते हैं। वे जानते हैं कि लोग ऐसे विज्ञापनों के झांसे में आ सकते हैं और एप डाउनलोड कर सकते हैं। एक बार एप डाउनलोड हो जाए तो वे बहुत से एक्सेस और परमिशन मांगते हैं और यूजर का फोन हैक कर लेते हैं। एक बार फोन कंट्रोल में आ जाए तो ठग इससे कई तरह के फ्रॉड को अंजाम दे सकते हैं। हाल ही में गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने ऐसे एडल्ट कंटेंट एप्स को लेकर एडवाइजरी जारी की है। साथ ही खतरनाक एप्स की एक लिस्ट भी जारी की है। ऐसे में इस नए स्कैम के बारे में समझना बेहद जरूरी है। इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘एडल्ट एप्स स्कैम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- एडल्ट एप्स क्या हैं? जवाब- ये ऐसे एंड्रॉयड एप हैं, जिनमें फोटो-वीडियो या दूसरी तरह के एडल्ट पोर्न कंटेंट होते हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए ये कंटेंट देखने के लिए लाेगों से संदिग्ध एप्स डाउनलोड कराते हैं। बाद में इन एप्स का इस्तेमाल फ्रॉड के लिए करते हैं। सवाल- सरकार ने एडल्ट कंटेंट वाले एंड्राॅयड एप्स को लेकर क्या एडवाइजरी जारी की है? जवाब- I4C के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एडल्ट कंटेंट के नाम से प्रचारित एंड्रॉयड एप्स खतरनाक हैं। इन्हें डाउनलोड करने से फोन का कंट्रोल साइबर अपराधियों के हाथ में जा सकता है और फाइनेंशियल फ्रॉड का रिस्क हो सकता है। सवाल- स्कैमर्स लोगों को अपने जाल में कैसे फंसा रहे हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- साइबर एजेंसियों ने किन एप्स को लेकर चेतावनी दी है? जवाब- I4C ने अपनी एडवाइजरी में ऐसे कई खतरनाक एडल्ट एप्स के नाम बताए हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- APK फाइल क्या होती है? जवाब- APK यानी एंड्रॉयड पैकेज किट। यह एंड्रॉयड फोन में एप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। आमतौर पर एप्स गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल होते हैं। लेकिन APK फाइल के जरिए इन्हें सीधे फोन में भी इंस्टॉल किया जा सकता है। साइबर ठग इसका गलत इस्तेमाल करते हैं। सवाल- संदिग्ध APK फाइल फोन में इंस्टॉल होने के क्या रिस्क हैं? जवाब- इससे साइबर अपराधियों को फोन और उसमें मौजूद संवेदनशील डिटेल्स तक पहुंच मिल सकती है। इससे बैंकिंग और UPI से जुड़े फ्रॉड का रिस्क बढ़ जाता है। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- कैसे पता चलेगा कि फोन में कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल हो चुका है? जवाब- फोन की एक्टिविटी में अचानक बदलाव और कोई अनजान एप दिखना इसका प्रमुख संकेत है। ऐसे सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- एक्सेसबिलिटी परमिशन क्या है? संदिग्ध एप को एक्सेस देने के क्या रिस्क हो सकते हैं? जवाब- यह एक सेंसिटिव परमिशन है, जो किसी एप को फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली चीजों को पढ़ने, यूजर इंटरफेस (UI) को समझने और टच या क्लिक जैसे काम करने की परमिशन देती है। किसी संदिग्ध एप को ये परमिशन देने से फ्रॉड का रिस्क हो सकता है। सवाल- किसी भी एप को एक्सेसबिलिटी परमिशन देते हुए क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- क्या सिर्फ एप को अनइंस्टॉल कर देने से खतरा खत्म हो जाता है? जवाब- नहीं, अगर एप को पहले से सेंसिटिव परमिशन मिली है तो उसे अनइंस्टॉल कर देने मात्र से रिस्क कम नहीं होता है। इसके लिए तुरंत कुछ कदम उठाएं- फोन की सेटिंग्स में जाकर एप की सभी परमिशन बंद करें। 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन करें। फ्रॉड की शंका हो तो साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। सवाल- क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन खतरनाक है? जवाब- नहीं, सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन खतरनाक नहीं होता। लेकिन किसी विज्ञापन को देखकर तुरंत उस पर क्लिक करना या एप डाउनलोड करना सुरक्षित नहीं है। खासकर ऐसे विज्ञापनों से सावधान रहें, जो डर, लालच या उत्सुकता पैदा करके तुरंत एक्शन के लिए उकसाएं। सवाल- संदिग्ध एप से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसके लिए ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ध्यान रखें- सवाल- अगर गलती से कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल हो जाए तो क्या करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- अगर ऐसे एप की वजह से ठगी का शिकार हो जाएं तो कहां शिकायत करें? जवाब- ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। साथ ही cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। अगर बैंक या UPI से जुड़ी ठगी हुई है, तो तुरंत संबंधित बैंक को सूचना दें। ………………………… ग्राफिक- अजीत सिंह ………………………….. ये खबर भी पढ़ें… साइबर लिटरेसी- गूगल रिव्यू के नाम पर स्कैम:युवक के 7 लाख ठगे, घर बैठे कमाई के झांसे में न आएं, जानें स्कैम से कैसे बचें? पिछले दिनों भोपाल के एक 29 साल के युवक के साथ ठगी की वारदात हुई। स्कैमर्स ने ‘गूगल रिव्यू’ से कमाई के नाम पर उससे कई लाख ठग लिए। ठगों ने पहले टेलीग्राम पर संपर्क किया और गूगल रिव्यू देने के बदले पैसे कमाने का ऑफर दिया। ये खबर भी पढ़ें…
जरूरत की खबर- प्लेटलेट्स के लिए खाएं ये 10 फूड:डॉक्टर से समझें इसका साइंस, हेल्दी रखने और नुकसान पहुंचाने वाली आदतों की लिस्ट
पश्चिम बंगाल में 18 सितंबर तक डेंगू के 5,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, दिल्ली में डेंगू के मरीजों की संख्या 432 पर पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों से भी लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। डेंगू के साथ जिस चीज का सबसे ज्यादा जिक्र होता है, वह है प्लेटलेट्स। डेंगू इतना खतरनाक इसीलिए हैं क्योंकि इसमें प्लेटलेट्स की संख्या अचानक कम हो जाती है। यह संख्या अगर 20,000 से नीचे पहुंच जाए तो ब्लीडिंग शुरू हो सकती है और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। इसलिए प्लेटलेट्स को समझना जरूरी है। यह क्या है, यह शरीर में क्या काम करता है और जीवन के लिए इतना क्रिटिकल क्यों है। साथ ही सामान्य स्थितियों में हेल्दी प्लेटलेट्स काउंट के लिए हमारी लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए। प्लेटलेट्स से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों पर बात करेंगे, आज ‘जरूरत की खबर’ में। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- प्लेटलेट्स क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- प्लेटलेट्स का हमारे शरीर में क्या काम है? जवाब- इन्हें ब्लड की ‘रिपेयरिंग यूनिट’ भी कह सकते हैं। जब शरीर में कहीं भी चोट लगती है और खून बहने लगता है तो प्लेटलेट्स तुरंत उस जगह पहुंच जाते हैं और खून को बहने से रोकते हैं। नीचे पॉइंटर्स में इनके सारे काम समझिए- सवाल- एक स्वस्थ शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कितनी होती है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में आमतौर पर प्रति माइक्रोलीटर (µL) ब्लड में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। अगर प्लेटलेट्स की संख्या इस सामान्य सीमा से कम या ज्यादा हो जाए, तो डॉक्टर इसके कारण की जांच करते हैं। सवाल- प्लेटलेट्स की संख्या जांचने के लिए कौन-सा टेस्ट होता है? जवाब- प्लेटलेट्स की संख्या और उनकी कार्यक्षमता चेक के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं- सवाल- किन बीमारियों में शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत कम हो सकती है? जवाब- प्लेटलेट्स कम होना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का संकेत हो सकता है। किन बीमारियों या स्थितियों में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- डेंगू होने पर प्लेटलेट्स की संख्या क्यों गिरती है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या इन बीमारियों के अलावा सामान्य स्थिति में भी प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है? जवाब- हां, कुछ स्थितियों में बिना किसी गंभीर बीमारी के भी प्लेटलेट्स की संख्या अस्थायी रूप से कम दिख सकती है, जैसेकि- कभी-कभी ब्लड सैंपल में प्लेटलेट्स आपस में चिपक जाने से भी रिपोर्ट में उनकी संख्या कम दिखाई दे सकती है। इसलिए एक बार प्लेटलेट्स कम आने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच करके कारण पता करते हैं। सवाल- शरीर में प्लेटलेट्स कम होने के क्या संकेत हैं? जवाब- जब प्लेटलेट्स का स्तर काफी कम होने लगता है, तो शरीर कुछ संकेत देता है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने के लिए कौन-से पोषक तत्व जरूरी हैं? जवाब- प्लेटलेट्स बनाने के लिए शरीर को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। हालांकि, कोई एक विटामिन या मिनरल अकेले प्लेटलेट्स नहीं बढ़ाता। प्लेटलेट्स का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है। इसमें संतुलित पोषण अहम भूमिका निभाता है। प्लेटलेट्स के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स की लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या कोई फूड सीधे प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाता है? जवाब- अभी तक ऐसा कोई फूड वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है, जो तुरंत प्लेटलेट्स बढ़ा दे। लेकिन कुछ पोषक तत्व प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया को सपोर्ट जरूर करते हैं। सवाल- कौन-से फूड प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में मदद करते हैं? जवाब- ग्राफिक में ऐसे फूड्स की लिस्ट देखिए- सवाल- कौन-से फूड या आदतें प्लेटलेट्स के दुश्मन हो सकते हैं? जवाब- कुछ फूड्स और लाइफस्टाइल हैबिट्स का प्लेटलेट्स प्रोडक्शन, उनकी कार्यक्षमता या शरीर की रिकवरी पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जैसेकि- सवाल- हेल्दी प्लेटलेट्स के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- क्या सिर्फ डाइट से प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य हो सकती है? जवाब- नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्लेटलेट्स कम क्यों हुए हैं। अगर प्लेटलेट्स किसी पोषण संबंधी कमी की वजह से कम हुए हैं, तो सही डाइट और जरूरी सप्लीमेंट्स मदद कर सकते हैं। अगर इसकी वजह कोई बीमारी (डेंगू, मलेरिया, लिवर डिजीज) है तो ऐसे में बीमारी का इलाज जरूरी है। प्लेटलेट्स से जुड़े कॉमन मिथ फैक्ट्स 1. मिथ- कीवी, पपीता खाने से प्लेटलेट्स तुरंत बढ़ जाते हैं। फैक्ट- ये दोनों चीजें पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन ये प्लेटलेट्स बढ़ाने की रामबाण दवा नहीं हैं। 2. मिथ- प्लेटलेट्स कम हैं तो सिर्फ आयरन खाने से बढ़ जाएंगे। फैक्ट- अगर कमी का कारण आयरन की कमी है, तो उसका इलाज मदद कर सकता है। हर मामले में आयरन लेने की जरूरत नहीं होती। 3. मिथ- प्लेटलेट्स जितने ज्यादा, उतना बेहतर। फैक्ट- शरीर को प्लेटलेट्स की सामान्य मात्रा चाहिए। बहुत ज्यादा या बहुत कम, दोनों स्थितियां ठीक नहीं हैं। 4. मिथ- डेंगू में प्लेटलेट्स गिरें तो तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी है। फैक्ट- हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। फैसला प्लेटलेट काउंट, ब्लीडिंग और मरीज की स्थिति देखकर किया जाता है। 5. मिथ- प्लेटलेट्स कम होने पर दूध-दही नहीं खाना चाहिए। फैक्ट- सामान्य तौर पर प्लेटलेट्स कम होने पर दूध और दही बंद करने की जरूरत नहीं होती, जब तक डॉक्टर ने कोई विशेष कारण न बताया हो। 6. मिथ- प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए ज्यादा विटामिन या सप्लीमेंट लेना चाहिए। फैक्ट- सप्लीमेंट तभी लेना चाहिए, जब कमी हो या डॉक्टर सलाह दें। जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान भी कर सकता है। 7. मिथ- प्लेटलेट्स कम होने का मतलब गंभीर बीमारी है। फैक्ट- जरूरी नहीं है। कभी-कभी संक्रमण या जांच के दौरान प्लेटलेट्स आपस में चिपकने से भी रिपोर्ट में संख्या कम दिख सकती है। मिथ 8- प्लेटलेट्स कम होने का मतलब हमेशा डेंगू होता है। फैक्ट- जरूरी नहीं है। कई अन्य बीमारियों और हेल्थ कंडीशंस में भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। …………………… ये खबर भी पढ़ें…. जरूरत की खबर- तुलसी पत्ती के फायदे:शुगर-बीपी कम करे, हार्ट को रखे हेल्दी, डॉक्टर से जानें इससे जुड़े मिथ और फैक्ट, ये लोग न खाएं घर में किसी को सर्दी-जुकाम या खांसी हो जाए तो दादी-नानी अक्सर ‘तुलसी का काढ़ा’ पीने की सलाह देती हैं। चरक संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में तुलसी को 'जड़ी-बूटियों की रानी' कहा गया है। हिंदू परंपरा में इसे पवित्र पौधा माना जाता है। साथ ही लंबे समय से औषधीय उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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