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मेंटल हेल्थ– पिता से प्यार नहीं था:वो शराबी और अब्यूसिव थे, 34 साल उनसे दूर रहा, फिर उनकी मौत का इतना दुख क्यों हो रहा है

सवाल– मेरी उम्र 54 साल है। छह महीने पहले मेरे पापा की डेथ हुई है। पापा के साथ मेरा रिश्ता कभी भी बहुत अच्छा नहीं था। वो एल्कोहलिक थे, घर में बहुत वॉयलेंस भी था। 21 साल की उम्र में मैं पढ़ने के लिए घर से निकला और उसके बाद कभी लौटकर घर नहीं गया। मां से मेरी हमेशा बात होती थी, लेकिन इन 34 सालों में पापा को मैंने अपनी तरफ से कभी फोन नहीं किया। सिर्फ मेरी शादी या मेरे बच्चों के जन्म के मौके पर वो मां के साथ आए, लेकिन मैंने उनसे कभी बात नहीं की। मुझे लगता था कि मेरी जिंदगी में उनकी कोई इंपॉर्टेंस नहीं है। वो जिंदा रहें या न रहें, मेरी जिंदगी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन उनकी डेथ के बाद से मैं ऐसी-ऐसी चीजें फील कर रहा हूं, जो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं करूंगा। मैं हर वक्त उनके और अपने बचपन के बारे में सोचता रहता हूं। एक्चुअली मुझे उनकी याद भी आती है और एक अजीब सी पीड़ा महसूस होती है। मैं उनके बारे में सोचकर बैठे-बैठे रोने लगता हूं। मुझे पता नहीं कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। क्या आप मेरी हेल्प कर सकते हैं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका बहुत–बहुत शुक्रिया। मैं आपकी स्थिति समझ सकता हूं। एक वॉयलेंट और अब्यूसिव पिता के लिए गहरा दुख महसूस करना थोड़ा कनफ्यूजन भी पैदा कर सकता है। जब तक वे जीवित थे, उनसे कोई जुड़ाव नहीं था। और अब जब वो नहीं हैं तो उनका ख्याल आता है, याद आती है और गहरा दुख भी महसूस होता है। मन के लिए यह अंतर्विरोध परेशान करने वाला हो सकता है। लेकिन आगे बढ़ने से पहले यहां मैं आपको एक बार रीअश्योर करना चाहता हूं कि आप जो महसूस कर रहे हैं, वो बहुत स्वाभाविक है। इसमें कुछ भी अबनॉर्मल नहीं है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसे मैं आगे एक्सप्लेन करने की कोशिश करूंगा। दुख क्यों महसूस हो रहा है? नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सेलेंस (NICE) और रॉयल कॉलेज ऑफ साइकेट्रिस्ट्स (RCPsych) की रिसर्च और गाइडलाइंस बताती हैं कि दुख हमेशा सिर्फ उस व्यक्ति या रिश्ते के लिए नहीं होता, जिससे हम प्यार करते हैं। कई बार यह दुख उस रिश्ते के लिए भी होता है, जो हमें कभी मिला ही नहीं। पिता का जाना एक तरह से उस उम्मीद और संभावना का भी चले जाना है कि शायद एक दिन दोनों के बीच चीजें बेहतर हो जाएंगी। किसी भी इंसान की जिंदगी में पेरेंट्स प्राइमरी केयरगिवर होते हैं। पेरेंट्स के साथ हमारा रिश्ता जीवन का पहला रिश्ता होता है, जो हमें आकार देता है। एडल्ट होने के बाद हम जीवन में ढेरों रिश्ते चुनते और बनाते हैं, लेकिन उस पहले रिश्ते की छाप जीवन पर हमेशा रहती है। पिता से आपको जो मिला, वो एक चीज है। लेकिन एक बच्चे के रूप में पिता से आपकी जरूरतें बहुत बुनियादी और अनिवार्य थीं। पिता जिन्हें प्यार और सुरक्षा होना था, वो डर, संदेह, अकेलेपन का सबब हो गए। आपके भीतर का बच्चा आज भी उस दुख, डर, जरूरत और निराशा को जानता है, जो उसे बचपन में पिता से मिली थी। पिता के जाने पर बचपन के वे इमोशंस एक बार फिर सतह पर उभर आए हैं। रिश्ते जो पूरी तरह जी नहीं पाए कई मनोवैज्ञानिक शोध ये बताते हैं कि हम जिन रिश्तों को पूरी तरह जी नहीं पाते, महसूस नहीं कर पाते, उनके खत्म होने का दुख ज्यादा गहरा होता है। जिन बच्चों का अपने माता–पिता के साथ सुंदर और नरचरिंग रिश्ता नहीं होता, उनके लिए पेरेंट्स को खोना ज्यादा तकलीफदेह अनुभव होता है। वहीं जो बच्चे पेरेंट्स के साथ एक फुलफिलिंग और नरचरिंग रिश्ता जीते हैं, उनके लिए बुढ़ापे में माता–पिता की मृत्यु एक गहरा दुख और सदमा लेकर नहीं आती। वह ज्यादा सहजता से इस बात को स्वीकार कर पाते हैं। दुख महसूस करने के संभावित कारण आप जो महसूस कर रहे हैं, वह सिर्फ पिता का नहीं, बल्कि बेहतरी की एक आखिरी उम्मीद या यूं कहें कि फैंटेसी का भी चले जाना है। लेकिन पिता की मृत्यु के साथ-साथ अब ये उस तकलीफदेह कहानी का आखिरी क्लोजर है। बचपन का ट्रॉमा है, जो आखिरी समय तक भी रिजॉल्व नहीं हो पाया है। बुरे से बुरे पिता के साथ की भी कुछ अच्छी और सुंदर यादें तो होती ही हैं। ये उन यादों का भी क्लोजर है। आप जो दुख और पीड़ा महसूस कर रहे हैं, वो आपकी कमजोरी नहीं है। वो ऐसी स्थिति में होने वाली एक बहुत सहज और स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। ये दुख एडल्ट का नहीं, बच्चे का है आपका दुख एक वयस्क प्रौढ़ समझदार व्यक्ति का दुख नहीं है। ये उस छोटे बच्चे का दुख है, जिसे पिता का प्यार और दुलार नहीं मिला। इसलिए दुख महसूस हो रहा है तो उसे डूबकर महसूस करें। रोना आ रहा है तो खुद को रोने से रोकें नहीं। इसे अपनी कमजोरी न समझें। बस खुद को ये चंद बातें जरूर याद दिलाएं– ऑब्जेक्टिव रिलेशंस: कुछ भी सिर्फ अच्छा या बुरा नहीं होता मनोविज्ञान की साइकोडाइनैमिक और ऑब्जेक्ट रिलेशन थियरी इस बात पर जोर देती है कि प्राइमरी केयरगिवर्स को कभी भी पूरी तरह से अच्छा या पूरी तरह से बुरा नहीं माना जाता। वे हमारे भीतर कई रूपों में मौजूद होते हैं। 1) अच्छी बातें जैसेकि बचपन के वे क्षण, जब हमें प्यार और सुकून मिला। तारीफ और सुरक्षा मिली (भले ही वह क्षणिक या अनियमित हो।) 2) बुरी बातें जैसेकि पिता की हिंसा और उनकी शराब की लत। उनका इमोशनली एबसेंट होना और बच्चे की उपेक्षा करना। जब किसी की मृत्यु होती है, तो वो दोनों छवियां एक-दूसरे के करीब आ जाती हैं। हो सकता है कि आप बुरे पिता को रिजेक्ट कर दें, लेकिन अच्छे पिता को याद करें। या उस काल्पनिक पिता को, जो आप चाहते थे कि वो होते। अच्छी और बुरी यादों का ये घालमेल इमोशनल कनफ्यूजन और गिल्ट पैदा कर सकता है। दुख महसूस करने का मतलब ये नहीं है कि आप उनके बुरे पहलुओं को स्वीकार कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि आप उस व्यक्ति के जटिल व्यक्तित्व और उसके द्वारा आपके भीतर छोड़ी गई जटिल भावनात्मक दुनिया के लिए शोक मना रहे हैं। यह एक हेल्दी प्रोसेस है। हमारा मनोविज्ञान ऐसे ही काम करता है। अब्यूसिव पेरेंट्स की मृत्यु पर शोक मनाना कठिन क्यों? इन स्थितियों में शोक की भावना ज्यादा तकलीफदेह और कनफ्यूजन पैदा करने वाली इसलिए भी होती है क्योंकि अब इस समस्या का कोई समाधान नहीं है। आप उनसे ये कभी नहीं कह पाए कि- अब किसी तरह की माफी की, बेहतरी की, दुख को समझे जाने की उम्मीद और जगह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ये सारी भावनाएं मिलकर एक कनफ्यूजन की स्थिति पैदा करती हैं। हर पीड़ा को अभिव्यक्ति की, गलती को माफी की, गलतफहमियों को सुलझाए जाने की जरूरत होती है। लेकिन आपकी स्थिति में वो सारी जरूरतें अधूरी रह गई हैं। कहानी एक प्रॉपर हैपी एडिंग के बिना ही खत्म हो गई है। अब दुख को प्रोसेस कैसे करें आप जो भी महसूस कर रहे हैं, वो स्थाई नहीं है। वक्त के साथ यह स्थिति बेहतर हो जाएगी। लेकिन अभी जो दुख है, उसे दबाएं नहीं। वो सारी बातें कहें, जो आप अपने पिता से सीधे नहीं कह पाए। जानी–मानी लेखिक ईव इंसलर की एक किताब है– ‘द अपोलॉजी।’ यह पिता की तरफ से बेटी को लिखा एक लंबा माफीनामा है। लेकिन ट्विस्ट ये है कि ये किताब पिता ने नहीं, बल्कि खुद ईव इंसलर ने लिखी है। इस किताब में उन्होंने वो सारी बातें कह दीं, जो वो सीधे अपने पिता से नहीं कह पाईं। किताब लिखना जरूरी नहीं, लेकिन अपने मन की बातों को एक्सप्रेस करना जरूरी है। आप डायरी लिखें या पिता को एक लंबा खत। भेजने के लिए नहीं, सिर्फ अपने दिल के सुकून के लिए। प्रोफेशनल हेल्प लेना कब जरूरी? यूं तो यह स्थिति कुछ वक्त में अपने आप बेहतर हो जाएगी, लेकिन अगर दुख और अवसाद की स्थिति छह महीने से ज्यादा बनी रहे और रोजमर्रा की फंक्शनिंग में दिक्कतें आएं तो आपको प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– निष्कर्ष आप उस व्यक्ति के लिए शोक नहीं मना रहे हैं, जिसने नुकसान पहुंचाया है। आप उस पिता के लिए शोक मना रहे हैं, जिसकी आपको बहुत कामना थी। यह दुख, यह शोक स्वाभाविक है। शोक मनाना जरूरी है। दुख में डूबकर ही दुख से उबरा जा सकता है। इसलिए अपने दुख को लेकर किसी तरह का कनफ्यूजन या गिल्ट मत महसूस करिए। जीवन के एक अध्याय का यहां अंत होता है, लेकिन जीवन अभी बाकी है। ……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– मुझे आलोचना बर्दाश्त नहीं होती: कोई मेरी कमी निकाले, मेरी गलती बताए तो मैं दोस्ती तोड़ लेती हूं, खुद को कैसे बदलूं ये एक प्रेडिक्टेबल पैटर्न है, जिसका संबंध हमारे बचपन के अनुभवों से है। अगर हमारी परवरिश एक ऐसे माहौल में हुई, जहां गलती करना एक्सेप्टेबल नहीं था, मामूली सी कमी पर भी बहुत डांट पड़ती या नेगेटिव तरीके से आलोचना की जाती थी तो इसका प्रभाव हमारे एडल्ट बिहेवियर में भी दिखाई देगा। आगे पढ़िए...

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सड़क पर खेलती बच्ची पर कुत्ते का हमला | #viralvideo #dogattack #streetdog #shorts

सड़क पर खेलती बच्ची पर कुत्ते का हमला | #viralvideo #dogattack #streetdog #shorts News18 India को Google पर फॉलो करे- https://news18.co/n18ig न्यूज़18 इंडिया भारत का नंबर 1 न्यूज चैनल है। जो 24 घंटे आप तक देश और दुनिया की हर खबर पहुँचाता है। राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल के साथ साथ आप तक वो हर खबर हम पहुँचाते हैं जो आपके लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए बने रहें हमारे साथ और सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल #News18IndiaNumber1 News18 India is India's No.1 hindi News Channel. We bring you the latest, most relevant and the news that concerns you from all over the world. Politics, Entertainment, Bollywood, OTT, Sports, News to Use, Technology, all the news that is important for you to know, we bring you that. Be with us as News18India viewer and subscribe our YouTube channel #News18IndiaNumber1 Subscribe our channel for the latest news updates: https://www.youtube.com/@news18India Like us: https://www.facebook.com/News18India/ Follow us: https://twitter.com/News18India News18 Mobile App https://onelink.to/desc-youtube Website https://hindi.news18.com/

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