Rahul Gandhi पर CM Yogi का तीखा हमला, हामिद अंसारी के बयान पर भी उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान, प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा पर बात की। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयानों को लेकर भी निशाना साधा। कार्यक्रम की इस वर्ष की केंद्रीय थीम ‘उत्कर्ष : नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ थी।
सनातन परंपरा और भारत की संस्कृति पर बोले योगी
योगी आदित्यनाथ ने वेदों और उपनिषदों में कही गई बातों का जिक्र करते हुए भारत की सांस्कृतिक सोच पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “भारत इसलिए भारत है, क्योंकि भारत की आत्मा सनातन धर्म में बसती है।”
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में इसलिए है, क्योंकि यहां सनातन धर्म को मानने वाली बड़ी आबादी है। उनके मुताबिक, लोग अपनी ऋषि परंपरा, पूर्वजों, इष्ट देवी-देवताओं, अवतारों, तीर्थों और विरासत पर गर्व करते हैं।
योगी ने कहा कि उपनिषद चारों दिशाओं से अच्छे विचारों के आने और उनका स्वागत करने की बात करते हैं। उनके अनुसार, इस सोच में पूजा-पद्धति का कोई भेद नहीं है और यही भारत की ऋषि परंपरा की सीख है।
इसे भी पढ़ें: Devendra Fadnavis ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, स्टैंड-अप कॉमेडियन बनने की दी सलाह
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा, “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।” उन्होंने इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि “यह मेरा है और यह तेरा है” जैसी सोच संकुचित सोच वाले लोगों की होती है, जबकि उदार सोच रखने वालों के लिए पूरी दुनिया एक परिवार है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवार की यह भावना भारत और उसकी सनातन चेतना ने दुनिया को दी है।
हामिद अंसारी के बयान पर भी निशाना
समारोह में योगी आदित्यनाथ ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति का बयान देखा है।
योगी ने कहा कि कुछ लोगों की आदत होती है कि वे अपने पद की मर्यादा बनाए नहीं रख पाते और उसके विपरीत आचरण करते हैं। हामिद अंसारी का जिक्र करते हुए उन्होंने उनके बयान को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया।
योगी ने कहा कि उनके मुताबिक ऐसे बयान भारत, भारतीयता, भारतीय संस्कृति और भारत की परंपरा के लिए “डरावने” हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दुनिया में भारत की छवि को खराब करने की कोशिशों से जुड़े उस एजेंडे का हिस्सा है, जिसे वे “एंटी इंडिया फोर्सेस” कहते हैं। योगी ने यह भी आरोप लगाया कि हामिद अंसारी की ओर से सनातन और हिंदू परंपरा को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं और उन्हें आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश हुई।
इसे भी पढ़ें: Chhatron Ki Goonj: इंदौर के मंच पर Rahul Gandhi ने ऐसा क्या किया, जिस पर BJP भड़क गई?
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम का किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस के युवराज ने भी कल अपने झूठ की गूंज में जिस प्रकार का आचरण किया, वह पूरी नारी शक्ति का अपमान है।”
इसके बाद उन्होंने भारतीय संस्कारों का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी संकरी जगह पर सामने कोई बुजुर्ग, महिला, दिव्यांग या उम्र में बड़ा व्यक्ति हो तो भारतीय परंपरा के अनुसार पहले उन्हें रास्ता दिया जाता है।
योगी ने कहा कि बैठने की व्यवस्था होने पर भी भारतीय संस्कार “पहले आप” की भावना सिखाते हैं। उनके मुताबिक, उम्र में बड़े व्यक्ति को पहले सम्मान देना भारतीय संस्कार का हिस्सा है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ और नारी सम्मान का सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने इन मर्यादाओं और संस्कारों को नहीं सीखा है और जो भारत तथा भारतीयता का अपमान करना अपना लक्ष्य मानते हैं, उनसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की भावना समझने की उम्मीद करना मुश्किल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग समाज में भ्रम और अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे काम किए जाते हैं जिनसे भारत बदनाम हो, देश को कटघरे में खड़ा किया जाए, युवाओं के सामने पहचान का संकट पैदा हो और नारी गरिमा पर सवाल उठें।
‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ का भी किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग भारतीयता पर सवाल उठा रहे हैं और मातृशक्ति का अपमान कर रहे हैं, उनसे सवाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाः में कहां पर सांप्रदायिकता है? कहां पर कट्टरता है? वसुधैव कुटुंबकम में कहां पर कट्टरता है?”
Kerala University में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक के मसौदे का कर्मचारी यूनियन ने किया विरोध
केरल विश्वविद्यालय छात्र आचार संहिता नियमावली के मसौदे में प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर विरोध बढ़ गया है। मसौदे में परिसर और संबद्ध कॉलेजों में राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रस्ताव है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नियमों को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और न ही इन्हें लागू किया गया है। वाम-समर्थक ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ के सदस्यों के अनुसार, विश्वविद्यालय सिंडिकेट ने हाल में इन मसौदा नियमों पर विचार किया।
इन नियमों में छात्र संगठनों द्वारा विरोध-प्रदर्शन, धरना, नए सदस्य बनाना, दीवारों पर पोस्टर और नारे लिखना, चंदा इकट्ठा करना, राजनीतिक हस्तियों के साथ कार्यक्रम आयोजित करना और ऑनलाइन चुनाव प्रचार करने पर रोक लगाने जैसी बातें शामिल हैं। यूनियन के सदस्यों ने कहा कि मसौदे में विश्वविद्यालय परिसर के विभागाध्यक्षों और संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों को प्रस्तावित नियमों का उल्लंघन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देने की बात कही गई है। इसमें निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि हिंसक गतिविधियों में शामिल छात्रों को एक साल के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। प्रस्तावित दंड में छात्रों पर 5,000 रुपये, राजनीतिक संगठनों पर 10,000 रुपये और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है। बकाया जुर्माने को देय राशि माना जाएगा और इसके कारण राजस्व वसूली तथा संभावित रूप से संपत्ति कुर्क की जा सकती है।
साथ ही, परीक्षा के नतीजे रोके जा सकते हैं और ‘भारतीय न्याय संहिता’ व ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ के तहत आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। ‘केरल विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन’ ने इन प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये नियम परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश हैं और अलोकतांत्रिक हैं।
यूनियन ने कहा है कि अगर ये नियम लागू किए गए तो वे प्रदर्शन करेंगे। उनका आरोप है कि ऐसी पाबंदियों से संगठनात्मक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी कम हो जाएगी। केरल विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार रेशमी आर ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अभी सिर्फ एक मसौदा तैयार किया गया है और इसे अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









