MNREGA बचाओ प्रदर्शनकारियों पर ‘बर्बर लाठी चार्ज’ के लिये कांग्रेस ने उप्र सरकार की आलोचना की
कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में “योगी-मोदी की ट्रबल इंजन” सरकार ने पुलिस को वाराणसी में पार्टी के राष्ट्रव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे एनएसयूआई प्रदर्शनकारियों पर “क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज” करने का आदेश दिया।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक वीडियो क्लिप साझा की जिसमें पुलिस को कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को धक्का देते और उनके खिलाफ बल प्रयोग करते हुए देखा जा सकता है।
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मेरे युवा साथी वरुण चौधरी के नेतृत्व में छात्रों ने मनरेगा बचाओ संग्राम मार्च निकाला।
रमेश ने आरोप लगाया, “यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकारों के तहत किया गया लोकतांत्रिक प्रदर्शन था, लेकिन योगी-मोदी की ट्रबल-इंजन सरकार को सवालों से इतनी घबराहट है कि उसने पुलिस के जरिये बेरहमी से लाठीचार्ज करा दिया।” नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) कांग्रेस की छात्र शाखा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधा।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मनरेगा को खत्म करके करोड़ों मजदूरों से रोजगार का अधिकार छीनने के खिलाफ वाराणसी में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे एनएसयूअर् छात्रों पर बर्बरतापूर्ण बल प्रयोग एवं गिरफ्तारी अत्यंत निंदनीय है। हम कड़े शब्दों में इस कायरतापूर्ण कार्रवाई की निंदा करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी सरकार करोड़ों मजदूरों से रोजगार का कानूनी अधिकार छीन रही है और आवाज उठाने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का हर एक कार्यकर्ता इस अन्याय, अत्याचार और दमन के खिलाफ डटकर खड़ा है।’’
शनिवार को कांग्रेस ने संप्रग काल के ग्रामीण रोजगार कानून को निरस्त करने के विरोध में अपना 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान - मनरेगा बचाओ संग्राम - शुरू किया और हर जिले में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया।
विपक्षी दलों द्वारा वीबी-जी राम जी अधिनियम को वापस लेने और ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को उसके मूल स्वरूप में एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने, काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को बहाल करने की मांग को लेकर किया जा रहा आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा।
Kokrajhar में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से दुष्कर्म के विरोध में बंद
असम के कोकराझार जिले में मानसिक रूप से दिव्यांग महिला से कथित दुष्कर्म के विरोध में रविवार को बुलाए गए बंद के कारण जनजीवन प्रभावित रहा। शनिवार को पत्थरघाट इलाके में हुई इस घटना के कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि धुबरी जिले का रहने वाला आरोपी उस समय पुलिस की गोलीबारी में घायल हो गया, जब उसने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर कथित तौर पर भागने की कोशिश की। विश्व हिंदू महासंघ (डब्ल्यूएचएफ) द्वारा बुलाए गए इस बंद के दौरान बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे।
सार्वजनिक वाहन भी सड़कों से दूर रहे। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। साथ ही, किसी भी संदिग्ध सूचना की जानकारी जिला नियंत्रण कक्ष को देने को कहा गया है।
जिलाधिकारी पंकज चक्रवर्ती और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अक्षत गर्ग ने शांति सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ बैठक की। चक्रवर्ती ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में व्याप्त तनाव को देखते हुए आरोपी को सेफ जोन (सुरक्षित स्थान) में रखा गया था, जहां से अदालत ले जाते समय उसने भागने का प्रयास किया। आरोपी को कोकराझार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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