Bangladesh International Crimes Tribunal ने Awami League के 7 वरिष्ठ नेताओं को सुनाई मौत की सजा
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण-2 ने प्रतिबंधित अवामी लीग के उन सात वरिष्ठ नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मंगलवार को मौत की सजा सुनाई, जिन पर 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन (जुलाई विद्रोह) के दौरान हिंसा भड़काने या उसे बढ़ावा देने का आरोप है। न्यायमूर्ति मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय अधिकरण-2 ने इन सात नेताओं के खिलाफ फैसला सुनाया। इन लोगों की अनुपस्थिति में यह मुकदमा चलाया गया था।
अधिकरण ने जिन लोगों को मौत की सजा सुनाई है, उनमें अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादिर, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं। अन्य चार में -- जुबो लीग के चेयरमैन शेख फजले शम्स पराश, इसके महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष सद्दाम हुसैन और इसके महासचिव शेख वली आसिफ एनन -- शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाए जाने के लगभग 10 महीने बाद, 2024 के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अधिकरण ने अपना फैसला सुनाया।
इन सभी सात लोगों का पक्ष सरकार द्वारा नियुक्त बचाव पक्ष के वकीलों ने रखा। अधिकरण ने 22 जनवरी को आरोपियों के खिलाफ सात आरोप तय किए थे, जबकि मुकदमे की सुनवाई 17 फरवरी को शुरू हुई थी। अधिकरण-2 ने इन सात लोगों पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने या उसे निर्देशित करने में कथित भूमिका के लिए मुकदमा चलाया।
इस विरोध प्रदर्शन के कारण पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार गिर गई थी। सरकारी वकीलों ने इन सात लोगों पर आरोप लगाया कि उन्होंने निर्देश जारी करके, भड़काऊ और उकसाने वाले बयान देकर और हिंसा की साजिश रचने से जुड़ी बैठकें करके प्रदर्शनकारियों का दमन करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी अलग-अलग जगहों पर हथियारों से हमले, दमनात्मक कार्रवाई और मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशों में शामिल थे, जिससे देश भर में हत्याएं, हत्या की कोशिशें और व्यापक स्तर पर हिंसा हुई।
हसीना पांच अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत चली आई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय का अनुमान है कि 15 जुलाई से पांच अगस्त 2024 के बीच विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी हिंसा में 1,400 लोग मारे गए।
नगर निगम के खिलाफ ABVP ने खोला मोर्चा, इंदौर में DAVV के मुख्य द्वार पर दिया धरना
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् यानि ABVP ने आज मंगलवार को नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए DAVV यानि देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया और धरना दिया, विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता बसों के किराये में वृद्धि को वापस लेने, गेट के सामने टूटे स्पीड ब्रेकर सही कराने, गर्ल्स हॉस्टल के पास की रोड पर कैमरा और लाइट की व्यवस्था की मांग कर रहे थे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के छात्र नेता आज इकट्ठा होकर देवी अहिल्या बाई विश्वविद्यालय के खंडवा रोड स्थित मुख्य परिसर के बाहर पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की, उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों पर उनकी मांगों की अनदेखी करने के आरोप लगाये, प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा हम तब तक नहीं उठेंगे जब तक निगम अधिकारी यहाँ आकर कोई ठोस आश्वासन नहीं देते।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
एबीवीपी के महानगर मंत्री देवेश गुर्जर ने कहा हम एक साल पहले भी निगम कमिश्नर को ज्ञापन दे चुके और विद्यार्थियों की समस्या बता चुके लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ, आज भी छात्र परेशान हैं इसलिए अब प्रदर्शन कर रहे हैं उन्होंने चतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगें नहीं मानी गई तो फिर कोई बड़ा कदम विद्यार्थी परिषद् उठाएगी।
ABVP की प्रमुख मांगें
- छात्र नेताओं ने मांगें बताते हुए कहा कि पहले बस पास का किराया 200 रुपये था जिसे बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया गया है इसे वापस लिया जाये।
- स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के पास सिटी बस स्टॉप बने अजय अभी बस एक किलोमीटर दूर उतार देती है जिससे पैदल चलकर विद्यार्थी को जाना पड़ता है।
- DAVV सहित सभी कॉलेजों के गेट के बाहर लगे स्पीड ब्रेकर टूट चुके हैं जिससे विद्यार्थी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं इन्हें सही कराया जाये।
- गर्ल्स होस्टल के पास वाली सड़क पर कैमर और लाईट की व्यवस्था की जाए क्योंकि अँधेरा होने से असुविधा होती है लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं।
शकील अंसारी की रिपोर्ट
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi
Mp Breaking News










