केरल के सबरीमाला मंदिर में अब पकड़ाई घी की चोरी, हाईकोर्ट ने विजिलेंस को दिए जांच के निर्देश
Sabarimala Temple: केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 'आदिया सिष्टम घी' की बिक्री से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए बड़ा आदेश दिया है. अदालत ने इस पूरे मामले की विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं. शुरुआती रिपोर्ट में लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आने के बाद कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
किस बेंच ने दिया आदेश
जस्टिस वी. राजा विजयराघवन और के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने यह आदेश सबरीमाला स्पेशल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर पारित किया. रिपोर्ट में मंदिर परिसर में घी की बिक्री से प्राप्त धनराशि के गबन का स्पष्ट उल्लेख किया गया था. अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए विजिलेंस जांच को मंजूरी दी.
कितनी रकम की हुई धांधली
कोर्ट के अनुसार, दो अलग-अलग अवधियों में लगभग 35 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है. पहली अवधि 17 नवंबर 2025 से 26 दिसंबर 2026 तक और दूसरी अवधि 27 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक की बताई गई है.
हाई कोर्ट ने विजिलेंस डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि वे योग्य अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित करें और ट्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड (TDB) के चीफ विजिलेंस एंड सिक्योरिटी ऑफिसर की रिपोर्ट के आधार पर अपराध दर्ज करें.
जांच की समयसीमा तय
अदालत ने जांच एजेंसी को निर्देश दिया है कि वह एक महीने के भीतर प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करे. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम रिपोर्ट उसकी अनुमति के बिना किसी निचली अदालत में दाखिल नहीं की जा सकती. इससे साफ है कि हाई कोर्ट इस पूरे मामले पर सीधी निगरानी रखना चाहता है.
कैसे सामने आया मामला
14 दिसंबर 2025 को किए गए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ कि मरामथ बिल्डिंग काउंटर से बेचे गए 16,628 घी पैकेट्स की बिक्री से प्राप्त राशि TDB के खाते में जमा नहीं की गई. जांच में यह भी सामने आया कि कांट्रैक्टर ने निर्धारित मात्रा में घी पैक कर मंदिर प्रशासन को सौंपा था, लेकिन बिक्री के बाद पूरी रकम जमा नहीं हुई.
घी की बिक्री का पूरा सिस्टम
सबरीमाला में घी को 700 लीटर क्षमता वाले स्टील टैंक में रखा जाता है और मोटर की मदद से 100 मिलीलीटर के पैकेट बनाए जाते हैं. हर पैकेट 100 रुपये में श्रद्धालुओं को बेचा जाता है.
रिकॉर्ड के अनुसार, कांट्रैक्टर ने कुल 3,52,050 पैकेट्स तैयार किए, जिनमें से 89,300 पैकेट्स मरामथ बिल्डिंग काउंटर से बेचे गए. हालांकि, कर्मचारियों ने केवल 75,450 पैकेट्स की राशि जमा की. इससे 13.68 लाख रुपये की रकम गायब पाई गई.
कर्मचारी पर कार्रवाई
TDB ने अदालत को बताया कि देवास्वोम कर्मचारी सुनील कुमार पोट्टि ने बिना रसीद दिए घी की बिक्री की और 68,200 रुपये समय पर जमा नहीं किए. बाद में 17 दिन की देरी से रकम जमा की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनील कुमार पोट्टि को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित है.
क्या होंगे आगे के नतीजे
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब विजिलेंस जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि इस घोटाले में और कौन-कौन जिम्मेदार है. यह मामला न सिर्फ आर्थिक अनियमितता का है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है.
Income Tax Act 2025: 1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट 2025; 64 साल पुराना कानून खत्म
Income Tax Act 2025: 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश किया जाना है और उससे पहले इनकम टैक्स को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. सरकार अब इनकम टैक्स कानून में ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है. इसका नाम इनकम टैक्स एक्ट 2025 रखा गया है, जो 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा. यह नया कानून करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा.
क्यों लाया जा रहा नया इनकम टैक्स एक्ट?
अब तक इनकम टैक्स को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यही रही है कि कानून बहुत जटिल है. कौन सा सेक्शन कब लगेगा, कितना टैक्स देना होगा और रिटर्न कैसे भरना है- यह सब आम आदमी के लिए समझना मुश्किल हो गया था. खासतौर पर नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी और सीनियर सिटीजन सबसे ज्यादा परेशान रहते थे. सरकार मानती है कि इसी वजह से टैक्स विवाद, नोटिस और कोर्ट केस बढ़ते चले गए.
टैक्स स्लैब और दरों में बदलाव नहीं
सरकार ने साफ किया है कि नए कानून में टैक्स स्लैब और टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपकी जेब पर कोई नया बोझ नहीं पड़ेगा. यह कानून पूरी तरह रेवेन्यू न्यूट्रल है, यानी सरकार की कमाई पर भी इसका असर नहीं होगा. बदलाव सिर्फ सिस्टम और भाषा में किया गया है, ताकि टैक्स भरना आसान हो सके.
नए इनकम टैक्स में क्या बदला गया?
सरकार के अनुसार नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 करीब 50 फीसदी छोटा है. इसमें कठिन कानूनी भाषा को हटाकर सरल और आम बोलचाल की भाषा का इस्तेमाल किया गया है. कई गैर-जरूरी और पुराने सेक्शन को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जिनका अब कोई मतलब नहीं रह गया था. एक बड़ा बदलाव यह भी किया गया है कि अब प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे उलझाऊ शब्दों को हटा दिया गया है. उनकी जगह सिर्फ एक शब्द होगा- टैक्स ईयर. इससे टैक्स की गणना और आईटीआर फाइल करना आसान हो जाएगा.
इसके अलावा, अब अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे टीडीएस रिफंड पाने का अधिकार होगा. पहले लेट रिटर्न फाइल करने वालों को रिफंड मिलने में दिक्कत होती थी. सरकार का मकसद साफ है- टैक्स सिस्टम को सरल बनाना, विवाद कम करना और ईमानदार टैक्सपेयर्स का भरोसा बढ़ाना. टैक्स वही रहेगा, लेकिन अब टैक्स का डर कम होगा और नियम समझना ज्यादा आसान हो जाएगा.
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