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एशियाड में 100 मेडल भी नहीं जीतेगा भारत:नेशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन, भारतीय ओलिंपिक संघ और टॉप्स की रिपोर्ट में दावा, 97 मेडल जीतेंगे

भारतीय खिलाड़ी जापान में चल रहे एशियन गेम्स में 100 मेडल के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाएगा। इस बार करीब 97 मेडल मेडल जीतने की उम्मीद है। यह दावा नेशनल स्पोर्ट्स एसोसिएशन (NSA), इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) और साई की टारगेट ओलिंपिक पोडियम (टॉप्स) स्कीम की अंतरिक रिपोर्ट में किया गया है। खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि रिपोर्ट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर मेडल की संभावनाओं का अनुमान लगाया गया है। सिल्वर की संख्या बढ़ेगी, गोल्ड-ब्रॉन्ज कम होंगे रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस बार भारत के सिल्वर मेडल की संख्या बढ़ेगी। जबकि गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल कम होंगे। अनुमान के अनुसान भारत 20वें एशियाड में 25 गोल्ड मेडल जीतेगा। उसे 42 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मिलेंगे। भारत ने हांगझोऊ एशियन गेम्स में 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 41 ब्रॉन्ज समेत 107 मेडल जीते थे। हालांकि, एक मेडल डोपिंग नियमों के कारण वापस ले लिया गया था। मेडल कम होने के 3 कारण नए प्लेयर्स पर सीनियर्स से ज्यादा भरोसा रिपोर्ट में अनुभवी प्लेयर्स से ज्यादा युवाओं से ज्यादा उम्मीद लगाई गई है। शूटिंग में मनु भाकर से ज्यादा उम्मीद ईशा सिंह से हैं। स्क्वॉश जोशना चिनप्पा के ज्यादा अनाहत सिंह पर भरोसा है। बैडमिंटन में सिंधु से ज्यादा भरोसा आयुष शेट्‌टी और लक्ष्य सेन से है। शूटिंग में पलक-मुकेश की जोड़ी से मेडल होप। जूडो में अस्मिता डे से भी मेडल की उम्मीद है। एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह से पदक की उम्मीद है।

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Kidney Disease: Diabetes और High BP से बढ़ता है Kidney की बीमारी का खतरा, इन बदलावों पर दें ध्यान

अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी की वजह से कई बीमारियों का खतरा काफी बढ़ गया है। कम उम्र के लोग ही बीपी-शुगर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। जिसका असर शरीर के अन्य जरूरी अंगों पर भी पड़ता है। यही वजह है कि तेजी से युवा आबादी भी किडनी की समस्याओं का शिकार हो रही है। हमारे शरीर में किडनी बिना थके लगातार काम करती है, खून से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल को फिल्टर करने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करना जरूरी होता है।

वहीं किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने से शरीर में अपशिष्ट और तरल जमा हो सकता है। जिस कारण सांस फूलने, सूजन, मितली-उल्टी, कमजोरी और भूख कम लगने जैसे दूसरे सेहत संबंधी जोखिम हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो अक्सर किडनी की बीमारियां साइलेंटली बढ़ती हैं। वहीं बहुत सारे लोगों को किडनी की बीमारी का पता तब चलता है, जब समस्या काफी ज्यादा बढ़ चुकी होती है।

इसे भी पढ़ें: Kidney खराब होने के ये शुरुआती लक्षण, सूजन और पेशाब में बदलाव न करें नजरअंदाज

अक्सर किडनी संबंधी समस्या को ज्यादा काम, उम्र बढ़ने, नींद की कमी या सामान्य कमजोरी समझा जाता है। यह लापरवाही सेहत के लिए भारी पड़ सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो किडनी हेल्दी रहे और इससे संबंधित आपको कोई समस्या न हो, इसके लिए लाइफस्टाइल और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। डायबिटीज और हाई बीपी जैसी स्थितियों में किडनी की बीमारी का जोखिम ज्यादा रहता है। ऐसे लोगों को एक्स्ट्रा सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं शरीर में दिखने वाले कुछ असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लगातार थकान और कमजोरी लगना

किडनी की कार्यक्षमता में कमी होने पर शरीर में अपशिष्ट जमा होने लगते हैं। वहीं कई लोगों को किडनी की बीमारी से एनीमिया की समस्या भी हो सकती है। लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन में कमी होने की वजह से कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यही कारण है कि लंबे समय से बनी कमजोरी को सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या समझना ठीक नहीं है।

वैसे तो थकान होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन लगातार कमजोरी के साथ-साथ डायबिटीज या हाई बीपी होने पर किडनी की जांच जरूर करानी चाहिए।

पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन आना

किडनी हमारे शरीर से एक्स्ट्रा तरल पदार्थ निकालने में मदद करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तो शरीर में तरल जमा हो सकता है। जिस कारण से पैरों में सूजन और कुछ मामलों में सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।

अगर चेहरे या फिर पैरों-टखनों पर बार-बार सूजन दिख रही है, तो इसको सिर्फ ज्यादा देर तक खड़े रहने या फिर शारीरिक मेहनत का नतीजा नहीं मानना चाहिए।

कई बार यह सूजन लिवर, दिल या दूसरी स्थितियों में भी हो सकती है, इसलिए इसको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पेशाब में बदलाव होना

किडनी की बीमारी होने पर पेशाब में बदलाव होना महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं। लेकिन हर बदलाव किडनी की बीमारी हो ऐसा भी जरूरी नहीं होता है। रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, बार-बार पेशाब आना या फिर पेशाब में असामान्य बदलाव कई कारणों से हो सकते हैं।

शुरूआत में किडनी की बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकती है। इसलिए पेशाब सामान्य दिखने से किडनी को स्वस्थ मानना सही नहीं है। अलग लगातार पेशाब में बदलाव दिख रहा है, इसके साथ ही हाई बीपी और डायबिटीज की समस्या है, तो डॉक्टर से जांच जरूर कराना चाहिए।

इन समस्याओं पर रखें नजर

जब किडनी की कार्यक्षमता कम होती है, तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं। जिस कारण मितली और भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

किडनी की कार्यक्षमता के कम होने पर बॉडी में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो सकता है। जिसकी वजह से सांस फूलने और पैरों में सूजन जैसी समस्या आ सकती है।

किडनी बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ शरीर के संकेतों के भरोसे रहना ठीक नहीं है।

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  Sports

india vs sri lanka final preview: गोल्ड के लिए भिड़ेंगी भारत-श्रीलंका, मिडिल ऑर्डर पर रहेगी नजर; स्मृति-शैफाली से कैसे पार पाएगी लंका 

india vs sri lanka final preview: एशियन गेम्स 2026 में महिला क्रिकेट का गोल्ड मेडल मुकाबला भारत और श्रीलंका के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमों ने फाइनल में शानदार अंदाज में जगह बनाई है। भारत ने क्वार्टर फाइनल में जापान और सेमीफाइनल में बांग्लादेश को हराया। वहीं, श्रीलंका ने मलेशिया और पाकिस्तान को शिकस्त देकर फाइनल का टिकट कटाया।

यह मुकाबला 2023 एशियन गेम्स के फाइनल की यादें भी ताजा करेगा। उस मुकाबले में भारत ने गोल्ड मेडल जीता था। दोनों टीमें हाल ही में महिला एशिया कप के फाइनल में भी भिड़ी थीं, जहां भारत ने श्रीलंका को 72 रन से हराया था।

क्या भारतीय मिडिल ऑर्डर को निशाना बना पाएगा श्रीलंका?
श्रीलंकाई टीम अगर भारतीय बल्लेबाजी में कोई कमजोरी तलाशना चाहेगी, तो उसकी नजर मिडिल ऑर्डर पर हो सकती है। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सेमीफाइनल में 40 रन बनाए, लेकिन हाल के मुकाबलों में उनकी बल्लेबाजी में अपेक्षित तेजी नहीं दिखी है। जी कमालिनी और भारती फुलमाली भी मिले मौकों को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाई हैं।

हालांकि, इस क्रम तक पहुंचना श्रीलंका के लिए आसान नहीं होगा। स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा शानदार फॉर्म में हैं। दोनों के बल्ले से हाल में शतक भी निकले हैं। वहीं, विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष निचले क्रम में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखती हैं।

अथापत्थु बनाम शेफाली, किसका चलेगा बल्ला?
श्रीलंका की सबसे बड़ी मैच विनर चमारी अथापत्थु हैं। एशियन गेम्स में वह अब तक 63 और नाबाद 83 रन बना चुकी हैं। गेंदबाजी में भी उन्होंने 2/3 और 1/30 के आंकड़े दर्ज किए हैं। श्रीलंका के दूसरे बल्लेबाजों ने भी उनका साथ दिया है। हसीनी परेरा ने पाकिस्तान के खिलाफ 26 गेंदों में 42 रन बनाए, जबकि कविशा दिलहारी ने मलेशिया के खिलाफ 27 गेंदों में नाबाद 44 रन की पारी खेली। हर्षिता समरविक्रमा ने भी दोनों मुकाबलों में तेज पारियां खेली हैं।

भारत की ओर से शेफाली वर्मा पर नजर रहेगी। उन्होंने एशियन गेम्स से पहले 64 और 68 रन बनाए थे। इसके बाद जापान के खिलाफ नाबाद 40 और बांग्लादेश के खिलाफ नाबाद 100 रन की पारी खेली।

स्पिन गेंदबाजी बनेगी निर्णायक
फाइनल में भारतीय स्पिनरों के खिलाफ श्रीलंका की बल्लेबाजी अहम होगी। दीप्ति शर्मा और एन. श्री चरणी विकेट लेने में सफल रही हैं। वहीं, नंदनी शर्मा की नई गेंद से मिलने वाली चुनौती भी श्रीलंका के सामने होगी।

दोनों टीमों के बीच अब तक 32 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले गए हैं। भारत ने 26 मैच जीते हैं, जबकि श्रीलंका को पांच जीत मिली हैं। एक मुकाबला बेनतीजा रहा। भारत के खिलाफ श्रीलंका पिछली 7 टी20 इंटरनेशनल भिड़ंत हार चुका है।

अगर बारिश के कारण फाइनल रद्द होता है, तो ऊंची सीडिंग वाली भारतीय टीम को गोल्ड मेडल मिलेगा।

Mon, 21 Sep 2026 15:39:43 +0530

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