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चीन पर भारत की चढ़ाई, बंपर एक्सपोर्ट कर दिखाया दम!

भारत और चीन के बीच आर्थिक रिश्तों के मोर्चे से एक बहुत महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त के महीने में भारत से चीन को होने वाले निर्यात यानी एक्सपोर्ट्स पर साल दर साल आधार पर 52.35% का जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा इसलिए भी विशेष ध्यान आकर्षित करता है क्योंकि इसी दौरान चीन से भारत आने वाले आयात यानी कि इंपोर्ट्स की वृद्धि दर केवल 17.07% रही है। यानी भारत की एक्सपोर्ट ग्रोथ रेट चीन के इंपोर्ट की तुलना में तीन गुना से भी अधिक तेज हो गई है और आर्थिक एक्सपर्ट्स और व्यापारिक एक्सपर्ट्स इसे दोनों बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्था के बीच एक लचीले और मजबूत आर्थिक जुड़ाव के रूप में देख रहे हैं। दरअसल बिजनेस स्टैंडर्ड और आधिकारिक सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार अगस्त में भारत का व्यापारिक निर्यात चीन के लिए बढ़कर 1.9 अरब डॉलर यानी 1.9 बिलियन के पार पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर चीन से भारत का आयात 8.4 अरब डॉलर रहा है। लेकिन यह सकारात्मक गति केवल एक महीने तक सीमित नहीं है। अगर हम मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 5 महीनों यानी अप्रैल से अगस्त की पूरी अवधि का जायजा लें तो आंकड़े कुछ और ही हैं। 

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भारत का कुल निर्यात
चीन को होने वाला निर्यात 38.71% बढ़कर 9.64 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।  इस दौरान चीन से आयात 27.01% की दर से बढ़कर 65.5 अरब डॉलर रहा है। अब यहां गौर करने वाली बात यह है कि कुल आयात का मूल्य अभी भी बड़ा है। लेकिन भारत की तरफ से भेजी जाने वाली वस्तुओं की विकास दर आयात की रफ्तार को लगातार पीछे छोड़ रही है। और सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त महीने में भारत के कुल निर्यात मूल्य में सबसे ज्यादा इजाफा दर्ज कराने वाले शीर्ष पांच गंतव्य देशों में चीन प्रमुख रूप से शामिल रहा है। चलिए अब जान लेते हैं वैश्विक परिदृश्य और शीर्ष भागीदार। तो नंबर एक पर है संयुक्त राज्य अमेरिका यानी कि यूएस। दूसरे नंबर पर है चाइना, तीसरे नंबर पर सिंगापुर, चौथे नंबर पर है स्पेन और पांचवें नंबर पर है तंजानिया। जी हां, यह सूची यह लिस्ट बताती है कि वैश्विक बाजार में मांग के उतार-चढ़ाव के बीच भी भारतीय उत्पादों की स्वीकृति चीन और पश्चिमी बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। यह सकारात्मक ट्रेंड केवल भारतीय आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि चीन के आधिकारिक आंकड़ों में भी इसकी पुष्टि होती है। 

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चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ कस्टम्स द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष के पहले 8 महीनों में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षी व्यापार में 22.6% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही दोनों देशों के वाणिज्य और व्यापार अधिकारियों के बीच द्विपक्षी व्यापार को और अधिक व्यवहारिक और संतुलित बनाने पर नियमित चर्चाएं भी हुई हैं। चीन ने भी व्यापारिक चिंताओं को संतुलित तरीके से सुलझाने और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया है। खैर कुल मिलाकर दोस्तों भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत और चीन की अर्थव्यवस्था एक दूसरे की आपूर्ति श्रंखलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुकी हैं। भारत के निर्यात में 52% से अधिक का यह उछाल भारतीय विनिर्माण और आपूर्ति क्षमता की मजबूती को दिखाता है।

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हां, हम 1965 में हार गए थे...भारत पाकिस्तान की जंग को लेकर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दुनिया के सामने कबूला सच

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बार फिर अपने ही पुराने बयान के सामने खड़े नजर आ रहे हैं। करीब 20 साल पुराने उनके एक बयान और अब दिए गए नए बयान को अगर आमने-सामने रख दें तो सवाल उठना लाजमी है। आखिर ख्वाजा आसिफ की बात पर भरोसा किया जाए तो किस बात पर किया जाए? एक तरफ साल 2006 का बयान है जिसमें ख्वाजा आसिफ पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर 1965 की जंग और पाकिस्तान की सैन्य नाकामियों का जिक्र करते हुए नजर आते हैं। दूसरी तरफ 2026 का उनका नया बयान है जिसमें वो 1965 की लड़ाई को पाकिस्तान के लिए गौरव का ध्याय बताते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया पर ख्वाजा आसिफ घिर गये हैं।

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दरअसल सोशल मीडिया पर वायरल एक क्लिप में ख्वाजा आसिफ 2025 के भारत पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। वो कह रहे हैं कि भारत ने पाकिस्तान को ललकारा था और पाकिस्तान की तरफ [संगीत] से जो जवाब दिया गया उसे पूरी दुनिया ने देखा। उसके बाद कार्यक्रम के होस्ट ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अय्यूब खान और 1965 की जंग  का जिक्र किया। जवाब में ख्वाजा आसिफ अय्यूब खान के दौर को पाकिस्तान के इतिहास का सुनहरा अध्याय बताते हैं। वो कहते हैं कि पाकिस्तान ने एक बड़े हमले का मुकाबला किया और यहां तक दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि पाकिस्तान ने दुश्मन के इलाके में जाकर लड़ाई लड़ी। यानी कि इस बयान में ख्वाजा आसिफ का जोर पाकिस्तान की सैन्य उपलब्धि और 1965 की जंग को गौरव के रूप में पेश करने पर है। 

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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में ख्वाजा आसिफ खुद पाकिस्तान की सेना और उसके युद्ध रिकॉर्ड पर सवाल उठा रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने 1948, 1965, 1971 और कारगिल जैसी लड़ाईयों का जिक्र किया। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर इन युद्धों का निष्पक्ष जांच की जाए तो देश के प्रतिनिधियों को शर्म महसूस होगी। इसी भाषण में ख्वाजा आसिफ ने 1965 की जंग के संदर्भ में पाकिस्तान के सरेंडर की बात कही थी। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि 1965 की जंग में पाकिस्तान की सेना ने कश्मीर में जाने से इंकार किया था और फिर कबायली लड़ाके वहां गए। जानकारी देते चलें कि 1965 की जंग का इतिहास इतना सीधा नहीं है कि उसे सिर्फ भारत की जीत या पाकिस्तान की जीत के दो शब्दों में समेट कर रख दिया जाए। अमेरिकी विदेश विभाग के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक 1965 का युद्ध कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ। दूसरा बड़ा युद्ध था। पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर में सैन्य कारवाई की कोशिश के बाद संघर्ष बढ़ा और भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के दूसरे हिस्सों पर भी सैन्य कारवाई की।

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पाकिस्तान के युद्ध इतिहास में 1965 और 1971 को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। 1965 में युद्ध विराम और ताशकंद समझौते के साथ लड़ाई खत्म हुई। 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हुआ और इसी इतिहास को लेकर जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान बदलते हुए नजर आए तो सवाल सिर्फ सोशल मीडिया का नहीं रह जाता।

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  Sports

West Indies के खिलाफ Team India ऐलान, ODI और T20I में युवा चेहरों को मौका

भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 27 सितंबर से शुरू होने वाली वनडे और टी20 इंटरनेशनल सीरीज़ के लिए अपनी 15-सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। श्रेयस अय्यर की गैर-मौजूदगी में ऋषभ पंत की वापसी की काफी चर्चा थी, लेकिन उन्हें टीम में जगह नहीं मिल पाई क्योंकि टीम मैनेजमेंट ने उनकी जगह ध्रुव जुरेल को चुना। पंत अब आने वाले ईरानी कप में 'रेस्ट ऑफ़ इंडिया' टीम की कप्तानी करेंगे।

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दूसरी ओर, एशियाई खेलों की टीम में चुने गए नितीश कुमार रेड्डी को उस टीम से हटाकर वनडे टीम में शामिल किया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि हार्दिक पांड्या अभी तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं और खेल में वापसी नहीं कर सके हैं। भारत के वेस्टइंडीज़ दौरे में तीन वनडे और तीन T20 इंटरनेशनल मैच खेले जाएंगे।

भारत की वनडे टीम


शुबमन गिल [सी], रोहित शर्मा, विराट कोहली, रुतुराज गायकवाड़, केएल राहुल [वीसी], ध्रुव जुरेल, नितीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जड़ेजा, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, मोहम्मद सिराज, औकिब नबी, यशस्वी जयसवाल, नमन धीर।

भारत की T20I टीम


श्रेयस अय्यर [सी], अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन [विकेटकीपर], संजू सैमसन [विकेटकीपर], तिलक वर्मा [वीसी], शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, नितीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव।

T20I के लिए मयंक और प्रिंस पर विचार


जसप्रीत बुमराह को आराम दिए जाने के बाद मयंक यादव और प्रिंस यादव की T20I टीम में वापसी हुई है, जबकि यश ठाकुर अपनी जगह नहीं बचा पाए। दिलचस्प बात यह है कि कुलदीप यादव को वापस बुलाया गया है, क्योंकि वरुण चक्रवर्ती साइड स्ट्रेन (मांसपेशियों में खिंचाव) के कारण सीरीज़ से बाहर हो गए हैं।

रोहित की जगह बरकरार; वनडे में नबी और नमन चुने गए


इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे से पहले रोहित शर्मा की जगह पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि, मुंबई के इस बल्लेबाज ने लॉर्ड्स में शानदार पारी खेली, जिससे उन्हें टीम में बने रहने का मौका मिला। इस बीच, BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने पूर्व भारतीय कप्तान का समर्थन किया है, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने भविष्य में बदलाव की गुंजाइश रखी है, क्योंकि यशस्वी जायसवाल को भी टीम में चुना गया है।

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गेंदबाजी की बात करें तो काउंटी क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद आकिब नबी को पहली बार वनडे टीम में बुलाया गया है। नमन धीर को भी टीम में जगह मिली है, जबकि ऋतुराज गायकवाड़ की वापसी हुई है और उनके चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने की पूरी संभावना है क्योंकि श्रेयस एशियाई खेलों के लिए टीम से बाहर रहेंगे।

Thu, 17 Sep 2026 12:32:00 +0530

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