Lucknow Hit and Drag Case: 'आयुष बनकर मिला था शाहनवाज', पीड़िता ने खोले बेल्ट से पिटाई और घसीटने जैसे राज
Lucknow Hit and Drag Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पाश इलाके गोमती नगर विस्तार स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर युवती को कार से कुचलने और घसीटने के मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. इस दिल दहला देने वाली वारदात की पीड़िता ने अब सामने आकर अपनी पूरी आपबीती सुनाई है.
इंडिया टुडे के मुताबिक पीड़िता का साफ कहना है कि आरोपी शाहनवाज ने न सिर्फ उससे अपनी असली पहचान छिपाई, बल्कि लंबे समय तक उसके साथ दरिंदगी और मारपीट भी की. पीड़िता का आरोप है कि आरोपी नशे की हालत में उसे लातों और चमड़े के बेल्ट से पीटता था. पीड़िता ने यह भी आशंका जताई है कि जेल से छूटने के बाद आरोपी उसकी जान ले सकता है, इसलिए वह किसी भी कीमत पर समझौते के लिए तैयार नहीं है.
पहचान छिपाकर आयुष ठाकुर के नाम से की थी दोस्ती
पीड़िता ने अपनी बातचीत में बताया कि शाहनवाज से उसका परिचय करीब एक साल पहले हुआ था. उस समय आरोपी ने अपनी असली पहचान पूरी तरह छिपा ली थी और अपना नाम आयुष ठाकुर बताया था. पीड़िता के अनुसार एक बार जब उसकी स्कूटी की चाबी खो गई थी, तब शाहनवाज अपने दोस्त शरीफ के साथ उसे घर छोड़ने आया था. उस दौरान शरीफ ने भी शाहनवाज को ठाकुर कहकर ही पुकारा था ताकि किसी को कोई शक न हो. काफी समय बाद जब पीड़िता ने शाहनवाज का सोशल मीडिया एकाउंट देखा, तब जाकर उसे सच पता चला कि जिसे वह आयुष समझ रही थी, उसका असली नाम शाहनवाज है. सच सामने आने के बाद वह बुरी तरह घबरा गई थी, लेकिन आरोपी लगातार उसे फोन करके दबाव बनाता रहा और संपर्क में रहा.
क्लबों में जाना और दूसरी लड़कियों से संपर्क रखने का आरोप
पीड़िता ने यह भी दावा किया कि शाहनवाज और उसके साथी अक्सर शहर के बड़े क्लबों में जाते थे और वहां लड़कियों से संपर्क बढ़ाते थे. घटना वाले दिन यानी 16 सितंबर की सुबह करीब साढ़े छह बजे पीड़िता अपनी बुआ और बहन के साथ जनेश्वर मिश्र पार्क में टहलने गई थी. वहां उसने शाहनवाज को दो अन्य लड़कियों के साथ देखा. जब पीड़िता ने वहां जाकर पूछा कि ये लड़कियां कौन हैं, तो शाहनवाज भड़क गया और विवाद शुरू हो गया. झगड़ा बढ़ता देख दोनों युवतियां पार्क के पिछले दरवाजे से चुपचाप निकल गईं.
'आज इसे मार दो', शीशे में हाथ दबाकर घसीटता रहा आरोपी
विवाद के बाद जब शाहनवाज अपनी कार से भागने लगा, तो पीड़िता ने उसे बातचीत करने के लिए रोकने की कोशिश की. आरोप है कि शाहनवाज ने रुकने के बजाय गाड़ी की रफ्तार तेज कर दी और युवती को जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही पीड़िता कार के बोनट पर जा गिरी और उसने खुद को बचाने के लिए वाइपर को कसकर पकड़ लिया. इसी आपाधापी में उसका हाथ कार की खिड़की के शीशे में दब गया. पीड़िता का कहना है कि कार में बैठे आरोपी के दोस्त दानिश ने चिल्लाकर कहा कि आज इसे मार डालो, बाद में जो होगा देखा जाएगा. इसके बाद भी शाहनवाज ने गाड़ी नहीं रोकी और उसे सड़क पर काफी दूर तक घसीटता चला गया. इस घटना में उसके शरीर पर अनगिनत गंभीर चोटें आई हैं.
पहले भी की थी मारपीट, वीडियो बनाकर दी थी धमकी
पीड़िता का कहना है कि आरोपी का हिंसक व्यवहार कोई नई बात नहीं थी. इससे पहले भी डीएलएफ के पास शाहनवाज ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की थी, जहां सुरक्षा गार्डों के बीच-बचाव के बाद उसकी जान बची थी. वह अक्सर शराब और अन्य नशों में धुत होकर उसे बेल्ट से मारता था. इतना ही नहीं, आरोपी ने चुपके से उसका एक निजी वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया था और केस दर्ज कराने पर उसे इंटरनेट पर डालने की धमकी देता था. घटना के बाद आरोपी के परिचितों ने पीड़िता के घर पहुंचकर मुकदमा वापस लेने का भारी दबाव बनाया और चेतावनी दी कि अगर बात आगे बढ़ी तो इसका अंजाम बुरा होगा.
राजनीतिक रसूख और चुनाव लड़ने की तैयारी
पीड़िता ने यह भी साफ किया कि शाहनवाज इलाके में अपना भारी राजनीतिक रसूख दिखाता था. वह अक्सर समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लेकर लोगों पर धौंस जमाता था. चर्चा यह भी है कि वह स्थानीय स्तर पर पार्षद का चुनाव लड़ने की जमीन तैयार कर रहा था. घटना के बाद सोशल मीडिया पर आरोपी की कई राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें भी तेजी से सामने आई हैं.
पुलिस की कार्रवाई और महिला आयोग का कड़ा रुख
गोमती नगर विस्तार थाने की पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए शाहनवाज और उसके साथी दानिश के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया है. वारदात में इस्तेमाल कार को भी जब्त कर लिया गया है. दूसरी ओर, पीड़िता ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग पहुंचकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है. आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल सड़क हादसे का मामला नहीं लगता, बल्कि इसमें पहचान छिपाकर धोखेबाजी और शादी का दबाव बनाने के पहलू भी जुड़े हैं. उन्होंने प्रशासन को मामले की गहन जांच और दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने के निर्देश दिए हैं.
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"पर्चा बनाना सिर्फ फ्रॉड और मैजिक ट्रिक": पंडोखर सरकार का धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा जुबानी वार
मध्य प्रदेश में धार्मिक गुरुओं और पीठाधीश्वरों के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है. दतिया स्थित पंडोखर सरकार धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण शर्मा (पंडोखर सरकार) ने पर्चा बनाकर भविष्य बताने का दावा करने वाले संतों को खुली चुनौती दी है. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका यह जुबानी हमला बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर माना जा रहा है. पंडोखर सरकार ने पंडोखर धाम महोत्सव के दौरान 1 करोड़ 41 लाख रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है. उन्होंने ललकारते हुए कहा कि पर्चा बनाने का दावा करने वाले संत उनके सामने आएं. यदि कोई भी व्यक्ति उनके द्वारा पूछे गए 5 सवालों में से 4 के सटीक और हूबहू जवाब दे देता है, तो उसे 1.41 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी. इसके अलावा, उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के छोटे भाई से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए यह चुनौती भी दी कि कोई यह बताए कि उनके भाई जेल से किस तारीख और किस समय बाहर आएंगे. एक विशेष बातचीत में पंडोखर सरकार ने स्पष्ट किया कि वह सनातन धर्म और संतों के सामाजिक कार्यों का सम्मान करते हैं, लेकिन पर्चे पर भविष्य लिखने की प्रक्रिया पूरी तरह से 'ट्रिक, मैजिक और धोखाधड़ी' है. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में लोगों को चमत्कार और पर्चियों के नाम पर गुमराह नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने श्रद्धालुओं और भक्तों से अपील की कि वे मंदिरों में श्रद्धा और आस्था के साथ जाएं, लेकिन अंधविश्वास और पर्चों के चक्कर में पड़कर अपना नुकसान न कराएं.
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