कौन-सी 3 चीजों से समझौता नहीं करते मोदी:किससे अपना दुख साझा करते हैं; 76वें जन्मदिन पर पीएम मोदी की पर्सनल जिंदगी के किस्से
नरेंद्र मोदी आज 76 साल के हो गए। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी एनर्जी की झलक 4 दिन पहले BRICS समिट में दिख चुकी है। 48 घंटों के भीतर पुतिन, जिनपिंग जैसे नेताओं के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें, 3 बड़े शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता, गाला डिनर की मेजबानी और बीच-बीच में पौधा रोपण, प्रदर्शनी जैसे कार्यक्रमों में भी शिरकत। पीएम मोदी हर मंच पर उतने ही चुस्त नजर आए। 76 साल की उम्र में भी यह फिटनेस और अनुशासन आता कहां से है, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मोदी का रूटीन कैसा होता है, उनका खाना कौन तय करता है, कपड़े कौन चुनता है, भाषण की तैयारी कैसे होती है; जन्मदिन के मौके पर पढ़िए पीएम मोदी की दिनचर्या और पर्सनल जिंदगी के किस्से… नरेंद्र मोदी बचपन से ही ‘अर्ली राइजर’ हैं। पीएम बनने के बाद भी कमोबेश यही अनुशासन बरकरार है। पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय को एक इंटरव्यू में मोदी ने बताया था- ‘मैं बहुत कम सोता हूं, बस साढ़े तीन या चार घंटे। सुबह 4:30 से 4:45 बजे तक उठ जाता हूं। देर हुई तो ज्यादा से ज्यादा 5 बजे तक।’ उठने के बाद पीएम एक खास वॉकिंग ट्रैक पर टहलते हैं। 2018 में विराट कोहली को फिटनेस चैलेंज देते हुए मोदी ने प्रधानमंत्री आवास के लॉन में बने वॉकिंग ट्रैक का वीडियो शेयर किया था। बताया था कि ये पंचतत्व, यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश से प्रेरित है। मोदी के सुबह के रूटीन में योग और मेडिटेशन भी शामिल है। खासतौर पर सूर्य नमस्कार। पीएम आवास में मौजूद गाय और मोर को खिलाना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। 15 अगस्त 2026, स्वतंत्रता दिवस की सुबह लाल किले के लिए निकलने से पहले, समय की कमी के बावजूद मोदी ने गाय और मोर को खिलाने का वीडियो शेयर किया। पीएम मोदी का खाना करीब ढाई दशक से एक ही शख्स तैयार करते हैं- बद्री मीणा। राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले बद्री 1990 के दशक में काम की तलाश में गुजरात पहुंचे थे। उस वक्त नरेंद्र मोदी बीजेपी के महासचिव हुआ करते थे। बद्री का काम मोदी को इतना पसंद आया कि उन्होंने अपना परमानेंट कुक बना लिया। किशोर मकवाना अपनी किताब ‘कॉमनमैन नरेंद्र मोदी’ में लिखते हैं कि नाश्ते में मोदी को पोहा खास पसंद है। इसके अलावा उनकी थाली में खिचड़ी, कढ़ी, उपमा, खाखरा जैसी चीजें होती हैं। साथ में अदरक वाली चाय। हाल की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके नाश्ते में मौसमी फल, मखाना, उबली सब्जियां और साबुत अनाज भी शामिल हो गए हैं। थाली में मोरिंगा यानी सहजन के पराठे को भी जगह मिली है। ‘नरेंद्र मोदी: अ पॉलिटिकल बायोग्राफी’ किताब के लेखक एंडी मारिनो को मोदी ने बताया था कि RSS के दिनों में अलग-अलग घरों में खाना पड़ता। इसी वजह से उनके अंदर खाने को लेकर कोई खास पसंद या नापसंद नहीं है। जब तक खाना शाकाहारी है, उनके लिए सब कुछ एक समान, बढ़िया और स्वादिष्ट होता है। हर साल जून से लेकर नवंबर में दीवाली तक करीब चार महीने मोदी सिर्फ एक बार भोजन करते हैं। यह व्रत मानसून की चतुर्मास परंपरा से जुड़ा है। पीएम मोदी ने ये बात पिछले साल लेक्स फ्रिडमैन के पॉडकास्ट में बताई थी। ‘कॉमनमैन नरेंद्र मोदी’ में मोदी बताते हैं, ‘रोजाना मैं ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे पूजा करता हूं। नवरात्रि में जाप करता हूं। शक्ति की आराधना करता हूं। व्रत भी करता हूं। चैत्र नवरात्रि में एक फल दिन में एक बार लेता हूं, लेकिन आश्विन नवरात्रि में केवल गर्म पानी।’ फरवरी 2026 में मोदी ने बीजेपी सांसदों के साथ 45 मिनट बातचीत की। यहां मौजूद रहे केंद्रीय राज्यमंत्री एल. मुरगन ने बाद में बताया कि पीएम मोदी शाम 6 बजे के बाद कुछ नहीं खाते। मोदी के जनसंपर्क विभाग में 11 साल काम कर चुके धीरेन अवाशिया के मुताबिक, ‘उनके काम के प्लान में बिना तय की हुई कोई भी चीज अचानक शामिल नहीं होती। उनका स्टाफ मिनट-दर-मिनट के हिसाब से उनका पूरा शेड्यूल बहुत ध्यान से तैयार करता है।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह 9 बजे तक पीएमओ के टॉप अधिकारियों के साथ मोदी की एक जरूरी बैठक हो चुकी होती है। पीएम मोदी का शेड्यूल, दौरे और मीटिंग्स को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की विशेष टीमें मैनेज करती है, जिसमें… ‘मोदी जी ने मुझसे एक बार कहा था कि वे तीन चीजों के साथ कभी समझौता नहीं कर सकते- आंखें, आवाज और कपड़े।’ ये बात बिपिन चौहान ने एक इंटरव्यू में बताई थी। मोदी दशकों से बिपिन के सिले कपड़े ही पहन रहे हैं। ये कहानी अहमदाबाद की एक छोटी सी सिलाई दुकान से शुरू होती है। बिपिन चौहान और जितेंद्र चौहान नाम के दो भाई 'सुप्रीमो क्लोदिंग' नाम की एक छोटी दुकान चलाते थे। उस वक्त मोदी RSS के प्रचारक थे और यहीं से कुर्ते सिलवाते थे। आज चौहान बंधु JadeBlue ब्रांड के मालिक हैं। बिपिन को 'मोदी कुर्ते' का जनक माना जाता है। 2012 में खुद मोदी ने उन्हें इसके लिए क्रेडिट दिया था। कई बार अपने कपड़ों के फैब्रिक और रंगों का चुनाव मोदी खुद करते हैं। पीएम मोदी कहते हैं, ‘ईश्वर ने मुझे यह स्वाभाविक समझ दी है। मैं खुद ही रंगों का कॉम्बिनेशन चुनता हूं। जब मैं RSS का प्रचारक था, तब कपड़े खुद ही धोता था। लंबे आस्तीन के कुर्ते धोने और सुखाने में ज्यादा समय लेते थे, इसलिए मैंने उन्हें आधा काट दिया। इससे कपड़े धोने में आसानी होती थी और झोले में जगह भी कम घिरती थी। यह किसी डिजाइनर का विचार नहीं था, बल्कि मेरी अपनी जरूरत और सुविधा से निकला तरीका था।’ पीएम मोदी ने परिवार छोड़ दिया, लेकिन मां हीराबा से बेहद लगाव रखते थे। 17 वर्ष की उम्र में जब मोदी ने 2 साल के लिए घर छोड़ा, तब भी अपने झोले में मां की एक तस्वीर हमेशा रहती थी। 2022 में हीराबा के निधन से पहले तक हर साल जन्मदिन पर मोदी उनका आशीर्वाद लेने जाते थे। ‘नरेंद्र मोदी: अ पॉलिटिकल बायोग्राफी’ के लेखक एंडी मारिनो लिखते हैं, ‘लोग और मोदी खुद ऐसा मानते हैं कि वो लोनर, यानी अकेले रहने वाले इंसान हैं। लेकिन मुझे लगता है कि भले ही वे प्रैक्टिकल या क्लिनिकल हों, लेकिन इमोशनली कोल्ड नहीं हैं। उनमें एक ठहराव है, जो रैलियों में दिखने वाले उनके आक्रामक अंदाज से बिल्कुल अलग है।’ मारिनो ने मोदी से पूछा कि जब कभी आप ज्यादा तनाव में होते हैं या कोई निजी दिक्कत होती है, तो किसे फोन करते हैं या किससे सलाह लेते हैं? मोदी ने शांत भाव से जवाब दिया- मेरे जीवन में ऐसी स्थिति कभी आई ही नहीं है। जब मैं संघ में प्रचारक था, तब मेरे मेंटर थे- लक्ष्मणराव इनामदार। उस वक्त जब भी मुझे कोई दिक्कत होती, तो मैं उनसे खुलकर बात कर लेता था। लेकिन अब मेरी सोचने की प्रक्रिया ऑटो-पायलट सिस्टम पर चल रही है। पीएम मोदी के बारे में ऐसी अन्य बातें, जो अक्सर पूछी जाती हैं… भाषण कौन लिखता है: प्रधानमंत्री कार्यालय में 2021 में एक RTI के जरिए पूछा गया कि पीएम मोदी के भाषण तैयार करने में कौन-कौन शामिल रहता है? जवाब में बताया गया कि कार्यक्रम की प्रकृति के आधार पर संबंधित व्यक्तियों, अधिकारियों, विभागों और संगठनों से इनपुट लिए जाते हैं और फिर मोदी खुद अपने भाषण को अंतिम रूप देते हैं। कौन-सा फोन इस्तेमाल करते हैंः सुरक्षा कारणों से मोदी सामान्य स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत के लिए वे सैटेलाइट या RAX (रेस्ट्रिक्टेड एरिया एक्सचेंज) फोन इस्तेमाल करते हैं। यह फोन ट्रेस या हैक नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह मिलिट्री फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करता है। बताया जाता है कि यह फोन हमेशा उनके प्रधान सचिव के पास रहता है, जो जरूरत पड़ने पर ही उन्हें देते हैं। पब्लिक इवेंट्स में मोदी को अक्सर आईफोन इस्तेमाल करते देखा गया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह उनका निजी फोन नहीं, सिर्फ तस्वीरें लेने के लिए इस्तेमाल होता है। सीनियर जर्नलिस्ट राजदीप सरदेसाई बताते हैं कि उनके पास जब भी पीएम मोदी का फोन आता है, तो स्क्रीन पर नंबर नहीं, बल्कि ‘प्राइवेट नंबर’ लिखा होता है। विदेशों में क्या रूटीन होता हैः विदेश यात्रा के लिए मोदी अपनी ‘बायो क्लॉक’ को मेजबान देश के समय के हिसाब से सेट करते हैं। मसलन- अगर वे रात में भारत से रवाना हो रहे हैं और मेजबान देश में उस वक्त दिन है, तो सफर के दौरान वे सोते नहीं, बल्कि काम और मीटिंग्स करते हैं। डॉक्टरों की सलाह पर फ्लाइट के दौरान ज्यादा पानी पीते हैं। विदेश पहुंचने के बाद उनका रूटीन लगभग वैसा ही रहता है, जैसा भारत में। सुबह जल्दी उठाना, योग-ध्यान करना, हल्का खाना लेना और मुलाकातें करना। क्या वाकई छुट्टी नहीं लेतेः मोदी कई बार इंटरव्यू और रैलियों में कह चुके हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री रहते कभी निजी छुट्टी नहीं ली। ‘कॉमनमैन नरेंद्र मोदी’ में लिखा है कि करीब 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी ने कभी छुट्टी नहीं ली, जबकि 2016 में दायर एक RTI के जवाब में PMO ने बताया कि पद संभालने के बाद से उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली। ****** References and further Readings
Govt Cuts Fuel Export Duty: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला; पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर घटाया निर्यात शुल्क
केंद्र सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों और पेट्रोलियम निर्यातकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से ईंधन पर लागू होने वाले विंडफॉल टैक्स और एक्सपोर्ट लेवी की समीक्षा की है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना और समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर से लागू दरों की तुलना में पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को काफी कम कर दिया गया है।
पेट्रोल और डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी में राहत
सरकार द्वारा जारी नए संशोधनों के अनुसार, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट लेवी में 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इस संशोधन के बाद पेट्रोल पर लगने वाला निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर से घटकर अब 0.5 रुपये यानी महज 50 पैसे प्रति लीटर रह गया है। वहीं, डीजल पर निर्यात शुल्क में 5 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की गई है।
इसके चलते डीजल पर लगने वाली लेवी 25 रुपये प्रति लीटर से कम होकर 20 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। उल्लेखनीय है कि डीजल पर लागू पिछली 25 रुपये की संरचना में 24 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और 1 रुपये प्रति लीटर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) शामिल था।
हवाई ईंधन यानी ATF पर शुल्क में संशोधन
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर लागू एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी राहत दी गई है। सरकार ने एटीएफ पर लगने वाले निर्यात शुल्क में 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।
इस कटौती के साथ ही एटीएफ पर नई एक्सपोर्ट ड्यूटी 19 रुपये प्रति लीटर से घटकर 15 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। सरकार का यह संशोधन फिलहाल अगले दो सप्ताह की अवधि के लिए ही लागू रहेगा, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी।
घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर असर
सरकार द्वारा केवल एक्सपोर्ट लेवी घटाने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि देश के घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम हो जाएंगे। एक्सपोर्ट लेवी मुख्य रूप से रिफाइनरियों द्वारा विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होती है।
घरेलू ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी मुद्रा विनिमय दर, सरकार द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय टैक्स और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करती हैं।
निर्यात कारोबार और पेट्रोलियम बाजार का भविष्य
सरकार के इस फैसले से मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े कारोबारियों पर लगने वाला टैक्स का बोझ कम होगा। अगले दो सप्ताह में इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव देश के निर्यात कारोबार और पेट्रोलियम बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं और बाजार विशेषज्ञों की नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुख और आगे सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अगले नीतिगत फैसलों पर बनी रहेगी।
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