कुछ ही घंटों में बाजार का मार्केट कैप 9 लाख करोड़ रुपये तक घटा, शेयर बाजार में मचा हड़कंप
कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट से निवेशकों में हड़कंप देखने को मिला. कुछ ही घंटों में बाजार का मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपये तक घट गया. आखिर ऐसी क्या वजह रही कि शेयर बाजार में अचानक बिकवाली हावी हो गई? भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान अचानक भारी गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार खुलने के बाद कुछ वक्त तक हालात सामान्य रहे, मगर बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ गया. इसका असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में दिखाई दिया. गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में कुछ ही घंटों के अंदर करीब 9 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. बाजार में यह गिरावट लगभग 330 मिनट के कारोबारी सत्र में देखने को मिली.
अचानक क्यों मची भगदड़?
शेयर बाजार में तेज गिरावट के पीछे आमतौर पर किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की चाल, कच्चे तेल के दाम और अमेरिका से जुड़े आर्थिक संकेतक बाजार के सेंटीमेंट पर असर डालते हैं. मंगलवार की गिरावट में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों पर रही. विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय बाजार में ऊंचे स्तरों पर मुनाफा वसूली शुरू हुई. जैसे-जैसे बिकवाली बढ़ी, बाजार में गिरावट और तेज होती गई.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बनाया दबाव
भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं. जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बाजार बेचते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ता है. हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों के रुख को लेकर बाजार में पहले से ही चिंता बनी थी. ऐसे में बिकवाली बढ़ने पर घरेलू निवेशकों में घबराहट देखी गई.
बैंकिंग और बड़े शेयरों पर असर
गिरावट के दौरान बाजार के प्रमुख और बड़े मार्केट कैप वाले शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. बैंकिंग, वित्तीय और अन्य प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी का सीधा असर इंडेक्स पर पड़ा. बाजार में जब सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आती है तो इसका असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी दिखाई देता है. खासकर उन निवेशकों को अधिक नुकसान महसूस होता है जिनका निवेश बड़ी कंपनियों के शेयरों में होता है.
नौ लाख करोड़ का नुकसान कैसे हुआ?
इस 'नुकसान' का अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों के बैंक खातों से सीधे 9 लाख करोड़ रुपये निकल गए. बाजार पूंजीकरण में गिरावट का अर्थ है कि शेयरों की बाजार में दाम घटने से कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यू कम हो गया. उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के शेयर की कीमत अगर गिरती है तो उसके सभी बकाया शेयरों की कुल बाजार कीमत भी घटती है. इस तरह से जब बाजार की बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आती है तो पूरे बाजार के मार्केट कैप में हजारों करोड़ रुपये की कमी हो जाती है.
आगे बाजार की नजर किन चीजों पर?
अब निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों की दिशा, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर रहने वाली है. इसके साथ कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा पर असर डालती हैं. शेयर बाजार में अचानक आई गिरावट यह तय करती है कि तेज उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों के लिए सिर्फ इंडेक्स की चाल देखना पर्याप्त नहीं है. किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है.
Emergency Apps: मुसीबत के 3 साथी, बिना बटन दबाए भी मांग सकते हैं मदद; मोबाइल में हैं ये ऐप?
स्मार्टफोन में मौजूद ऐप्स सिर्फ मनोरंजन और रोजमर्रा के काम के लिए नहीं होते। कुछ ऐप ऐसे भी हैं, जो इमरजेंसी में आपकी या किसी दूसरे व्यक्ति की जान बचाने में मदद कर सकते हैं। पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड से लेकर प्राकृतिक आपदा की चेतावनी तक, ऐसे कई ऐप आपके फोन में जरूर होने चाहिए।
आज लगभग हर उम्र के व्यक्ति के स्मार्टफोन में कई तरह के ऐप मौजूद हैं। सोशल मीडिया, शॉपिंग, मनोरंजन और दूसरे कामों के लिए हम अलग-अलग ऐप डाउनलोड करते हैं। लेकिन क्या आपके फोन में कोई ऐसा ऐप है, जो अचानक मुसीबत आने पर आपके काम आ सके?
हाल ही दिल्ली में एक महिला अधिवक्ता के साथ हुई घटना ने इस सवाल को और महत्वपूर्ण बना दिया। घर पर अकेली महिला की अचानक तबीयत बिगड़ गई। वह मदद के लिए दिल्ली पुलिस के ‘से-हेल्प’ ऐप का इस्तेमाल करने में सफल रहीं। अलर्ट मिलने के बाद पुलिस टीम एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के साथ उनके घर पहुंची और समय पर मदद मिलने से उनकी जान बच गई।
ऐसी स्थिति कभी भी किसी के सामने आ सकती है। इसलिए अपने फोन में मौजूद जरूरी Emergency Apps की जानकारी रखना और उन्हें इस्तेमाल करना सीखना बेहद उपयोगी हो सकता है।
1. Delhi Police का ‘से-हेल्प’ ऐप
दिल्ली पुलिस का ‘से-हेल्प’ ऐप महिलाओं, बुजुर्गों और आम लोगों को आपात स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है।
इस ऐप की खासियत इसका वॉयस-एक्टिवेटेड फीचर है। यानी संकट की स्थिति में यूजर को मदद मांगने के लिए जरूरी नहीं कि फोन पर कोई बटन दबाना पड़े या नंबर डायल करना पड़े।
अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में है, जहां वह फोन इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं है, तो आवाज के जरिए मदद मांगी जा सकती है। ऐप को सक्रिय करने के लिए ‘Help Help Help’ बोलने जैसी सुविधा इसे सामान्य हेल्पलाइन से अलग बनाती है।
क्यों है उपयोगी?
मान लीजिए कोई व्यक्ति घर में अकेला है और अचानक उसकी तबीयत बिगड़ जाती है। वह फोन उठाकर नंबर डायल करने या स्क्रीन पर बटन दबाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे समय में वॉयस कमांड के जरिए मदद मांगने की सुविधा काफी उपयोगी हो सकती है।
दिल्ली की महिला अधिवक्ता के मामले में भी ऐप से मिले अलर्ट के बाद संबंधित थाना प्रभारी स्टाफ, एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार के सामान के साथ मौके पर पहुंचे।
2. 112 India App: पुलिस, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए
इमरजेंसी की स्थिति में 112 India एक महत्वपूर्ण सरकारी सेवा है। इसका उद्देश्य पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत तरीके से उपलब्ध कराना है।
किसी संकट की स्थिति में 112 से मदद मांगी जा सकती है। ऐप के जरिए यूजर की लोकेशन जैसी जानकारी का इस्तेमाल संबंधित आपातकालीन सहायता तक पहुंच बनाने के लिए किया जाता है।
इसमें महिलाओं और बच्चों की तत्काल सहायता के लिए ‘SHOUT’ सुविधा भी दी गई है। इस फीचर के जरिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर तक अलर्ट पहुंचाया जा सकता है और आसपास मौजूद रजिस्टर्ड वॉलिंटियर्स से भी सहायता मिलने की व्यवस्था है।
कब काम आ सकता है 112 India?
- सड़क हादसे की स्थिति में
- मेडिकल इमरजेंसी में
- किसी सुरक्षा संबंधी खतरे में
- आग लगने की स्थिति में
- महिलाओं या बच्चों को तत्काल मदद की जरूरत होने पर
ऐसी स्थिति में फोन में इस सेवा की जानकारी पहले से होना उपयोगी हो सकता है।
3. ‘सचेत’ ऐप: आपदा से पहले मिलेगी चेतावनी
इमरजेंसी का मतलब सिर्फ अपराध या मेडिकल समस्या नहीं है। प्राकृतिक आपदा और खराब मौसम भी अचानक बड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA का ‘सचेत’ ऐप लोगों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से जुड़ी चेतावनियों के बारे में जानकारी देने के लिए उपयोगी है।
ऐसे अलर्ट लोगों को संभावित खतरे के बारे में पहले से सतर्क करने में मदद कर सकते हैं। खासकर बाढ़, चक्रवात, भूकंप और दूसरे प्राकृतिक खतरों की आशंका वाले क्षेत्रों में समय पर जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
सिर्फ ऐप डाउनलोड करना काफी नहीं
फोन में Emergency App डाउनलोड करके छोड़ देना पर्याप्त नहीं है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर उसे कैसे इस्तेमाल करना है।
किसी ऐप को पहली बार इमरजेंसी के दौरान समझने की कोशिश करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सामान्य समय में ही उसके जरूरी फीचर्स देख लें। जरूरत के अनुसार जरूरी परमिशन, लोकेशन और अन्य सेटिंग्स को भी समझना चाहिए।
साथ ही फोन में बहुत सारे ऐसे ऐप रखने से बचें, जिनका इस्तेमाल आप लंबे समय से नहीं कर रहे हैं। इससे फोन का स्टोरेज खाली रखने के साथ जरूरी ऐप को आसानी से खोजने में भी मदद मिलती है।
अपने फोन में इन ऐप्स की जानकारी जरूर रखें
इमरजेंसी की स्थिति में कुछ सेकंड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ सोशल मीडिया और मनोरंजन से जुड़े ऐप्स पर निर्भर रहने के बजाय अपने फोन में जरूरी Safety और Emergency Apps की जानकारी रखना समझदारी है।
112 India जैसी इमरजेंसी सेवा, दिल्ली पुलिस का से-हेल्प और NDMA का सचेत ऐप अलग-अलग तरह की परिस्थितियों में उपयोगी हो सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि इन सेवाओं की जानकारी सिर्फ अपने तक सीमित न रखें। परिवार के सदस्यों, बुजुर्गों और बच्चों को भी बताएं कि इमरजेंसी में किस तरह मदद मांगी जा सकती है। आपकी यह छोटी-सी तैयारी किसी मुश्किल समय में बड़ी मदद साबित हो सकती है।
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