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महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दे सरकार: Sharad Pawar

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि वह कम बारिश का सामना करने वाले तालुकों में सूखा घोषित करें और प्रभावित किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दें। पवार ने बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में दावा किया कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में कम बारिश के कारण सोयाबीन, कपास और दाल जैसी खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, साथ ही बुआई का रकबा भी काफी कम हो गया है और पेयजल व चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह औपचारिकताओं की प्रतीक्षा किये बिना सूखा घोषित करे और प्रभावित इलाकों को तुरंत राहत पहुंचाए।

पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये और खेतिहर मज़दूर परिवारों को 25,000 रुपये प्रति परिवार की दर से विशेष सहायता देने की भी मांग की। उन्होंने कृषि ऋण माफी योजना को तुरंत लागू करने और नयी फसल के लिए ऋण उपलब्ध कराने की भी मांग की। पवार ने पत्र में उन किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की मांग की जो नियमित रूप से कर्ज चुकाते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने 2025-26 में फसल ऋण लिया था लेकिन इस साल भुगतान नहीं कर पाए, उन्हें भी कर्ज माफी योजना में शामिल किया जाए। पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछली तारीख से लागू करने और पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए फसल के नुकसान के लिए घोषित ₹17,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि तुरंत जारी करने की भी मांग की। राकांपा(शप) अध्यक्ष ने सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे इलाकों के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत खेती और जल संरक्षण से जुड़ी विशेष योजनाएं संचालित करने और बागों को बचाने के लिए पानी के टैंकर की व्यवस्था करने की मांग की।

पवार ने कहा कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि एक जून से 15 सितंबर के बीच राज्य में 648 मिमी बारिश हुई, जो औसत से 19 प्रतिशत कम है। उन्होंने कहा कि मुंबई, रायगढ़, पालघर और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल हैं, और कुछ जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान बारिश सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम हुई।

पवार ने कहा कि विदर्भ में बुवाई का क्षेत्र जो पिछले साल अगस्त के आखिर तक लगभग 50.04 लाख हेक्टेयर था, वह इस साल घटकर लगभग 47.5 लाख हेक्टेयर रह गया है। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ‘अल नीनो’ (समुद्री धारा जिससे मॉनसून प्रभावित होता है) की घटना का असर और भी गंभीर हो सकता है और इसके प्रभाव 2027 से दिखाई दे सकते हैं। इस बीच, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पवार पर किसानों की समस्या को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि फडणवीस ने कम बारिश वाले जिलों में फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए पहले ही ‘पंचनामा’ (सर्वेक्षण)करने का आदेश दे दिया है। बावनकुले ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों, प्रभारी मंत्रियों और विधायकों को क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2017 में एक सरकारी आदेश और 2018 में एक अन्य सरकारी आदेश जारी किया था, इसलिए हमें यह तय करना होगा कि इनमें से किसका पालन किया जाए और किस राहत योजना का इस्तेमाल किया जाए तथा इसके लिए एक छोटा सा सर्वेक्षण आवश्यक है।

बावनकुले ने कहा, ‘‘अगर सर्वेक्षण ठीक से किया जाए, तो योग्य किसानों को न्याय मिलेगा। अगर हम सही तरीके से सर्वेक्षण नहीं करते और जरूरी कदम नहीं उठाते, तो इसका कोई लाभ नहीं होगा।

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1947 में सिर्फ सियासी आजादी मिली, Cultural Freedom नहीं: Rajnath Singh का बड़ा दावा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 सितंबर को पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को 1947 में राजनीतिक आज़ादी तो मिली, लेकिन सांस्कृतिक आज़ादी नहीं। उन्होंने केरल के कोच्चि में तीन दिन तक चलने वाले कार्यक्रम 'रामायण- वन एपिक मेनी स्टोरीज़: राम कथा अक्रॉस भारत एंड बियॉन्ड' (रामायण - एक महाकाव्य, कई कहानियाँ: भारत और उसके बाहर राम कथा) के उद्घाटन समारोह में यह बात कही।

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सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के विकास में न केवल आर्थिक तरक्की शामिल होनी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मज़बूत करना और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलना भी ज़रूरी है। सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का आधुनिकीकरण उसकी सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'सर्व धर्म समभाव' यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान हमेशा से हमारी सभ्यता की मूल भावना रही है। फिर भी, पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के कारण, हमारे धर्म को सांप्रदायिकता, परंपरा को पिछड़ापन, विश्वास को कट्टरता और आस्था को अंधविश्वास के रूप में पेश किया गया।

राजनाथ सिंह ने युवा पीढ़ी के बीच भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय चेतना मज़बूत होगी और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्होंने युवाओं से भारत के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी बदलाव में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक आत्मविश्वासी, सक्षम और सामाजिक रूप से समावेशी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकता है और दुनिया के भविष्य को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

राम मंदिर के निर्माण में हुई देरी का ज़िक्र करते हुए सिंह ने पूछा कि आज़ादी के बाद कहा गया था कि भारत की खोई हुई संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन भगवान राम से बेहतर भारत की आत्मा का प्रतीक कौन हो सकता है? फिर आज़ादी के सात दशक बाद भी राम मंदिर बनने में इतना समय क्यों लगा? ऐसा तुष्टीकरण की नीति के कारण हुआ। यह सोच भारतीय नज़रिए के बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत ने समय से पहले जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को हासिल करके, देश में मुफ़्त कोविड-19 टीके उपलब्ध कराकर और 100 देशों को 30 करोड़ से ज़्यादा टीके भेजकर दुनिया के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

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सिंह ने भारत के एक सभ्यतागत लीडर के तौर पर उभरने पर ज़ोर दिया। उन्होंने इसके लिए इंटरनेशनल योग डे के वैश्विक आयोजन और इंटरनेशनल सोलर अलायंस व ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस जैसी पहलों में भारत की लीडरशिप का ज़िक्र किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि दया की भावना से प्रेरित होकर सरकार ने लोगों का जीवन बेहतर बनाने के लिए काम किया है और पिछले 10 से 12 सालों में 25 करोड़ से ज़्यादा लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी डेमोक्रेसी और कल्याणकारी योजनाओं की सफलता के ज़रिए दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है।

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