Govt Cuts Fuel Export Duty: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला; पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर घटाया निर्यात शुल्क
केंद्र सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों और पेट्रोलियम निर्यातकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से ईंधन पर लागू होने वाले विंडफॉल टैक्स और एक्सपोर्ट लेवी की समीक्षा की है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना और समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर से लागू दरों की तुलना में पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को काफी कम कर दिया गया है।
पेट्रोल और डीजल पर एक्सपोर्ट लेवी में राहत
सरकार द्वारा जारी नए संशोधनों के अनुसार, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट लेवी में 1 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इस संशोधन के बाद पेट्रोल पर लगने वाला निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर से घटकर अब 0.5 रुपये यानी महज 50 पैसे प्रति लीटर रह गया है। वहीं, डीजल पर निर्यात शुल्क में 5 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती की गई है।
इसके चलते डीजल पर लगने वाली लेवी 25 रुपये प्रति लीटर से कम होकर 20 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। उल्लेखनीय है कि डीजल पर लागू पिछली 25 रुपये की संरचना में 24 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और 1 रुपये प्रति लीटर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) शामिल था।
हवाई ईंधन यानी ATF पर शुल्क में संशोधन
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर लागू एक्सपोर्ट ड्यूटी में भी राहत दी गई है। सरकार ने एटीएफ पर लगने वाले निर्यात शुल्क में 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है।
इस कटौती के साथ ही एटीएफ पर नई एक्सपोर्ट ड्यूटी 19 रुपये प्रति लीटर से घटकर 15 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। सरकार का यह संशोधन फिलहाल अगले दो सप्ताह की अवधि के लिए ही लागू रहेगा, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी।
घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर असर
सरकार द्वारा केवल एक्सपोर्ट लेवी घटाने के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि देश के घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम हो जाएंगे। एक्सपोर्ट लेवी मुख्य रूप से रिफाइनरियों द्वारा विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होती है।
घरेलू ईंधन की दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी मुद्रा विनिमय दर, सरकार द्वारा लगाए जाने वाले स्थानीय टैक्स और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करती हैं।
निर्यात कारोबार और पेट्रोलियम बाजार का भविष्य
सरकार के इस फैसले से मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े कारोबारियों पर लगने वाला टैक्स का बोझ कम होगा। अगले दो सप्ताह में इस बदलाव का सकारात्मक प्रभाव देश के निर्यात कारोबार और पेट्रोलियम बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं और बाजार विशेषज्ञों की नजर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुख और आगे सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अगले नीतिगत फैसलों पर बनी रहेगी।
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