आरबीआई की मंजूरी असम की मजबूत वित्तीय सेहत को साबित करती है : सीएम सरमा
गुवाहाटी, 12 जनवरी (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को खराब वित्तीय मैनेजमेंट के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि असम देश का सबसे अच्छा वित्तीय रूप से मैनेज किया जाने वाला और सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है, और यह दावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी पक्का किया है।
राज्य के कर्ज और वित्तीय सेहत से जुड़ी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का वित्तीय अनुशासन सभी तय सीमाओं के अंदर है और स्थापित नियमों का सख्ती से पालन करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक पारदर्शी और नियम-आधारित कर्ज लेने की नीति अपनाई है, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता या वित्तीय कुप्रबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है।
सरमा ने कहा कि विपक्ष के बार-बार लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और उनमें तथ्यों की कमी थी, खासकर तब जब आरबीआई ने खुद असम के वित्तीय प्रदर्शन को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी।
उन्होंने पूछा, अगर हमने कुछ गलत किया होता, तो क्या भारतीय रिजर्व बैंक हमें सर्टिफिकेट देता? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के वित्त की स्वतंत्र रूप से देश की सर्वोच्च बैंकिंग संस्था द्वारा जांच की गई है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी को इसके बजाय अपने शासन के रिकॉर्ड पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि उसने 92,000 करोड़ रुपए का कर्ज जमा कर लिया है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक कर्ज में एक नया बेंचमार्क और चिंता का कारण बताया।
मुख्यमंत्री ने आधिकारिक डेटा के विपरीत होने के बावजूद असम की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाने के लिए मीडिया के एक वर्ग पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि आरबीआई ने वित्तीय विकास और प्रगति के मामले में असम को शीर्ष पर रखा है, जबकि कुछ क्षेत्रीय रिपोर्टों ने राज्य को पिछड़ा हुआ दिखाया है।
सरमा ने कहा कि यह जनता को तय करना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को ज्यादा विश्वसनीयता दी जानी चाहिए या चुनिंदा मीडिया की कहानियों को, यह दोहराते हुए कि असम का वित्तीय शासन मजबूत संस्थागत सत्यापन और डेटा-आधारित आकलन पर आधारित है।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान में अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ, हमारे पास सबूत हैं: अब्बास अराघची
नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ हुई एक मीटिंग में आरोप लगाया कि ईरान के मौजूदा हालात के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।
ईरान में हिंसा शुरू होने के बाद अमेरिका ने कहा है कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया, तो अमेरिकी सेना ईरान पर स्ट्राइक करेगी। सोमवार को अराघची ने मीटिंग में कहा कि ईरान के पास ऐसे कई सबूत हैं जो दिखाते हैं कि देश में हाल की अशांति में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।
बता दें, ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आया है, जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों और आम लोगों में से कई लोगों की मौत हो गई है। प्रदर्शन के दौरान देशभर में कई मस्जिदों, मेडिकल सेंटरों और दूसरी इमारतों में आग लगा दी गई है। अराघची के मुताबिक, देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक और खूनी हो गए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश में सैन्य दखल देने का बहाना मिल सके।
उन्होंने कहा, हमारे पास ईरान में हाल के दिनों में हुई आतंकवादी कार्रवाइयों में अमेरिका और इजरायल के शामिल होने के कई दस्तावेज और सबूत हैं।
अराघची ने आगे कहा, “प्रदर्शन के दौरान कुछ हथियारबंद लोग भी नजर आए। तेहरान के पास ऐसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड हैं, जिनमें कथित तौर पर आतंकवादी गुर्गों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, सुरक्षा और पुलिस बलों को निशाना बनाने और यहां तक कि शांतिपूर्वक रह रहे आम नागरिकों पर हमले के निर्देश दिए गए थे।”
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि “मारे गए कई लोगों को पीछे से गोलियां लगीं। तेहरान के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि कुछ गुर्गों को विदेशी ताकतों से सीधे आदेश मिले थे। इस बात का जीता-जागता सबूत है कि इन आतंकवादी कामों में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।”
अराघची ने यह भी दावा किया कि घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी। उन्होंने कहा कि फारसी बोलने वाले मोसाद के गुर्गों ने इन विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की थी।
--आईएएनएस
केके/वीसी
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