Indian Railway: जनरल टिकट बुक करने पर मिलेगा , सिर्फ इस ऐप पर ही मिलेगा फायदा
Indian Railway: रेलवन ऐप की मदद से अब जनरल टिकट भी बुक किया जा सकता है. खास बात है कि अगर आप रेलवन ऐप पर जनरल टिकट की पेमेंट UPI, क्रेडिट, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से करेंगे तो आपको 3 प्रतिशत का डिस्काउंट भी मिलेगा. डिस्काउंट सुविधा आज से शुरू हुई है. और भी खास बात ये है कि अगर आप जनरल टिकट की पेमेंट R-वॉलेट से करेंगे तो आपको दोगुना फायदा मिलेगा, क्योंकि फिर तीन प्रतिशत नहीं ब्लकि छह प्रतिशत डिस्काउंट मिलेगा.
ये ऑफर लिमिटेड पीरियड के लिए है. लोगों को सिर्फ 14 जुलाई 2026 तक यानी सिर्फ छह महीने ही डिस्काउंट मिलेगा. 30 दिसंबर को भारतीय रेलवे ने डिस्काउंट देने का ऐलान किया था.
किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलेगी यह छूट
रेलवे अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि ये छूट सिर्फ रेलवन ऐप पर ही मिलेगी. अगर यात्री किसी और प्लेटफॉर्म से टिकट बुक करता है तो उसे ये डिस्काउंट नहीं मिलेगा. इस डिस्काउंट को देने का उद्देेश्य है कि यात्री अन्य ऐप्स की जगह रेलवे के आधिकारिक ऐप पर शिफ्ट हो जाएं. साथ ही इस डिस्काउंट का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर लगने वाली वाली भीड़ को कम करना है.
RailOne ऐप में मिलेंगी ये सुविधाएं
- आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुक कर सकते हैं
- प्लेटफॉर्म टिकट ले सकते हैं
- ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं
- ट्रेन और PNR स्टेटस की जानकारी पा सकते हैं
- सीट पर ही खाना ऑर्डर कर सकते हैं
इस ऐप की जरूरत क्यों पड़ी
भारतीय रेल मंत्रालय के मुताबिक, रेलवन एक ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ है. आसान भाषा में बताएं तो ये एक ऐसा ऐप है, जिसकी मदद से ट्रेन यात्रा से जुड़ी हर जरूरी सेवा मिलती है. Android और iOS पर आप इस ऐप को फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं. इसका इंटरफेस बहुत आसान और सुविधाजनक है. पहले यात्रियों को रेलवे से जुड़ी अलग-अलग सुविधाओं के लिए कई अलग-अलग एप्स का इस्तेमाल करना पड़ता था.
जैसे-
- टिकट बुकिंग करने के लिए IRCTC एप
- ट्रेन की लाइव स्थिति देखने के लिए NTES एप
- शिकायत दर्ज करने के लिए ‘Rail Madad’ ऐप
- ट्रेन में खाना ऑर्डर करने के लिए ‘Food on Track’ ऐप
इतने सारे ऐप्स होने की वजह से यात्रियों को बार-बार अलग-अलग ऐप्स में लॉगिन करना पड़ता है, उनके आईडी-पासवर्ड्स को मैनेज करना पड़ता है. रेलवे ऐप इन समस्याओं से छुटकारा दिलाएगा.
केरल के सबरीमाला मंदिर में अब पकड़ाई घी की चोरी, हाईकोर्ट ने विजिलेंस को दिए जांच के निर्देश
Sabarimala Temple: केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 'आदिया सिष्टम घी' की बिक्री से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने इस पूरे मामले की विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं. शुरुआती रिपोर्ट में लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आने के बाद कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
किस बेंच ने दिया आदेश
जस्टिस वी. राजा विजयराघवन और के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने यह आदेश सबरीमाला स्पेशल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर पारित किया. रिपोर्ट में मंदिर परिसर में घी की बिक्री से प्राप्त धनराशि के गबन का स्पष्ट उल्लेख किया गया था. अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए विजिलेंस जांच को मंजूरी दी.
कितनी रकम की हुई धांधली
कोर्ट के अनुसार, दो अलग-अलग अवधियों में लगभग 35 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है. पहली अवधि 17 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2026 तक और दूसरी अवधि 27 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक की बताई गई है.
हाई कोर्ट ने विजिलेंस डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि वे योग्य अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित करें और ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (TDB) के चीफ विजिलेंस एंड सिक्योरिटी ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर अपराध दर्ज करें.
जांच की समयसीमा तय
अदालत ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करे. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम रिपोर्ट उसकी अनुमति के बिना किसी निचली अदालत में दाखिल नहीं की जा सकती. इससे साफ है कि हाई कोर्ट इस पूरे मामले पर सीधी निगरानी रखना चाहता है.
कैसे सामने आया मामला
14 दिसंबर 2025 को किए गए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि मरामथ बिल्डिंग काउंटर से बेचे गए 16,628 घी पैकेट्स की बिक्री से प्राप्त राशि TDB के खाते में जमा नहीं की गई. जांच में यह भी सामने आया कि कांट्रैक्टर ने निर्धारित मात्रा में घी पैक कर मंदिर प्रशासन को सौंपा था, लेकिन बिक्री के बाद पूरी रकम जमा नहीं हुई.
घी की बिक्री का पूरा सिस्टम
सबरीमाला में घी को 700 लीटर क्षमता वाले स्टील टैंक में रखा जाता है और मोटर की मदद से 100 मिलीलीटर के पैकेट बनाए जाते हैं. हर पैकेट 100 रुपये में श्रद्धालुओं को बेचा जाता है.
रिकॉर्ड के अनुसार, कांट्रैक्टर ने कुल 3,52,050 पैकेट्स तैयार किए, जिनमें से 89,300 पैकेट्स मरामथ बिल्डिंग काउंटर से बेचे गए. हालांकि, कर्मचारियों ने केवल 75,450 पैकेट्स की राशि जमा की. इससे 13.68 लाख रुपये की रकम गायब पाई गई.
कर्मचारी पर कार्रवाई
TDB ने अदालत को बताया कि देवास्वोम कर्मचारी सुनील कुमार पोट्टि ने बिना रसीद दिए घी की बिक्री की और 68,200 रुपये समय पर जमा नहीं किए. बाद में 17 दिन की देरी से रकम जमा की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनील कुमार पोट्टि को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है.
क्या होंगे आगे के नतीजे
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब विजिलेंस जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि इस घोटाले में और कौन-कौन जिम्मेदार है. यह मामला न सिर्फ आर्थिक अनियमितता का है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है.
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