Jammu Kashmir: उधमपुर में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, दो आतंकी ढेर; सर्च ऑपरेशन जारी
Jammu Kashmir Encounter: जम्मू-कश्मीर में उधमपुर में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ की खबर है. बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में 2-3 आतंकवादी मारे गए हैं. ये मुठबेड़ उधमपुर जिले के पहाड़ी क्षेत्र मजालता में बुधवार रात हुई. जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात हुई इस मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने गोलीबारी की. जिसका सुरक्षा बलों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया.
सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर दागे रॉकेट
इस दौरान सुरक्षा बलों ने सात से आठ राकेट दागे साथ ही इलाके में ड्रोन से निगरानी की. सुरक्षा बलों की ओर से की गई इस जवाबी कार्रवाई में दो से तीन आतंकियों के मारे जाने की खबर है. हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इस मुठभेड़ में कितने आतंकी मारे गए हैं. मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
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Vishwakarma Jayanti Puja Katha: आज विश्वकर्मा जयंती है, इस दिन पर जरूर पढ़ें ये भगवान की यह कथा
Vishwakarma Jayanti Puja Katha: आज यानी 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है. ऐसे में आज के दिन लोग उनकी पूजा करेंगे. भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार माना जाता है. उनके जन्मोत्सव के लिए चंद्र कैलेणडर नहीं सौर कैलेंडर देखा जाता है. उसके अनुसार, 17 सितंबर को ही हर साल उनकी जयंती मनाई जाती है. आज के दिन कारखानों, बड़े प्रतिष्ठान, फैकट्रियों और औजारों से जुड़े कार्य करने वाले लोग पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन उनकी पूजा करने के साथ-साथ सभी औजार और मशीनों की पूजा भी की जाती है. ऐसे में भगवान विश्वकर्मा की कथा का भी पाठ जरूर करना चाहिए.
भगवान श्री विश्वकर्मा कथा
सूतजी बोले, प्राचीण समय की बात है जब मुनि विश्वमित्र के बुलावे पर मुनि और संयासी लोग एक स्थान पर एकत्र हुए सभा करने के लिए. सभा में, मुनि विश्वमित्र ने सभी को संबोधित किया. मुनि विश्वमित्र ने कहा कि, हे मुनियों आश्रमों में दुष्ट राक्षस यज्ञ करने वाले हमारे लोगों को अपना भोजन बना लेते,यज्ञों को नष्ट कर देतें है. जिसके कारण हमारे पूजा-पाठ, ध्यान आदि में परेशानी हो रही है. इसलिए, अब हमे तत्काल उनके कुकृत्यों से बचने का कोई उपाय अवश्य करना चाहिए.
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ऋषियों ने वशिष्ठ मुनि की बात सुनी
मुनि विश्वमित्र की बातों को सुनकर वशिष्ठ मुनि कहने लगे कि एक बार पहले भी ऋषि-मुनियों पर इस तरह का संकट आया था. उस समय हम सब मिलकर ब्रह्माजी के पास गए थे. ब्रह्माजी ने ऋषि मुनियों को इस संकट से छुटकारा पाने के लिए उपाय बताया था. ऋषियों ने ध्यानपूर्वक वशिष्ठ मुनि कि बातों को सुना और कहने लगे कि वशिष्ठ मुनि ने ठीक ही कहा है, हमें ब्रह्मदेव की ही शरण में जाना जाना चाहिए.
ऐसा सुन सब ऋषि-मुनियों ने स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया. मुनियों के इस प्रकार कष्ट को सुनकर ब्रह्मा जी को बडा आश्चर्य हुआ तब ब्रह्मा जी कहने लगे कि हे मुनियों राक्षसों से तो स्वर्ग मे रहने वाले देवता को भी भय लगता रहता है. फिर मनुष्यों का तो कहना ही क्या जो बुढापे और मृत्यु के दुखों में लिप्त रहते हैं. उन राक्षसों को नष्ट करने में श्री विश्वकर्मा समर्थ है, आप लोग श्री विश्वकर्मा के शरण में जाएं. इस समय पृथ्वी पर अग्नि देवता के पुत्र मुनि अगिरा यज्ञों में श्रेष्ठ पुरोहित हैं और जो श्री विश्वकर्मा के भक्त है.
ब्रह्मा जी ने दिया सुझाव
वहीं, आपके दुखों को दूर कर सकते हैं. इसलिए हे मुनियों, आप उन्ही के पास जाए. सूतजी बोलें ब्रह्मा जी के कथन के अनुसार मुनि लोग अगिंरा ऋषि पास गए. मुनियों की बातों को सुनकर अगिंरा ऋषि ने कहा कि हे मुनियों आप लोग क्यों व्यर्थ मे इधर-उधर मारे-मारे फिरते रहें है. दुखों को दुर करने मे विश्वकर्मा भगवान के अतिरिक्त और कोई भी समर्थ नहीं है.
अमावस्या के दिन, आप लोग अपने साधारण कर्मों को रोक कर भक्ति पूर्वक श्रीविश्वकर्मा कथा सुनों और उनकी उपासना करो. इससे आपके सारे कष्टों को विश्वकर्मा भगवान अवश्य दुर करेंगे. महर्षि अगिंरा की बातों को सुनकर सभी लोग अपने-अपने आश्रमों को चले गए. तत्प्रश्चात् अमावस्या के दिन, मुनियों ने यज्ञ किया. यज्ञ में विश्वकर्मा भगवान का पूजन किया. 'श्री विश्वकर्मा कथा' को सुना. जिसका परिणाम यह हुआ कि सारे राक्षस भस्म हो गए. यज्ञ विघ्नों से रहित हो गया, उनके सारे कष्ट दुर हो गए. जो मनुष्य भक्ति-भाव् से विश्वकर्मा भगवान की पूजा करता है, वह सुखों को प्राप्त करता हुआ संसार में बड़े पद को प्राप्त करता है.
भगवान श्री विश्वकर्मा जी की आरती (Shree Vishwakarma Aarti in Hindi)
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवोप्रभु विश्वकर्मा।
सुदामा की विनय सुनीऔर कंचन महल बनाये।
सकल पदारथ देकर प्रभु जीदुखियों के दुख टारे॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
विनय करी भगवान कृष्ण नेद्वारिकापुरी बनाओ।
ग्वाल बालों की रक्षा कीप्रभु की लाज बचायो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
रामचन्द्र ने पूजन कीतब सेतु बांध रचि डारो।
सब सेना को पार कियाप्रभु लंका विजय करावो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
श्री कृष्ण की विजय सुनोप्रभु आके दर्श दिखावो।
शिल्प विद्या का दो प्रकाशमेरा जीवन सफल बनावो॥
प्रभु श्री विश्वकर्मा घर आवो...॥
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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