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DUSU Election Result: सातवें दौर में ABVP के यश डबास 609 वोटों से आगे

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव की जारी मतगणना के सातवें दौर के बाद अध्यक्ष पद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के उम्मीदवार यश डबास भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के विजय शंकर मीणा से 609 मत से आगे हैं। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन 11,347 मतों के साथ आगे हैं। अध्यक्ष पद के लिए डबास को अब तक 8,825 मत मिले हैं जबकि मीणा को 8,216 मत मिले हैं।

सचिव पद की दौड़ में अभाविप उम्मीदवार को 7,584 मत मिले हैं जबकि एनएसयूआई उम्मीदवार को 5,445 मत प्राप्त हुए हैं। संयुक्त सचिव पद के लिए अभाविप को 5,386 और एनएसयूआई को 5,339 मत मिले हैं तथा समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार विशेष यादव 6,165 मतों के साथ आगे हैं। इस चुनाव के नतीजों से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए डूसू के केंद्रीय पैनल की तस्वीर साफ होगी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अभाविप, कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई और अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) का वाम गठबंधन देश के सबसे चर्चित छात्र संघ चुनावों में से एक में अपना वर्चस्व कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले साल अभाविप ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल की थी जबकि एनएसयूआई ने उपाध्यक्ष पद जीता था।

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आतंकी संगठनों में नहीं भर्ती हो रहे स्थानीय युवा, पत्थरबाजी और अलगाववाद बंद, घुसपैठ के सभी प्रयास विफल, Modi राज की सफलता को दर्शा रहे हैं J&K संबंधी ताजा आंकड़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बड़ा बदलाव आ चुका है। आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई और सरकार की विभिन्न योजनाओं के असर से स्थानीय युवाओं के आतंकवादी संगठनों में शामिल होने की घटनाओं में पिछले चार वर्षों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में जहां 146 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या घटकर 121, 2023 में 19, 2024 में चार और 2025 में महज एक रह गई। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्थानीय युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाना शुरू किया है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर आतंकवादी भर्ती में आई यह गिरावट जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की ओर से किए जाने वाले उस दावे पर भी सवाल खड़े करती है, जिसमें इसे स्थानीय या घरेलू असंतोष का परिणाम बताया जाता रहा है। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके साथ ही आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और आतंकवादी संगठनों में स्थानीय भर्ती, दोनों में पर्याप्त कमी आई है।

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रिपोर्ट में नियंत्रण रेखा पर बदली परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2025 में घुसपैठ की केवल छह कोशिशें हुईं, जिन्हें सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया और इन अभियानों में 12 आतंकवादी मारे गए। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 में आठ घुसपैठ की कोशिशें नाकाम की गई थीं और 12 आतंकवादी मारे गए थे। 2022 में 12 कोशिशों को विफल करते हुए 18 आतंकवादी मारे गए। 2023 में घुसपैठ की 18 कोशिशें नाकाम हुईं और 36 आतंकवादी मारे गए, जबकि 2024 में 10 कोशिशों को विफल कर 19 आतंकवादियों को मार गिराया गया। इस लिहाज से 2025 में घुसपैठ की कोशिशों का आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में सबसे कम रहा।

हालांकि, रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर भी संकेत किया है। नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों में कमी के बावजूद आतंकवादियों की गतिविधियां अब जम्मू क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर अधिक केंद्रित होती दिखाई दे रही हैं। इन कोशिशों में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े प्रयास भी शामिल रहे हैं। यानी आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के बीच संभावित संबंध सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

यही नहीं, जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में भी सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की गति बनाए रखी। वर्ष 2025 में विभिन्न अभियानों के दौरान 19 आतंकवादी मारे गए, जिनमें आठ पाकिस्तानी आतंकवादी थे। यह कुल मारे गए आतंकवादियों का लगभग 40 प्रतिशत है। रक्षा मंत्रालय ने इन आंकड़ों के आधार पर जम्मू-कश्मीर में जारी छद्म युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका की ओर संकेत किया है।

दूसरी ओर, नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशें कम होने के बावजूद संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाओं में वर्ष 2025 के दौरान अचानक वृद्धि हुई। वर्ष 2024 में केवल दो संघर्षविराम उल्लंघन दर्ज किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 163 हो गई। इनमें से 124 घटनाएं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुईं। इससे पहले 2019 में 3233, 2020 में 4645, 2021 में 594, 2022 में एक, 2023 में शून्य और 2024 में दो संघर्षविराम उल्लंघन दर्ज किए गए थे।

रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के बदलते सामाजिक माहौल का भी उल्लेख है। वर्ष 2025 में पत्थरबाजी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई। इसके साथ ही आतंकवादी हमले के बावजूद पर्यटन गतिविधियों ने मजबूती दिखाई। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय घोड़ा संचालक की मौत के बावजूद वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर में करीब 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

बहरहाल, रक्षा मंत्रालय के आंकड़े जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकवादी भर्ती, घुसपैठ और पत्थरबाजी में कमी के साथ पर्यटन गतिविधियों में निरंतरता की तस्वीर पेश करते हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी के प्रयास तथा संघर्षविराम उल्लंघनों में हुई वृद्धि यह भी बताती है कि सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

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