जमीन से चलाया अटूट संघर्ष, झारखंड आंदोलन के पुरोधा रहे शिबू सोरेन फिर भी क्यों नहीं बन सके राज्य के पहले मुख्यमंत्री?
नई दिल्ली, 10 जनवरी (आईएएनएस)। साल 2000, आजादी के बाद बिहार के इतिहास का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट वाला साल, जब बिहार का भूगोल बदल गया और झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे जिन नामों ने सबसे अहम भूमिका निभाई, उनमें सबसे आगे खड़े नजर आते हैं शिबू सोरेन। संसद में गूंजती आदिवासियों की आवाज और जमीन पर चलता एक अटूट संघर्ष, यही झारखंड आंदोलन के पुरोधा शिबू सोरेन की पहचान थी, जिन्हें जनता ने 'दशोम गुरु' का दर्जा दिया।
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