Radha Ashtami 2026: अलौकिक सौंदर्य, दिव्य रूप और लंबे केश... राधा अष्टमी पर जानिए कैसा था राधा-रानी का स्वरूप
Radha Ashtami 2026: हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है. राधाष्टमी या राधा अष्टमी को हमारी श्रीराधा रानी का प्राकट्य हुआ था. उनका जन्म भगवान कृष्ण से एक वर्ष पहले ही हो गया था. लेकन कहा जाता है कि राधा राना की जन्म होने के बाद उन्होंने अपनी आंखें नहीं खोली थी. जब कृष्ण जी का जन्म हुआ और उनकी बाल्यकाल में प्रथम भेंट हुई तो उन्होंने आंखें खोली थी. वृषभान की दुलारी, प्यारी राधा रानी. जी हां, राधा जी का जन्म बरसाने में वृषभान जी के घर में हुआ था और उनकी माता का नाम कीर्ती देवी है. इस साल राधाष्टमी का त्योहार 19 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा.
राधाष्टमी के दिन उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है. उन्हें श्रृंगार अर्पित किया जाता है और साथ ही भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं. राधा रानी अलौकिक सौंदर्यवान और रुपवान होती हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर राधा रानी के दिव्य स्वरूप के बारे में.
राधा रानी के सौंदर्य का वर्णन
श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित राधा-कृष्ण गोनद्देश-दीपिका में राधा जी की दिव्य सुंदरता का वर्णन किया गया है कि वे हमेशा नीले रंग के चमकीले वस्त्र पहना करती थीं. उनका तेजस्वी शरीर सोने की तरह चमकता दिखता है. उनका मुख लाखों पूर्णिमाओं के चंद्रमा की तरह कोमल और निर्मल दिखता है. आंखें कमल जैसी और हिरणी से गहरी होती है. इन आंखों में वे काजल धारण करती हैं. ये काजल उनके कानों तक फैलता है. उनकी सुंदरता की तुलना तीनों लोकों में किसी से भी नहीं की जा सकती है.
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लंबे घने केशों में सुगंधित फूल
राधा रानी के घने और लंबे काले केश हैं, जो कमर तक पहुंचते हैं. उन्हें वे हमेशा सुंदर तरीके से गुंथ कर रखती हैं. बालों में वन के सुगंधित पुष्प सजे रहते हैं. घुंघराले बालों की लटे मुख को और मनमोहक बना देते हैं. राधा रानी के लंबे धनुषाकार भौंहें अपने प्रियतम की ओर प्रेम की घातक बाण दागती हैं. उनकी नाक का आकार उत्तम हैं, जो तिल के फूल की तरह सुंदर दिखता है और चंद्रमा के समान चमकते मोती की तरह दिखाई देती है.
किसी को भी मोहित कर सकती थी देवी राधा...
देवी राधा के होंठ खिले हुए लाल कमल जैसे दिखते हैं, जो बिल्कुल अमृतमय लगते हैं. उनके दांत मोतियों की भांति चमकते थे. ऐसा लगता था कि दांतों के स्थान पर पंक्तियों में सफेद मोती की माला पिरोई हुई है. उनकी कोमल ठुड्डी की खासियत प्रेम के देवता को भी मोहित करने का गुण रखती थी. राधा जी के हाथों और पैरों की शोभा भी कमल जैसी थी. उनकी सुगंधित शारीरिक खुशबू से भगवान कृष्ण मोहित हो उठते हैं. श्री राधारानी की गायकि कमाल की थी और वे वीणा भी बजाती हैं.
दया की मूर्ति श्री राधारानी
राधा रानी दया और करुणा की मूरत मानी जाती हैं. उनकी बुद्धि और बुद्धिमता सभी से अधिक हैं. वह प्रेम से जुड़े सभी कार्य कर सकती हैं. उनका चरित्र किसी चमचमाते रत्न की भांती है. राधा रानी कभी भी सांसारिक दुख या कष्टों से विचलित नहीं होती हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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