Amit Shah ने शबरिमला सोना चोरी मामले में निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को शबरिमला मंदिर में सोने की चोरी को लेकर मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की आलोचना की और एक निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराए जाने की मांग की।
स्थानीय निकायों के नवनिर्वाचित भाजपा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए और केरल में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के मिशन 2026 कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए शाह ने कहा कि जो लोग शबरिमला की संपत्तियों की रक्षा करने में विफल रहे, वे लोगों के धर्म की रक्षा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि केरल में श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ही कर सकती है। गृह मंत्री ने कहा कि शबरिमला में सोने की चोरी केवल केरल के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है।
शाह ने कहा कि उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी देखी है और जिस तरह से इसे तैयार किया गया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि इसका उद्देश्य आरोपियों को बचाना है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) से जुड़े दो व्यक्तियों पर संदेह जताते हुए भाजपा नेता ने पूछा कि ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच कैसे संभव हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को भी दोषमुक्त नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके नेताओं की संलिप्तता के सबूत सामने आए हैं। शाह ने विजयन का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मैं मांग करता हूं कि मुख्यमंत्री इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी को सौंप दें। भाजपा विरोध प्रदर्शन और घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाएगी। विजयन, यही लोकतंत्र है और आपको निष्पक्ष जांच एजेंसी को नियुक्त करना ही होगा।’’
दो प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक विचारधाराओं पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, ‘‘विश्व स्तर पर साम्यवाद का अंत हो चुका है और भारत में कांग्रेस का पतन हो चुका है।’’ उन्होंने कहा कि केरल का विकास केवल भाजपा सरकार के नेतृत्व में ही संभव है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘हमारा रास्ता कभी आसान नहीं था। केरल में भाजपा की जीत सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। हमारा अंतिम लक्ष्य केरल में कमल के चिह्न के तहत सरकार बनाना और भाजपा के मुख्यमंत्री को सत्ता में लाना है।
ठाणे में पानी की किल्लत, कूड़ाघरों की कमी और अन्य समस्याएं आज भी जस की तस: Supriya Sule
राकांपा (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले ने राज्य में सत्तारूढ़ महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भले ही ठाणे को एक “सभ्य” शहर के रूप में पेश किया जा रहा हो, लेकिन पानी की किल्लत, कूड़ाघरों की कमी और अन्य समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
नगर निकाय चुनावों से पहले शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (उबाठा) के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सुले ने ठाणे के विकास के लिए बड़े पैमाने पर धनराशि मंजूर किए जाने के सरकारी दावों पर सवाल उठाए।
इस मौके पर राकांपा (एसपी) के विधायक जितेंद्र आव्हाड, पार्टी की ठाणे शहर इकाई के अध्यक्ष मनोज प्रधान, अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व समर्थक मौजूद थे।
सुले ने कहा कि ठाणे कभी एक छोटा शहर था, लेकिन राज्य और देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां बेहतर जीवन और विकास की उम्मीद लेकर आए, मगर आज उनकी उम्मीदें निराशा में बदल गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाणे को “सभ्य” शहर बताया जाता है, लेकिन पानी, कूड़ाघरों की कमी, तथा शिक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अब भी हल नहीं हो पाई हैं।
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