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बड़ी कंपनी के सामने केंद्र सरकार कैसे हो जाती है लाचार

देश में कोई ताकतवर कंपनी कैसे कानून का दावपेच इस्तेमाल करके सरकार को उसी के बनाए कानून के जाल में उलझा कर अपना उल्लू सीधा कर सकती है, इंडिगो एयरलाइंस विवाद इसका बड़ा उदाहरण है। इस एयरलांइस ने चार दिन तक हजारों यात्रियों को बंधक जैसी हालत में रखा। इसका फायदा दूसरी विमानन कंपनियों ने उठा कर जम कर चांदी कूटी। इस पूरी हालत के दौरान केंद्र सरकार तमाशबीन रही है। सरकार हवाई यात्रियों को हैरान—परेशान और लुटते हुए देखती रही। जब पानी सिर से गुजरने लगा तक सरकार को होश आया। आखिरकार सरकार को नियमों में छूट देकर एयरलाइंस कंपनी के समक्ष बैकफुट पर आने के लिए विवश होना पड़ा। सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के मदृदेनजर पायलटों के लिए बनाए गए कायदे—कानून कायदों में ढील देने का निर्णय लेना पड़ा।

केंद्र सरकार ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) के नए नियम लागू किए थे। इन नियमों को जनवरी 2024 में लाया गया था। हालांकि, इन्हें अब जाकर पूरी तरह से लागू किया गया। इनमें पायलटों और क्रू मेंबर का ड्यूटी टाइम कर दिया गया है और आराम करने का समय बढ़ा दिया है। ऐसा पायलटों की थकान कम करने और सेफ्टी बढ़ाने के लिए किया गया है। एफडीटीएल के नए नियम तय करते हैं कि पायलट कितनी देर ड्यटी पर रह सकते हैं? कितने घंटे विमान उड़ा सकते हैं? रात में कितनी बार लैंडिंग कर सकते हैं? उन्हें कितना आराम मिलना चाहिए? कितनी बार नाइट ड्यूटी कर सकते हैं? नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इन नियमों को पिछली साल जनवरी में पेश किया था। इन्हें पिछले साल ही 31 मई से लागू किया जाना था। मगर एयरलाइन कंपनियों ने इसके लिए समय मांगा, जिसके बाद इन्हें टाल दिया गया। इसके बाद इन नियमों को इस साल दो फेज में लागू किया गया। इन नियमों का पहला फेज इस साल जुलाई में लागू किया गया। दूसरा फेज 1 नवंबर से लागू कर दिया गया।

सवाल यह है कि जब नए नियम सभी एयरलाइन कंपनियों पर लागू होते हैं पर इसका सबसे ज्यादा असर इंडिगो पर ही क्यों दिखा? इसका जवाब है कि इंडिगो के पास पायलटों की कमी हो गई है। इंडिगो ने जानबूझ कर यह कमी की। अन्य एयरलाइंस कंपनियों की तरह इंडिगो के पास भी नए पायलटों की भर्ती के लिए पर्याप्त समय था, किन्तु कंपनी ने भारी आर्थिक भार को टालने के लिए भर्ती नहीं की। कंपनी ने बड़ी चालाकी से सरकार को उसी के बनाए नियमों में फांस कर इनमें ढील देने के लिए विवश कर दिया। इसके लिए कंपनी ने यात्रियों को मोहरा बनाया। यह जानते हुए भी कि कंपनी के पास पायलटों की कमी है, लगातार बुकिंग जारी रखी। फिर अचानक हाथ खड़े कर दिए। हजारों यात्रियों के फंसे होने से जब देश में हाहाकार मचा तो केंद्र सरकार को नए नियमों में ढील देने के लिए झुकना पड़ा। 

डीसीजीए ने कहा कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए नियमों में ढील दी जा रही है। डीजीसीए ने उन नियमों में ढील दी है, जो अहमदाबाद फ्लाइट क्रैश के बाद लागू किए गए थे। साथ ही अभी क्राइसिस के समय पायलटों से मदद की अपील की डीजीसीए ने अब इंडिगो से एक डिटेल्ड रोडमैप जमा करने को कहा, जिसमें उससे क्रू की भर्ती, क्रू की ट्रेनिंग का प्लान, रोस्टर रिस्ट्रक्चरिंग और सेफ्टी रिस्क असेसमेंट का प्लान मांगा गया है। इसके साथ ही डीजीसीए ने इंडिगो को हर 15 दिन में एक प्रोग्रेस रिपोर्ट भी देने को कहा है। सरकार की ओर से केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने सफाई दी कि यह फैसला केवल यात्रियों के हित में लिया गया है, खासकर वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों, मरीजों और जरूरी यात्रा करने वालों को राहत देने के लिए। 

मंत्रालय ने एयरलाइनों के साथ कम से कम छह महीने तक निरंतर संवाद भी किया। पहले इस नियम के बारे में कोई समस्या नहीं थी। एअर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी अन्य एयरलाइन ने अपने संचालन को ढाल लिया। लेकिन जो हुआ वह इंडिगो की चालक दल (क्रू) के प्रबंधन की गड़बड़ी के कारण हुआ। नायडू ने कहा कि हमने सामान्य स्थिति सुनिश्चित करने के लिए इंडिगो को एफडीटीएल नियमों में कुछ छूट दी है। इंडिगो संकट के बीच सरकार द्वारा पायलटों के नए उड़ान ड्यूटी समय सीमा नियम (एफडीटीएल) को तत्काल प्रभाव से फिलहाल स्थगित करने के फैसले की पायलट संघ ने कड़ी आलोचना की है। एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने डीजीसीए को एक पत्र लिखते हुए कहा कि यह फैसला सुरक्षा से सीधा समझौता है। पायलटों की थकान से यात्रियों की जान ख़तरे में पड़ सकती है।

एसोसिएशन के अनुसार, इंडिगो ने जानबूझकर यह संकट खड़ा किया, जिससे उसे नियमों में ढील मिल सके। इसलिए इंडिगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और एफडीटीएल के दूसरे चरण के नियमों को पूरी तरह लागू किए जाएं बिना किसी भी एयरलाइन को इसमें छूट दिए। एसोसिएशन ने इंडिगो प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि रात्रिकालीन ड्यूटी से संबंधित मानदंडों में ढील से इंडिगो को अपने परिचालन को स्थिर करने में मदद मिलेगी, लेकिन यह छूट एक ख़तरनाक मिसाल कायम करेगी। डीजीसीए ने 25 नवंबर की बैठक में इस बात पर सहमति जताई थी कि किसी भी ऑपरेटर को, खासकर व्यावसायिक हितों से प्रेरित, कोई छूट या बदलाव नहीं दिया जाएगा। सभी ऑपरेटरों के पास नए एफडीटीएल को लागू करने के लिए लगभग दो साल का समय था, और वह भी दो चरणों में। इस पर्याप्त समय के बावजूद इंडिगो अपना रोस्टर तैयार करने में विफल रही और इसके बजाय एयरलाइन ने 2025 की सर्दियों के लिए अपने परिचालन को बढ़ा दिया।

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एसोसिएशन ने कहा कि ये घटनाएं गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं कि सार्वजनिक असुविधा के बहाने व्यावसायिक लाभ के लिए सरकार पर दबाव डालने के लिए एक कृत्रिम संकट पैदा किया गया था। इंडिगो को चुनिंदा छूट देकर, डीजीसीए ने अन्य सभी ऑपरेटरों के लिए अपने परिचालन, वाणिज्यिक या समय-सारिणी संबंधी कारणों का हवाला देकर एफडीटीएल नागरिक उड्डयन आवश्यकता से समान छूट की मांग करने का रास्ता खोल दिया है। यह नागरिक उड्डयन आवश्यकता के मूल सिद्धांत और उद्देश्य को ही कमजोर करता है। एसोसिएशन ने मांग की है कि डीजीसीए इंडिगो को दी गई सभी छूट तुरंत वापस ले और एयरलाइन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू करे। 

संघ के अनुसार, इंडिगो ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने अपनी परिचालन क्षमता का गलत आकलन किया था; फिर भी, जनता को भारी असुविधा पहुंचाने के लिए उन्हें फटकार लगाने या दंडित करने के बजाय, डीजीसीए ने उन्हें और छूट दे दी। इस कार्रवाई ने न केवल परिचालन कुप्रबंधन को बढ़ावा दिया है, बल्कि यात्रियों की जान को भी सीधे खतरे में डाल दिया है। 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी किरकिरी के बाद केंद्र सरकार इंडिगो के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाए पूरे मामले की लीपापोती करने में लगी हुई है। होना तो यह चाहिए था कि इंडिगो प्रबंधन के खिलाफ देश में जानबूझ कर अराजकता फैलाने का मामला दर्ज करके गिरफ्तारी की जाती, ताकि दूसरी कंपनियों को मुनाफे के लिए ऐसी हरकत करने की चेतावनी मिल सके। इसके विपरीत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 10% उड़ानों में कटौती का आदेश देकर इंडिगो को बख्श दिया। नायडू ने कहा कि पिछले हफ्ते इंडिगो के क्रू रोस्टर, फ़्लाइट शेड्यूल और कम्युनिकेशन की कमी के कारण कई यात्रियों को बहुत परेशानी हुई। जांच और जरूरी कार्रवाई चल रही है। महज 10 प्रतिशत उड़ान में कटौती जैसा प्रतीकात्मक दंड देने की औपचारिकता से ऐसी कंपनियों के कामकाज और आर्थिक मुनाफे के लालच की प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लग सकेगा। केंद्र सरकार का चाहिए कि इंडिगो के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करे, जोकि देश में नजीर बन सके, ताकि फिर कोई कंपनी आम लोगों से खिलवाड़ नहीं कर सके। अन्यथा यही माना जाएगा देश कानून से नहीं कंपनियों की मनमानी से चलता है।

- योगेन्द्र योगी

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