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IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, 13 साल की सेवा के बाद अब किस राह पर बढ़ेंगी?

उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की प्रशासनिक सेवा की 13 साल लंबी यात्रा अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई है. केंद्र सरकार ने उनके स्वैच्छिक इस्तीफे को मंजूरी दे दी है और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है. दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को निजी कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था.

इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कवि जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ की पंक्ति साझा की 'प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो.' इस पोस्ट को उनके जीवन के अगले पड़ाव की ओर बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

वैष्णो देवी पहुंचकर मांगा आशीर्वाद

इस्तीफा मंजूर होने से कुछ दिन पहले दिव्या मित्तल माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंची थीं. वहां से उन्होंने अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, 'आगे की राह कठिन है... सदबुद्धि देना मां.'

उनकी इस पोस्ट ने उनके अगले कदम को लेकर चर्चा और तेज कर दी थी. हालांकि, फिलहाल उन्होंने अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है.

IIT-IIM के बाद लंदन की नौकरी छोड़ी

दिव्या मित्तल की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने प्रतिष्ठित कॉरपोरेट करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना था. हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की.

विदेश में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने भारत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IPS हासिल किया. गुजरात कैडर मिलने के बाद भी उन्होंने IAS बनने का लक्ष्य नहीं छोड़ा और अगले ही वर्ष 2013 में IAS में चयनित हुईं.

मिर्जापुर से देवरिया तक बनी अलग पहचान

उत्तर प्रदेश कैडर में आने के बाद दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक पदों पर काम किया और कई जिलों में जिम्मेदारी संभाली. वह मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं.

मिर्जापुर में उनके कार्यकाल का एक काम विशेष रूप से चर्चा में रहा. लहुरिया दह के पहाड़ी क्षेत्र में ग्रामीण लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे थे. दिव्या मित्तल के प्रयासों से वहां पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया गया. बाद में उन्होंने अपने इस्तीफे के भावुक संदेश में इस अनुभव को भी याद किया.

देवरिया से लखनऊ तबादले के बाद बढ़ी चर्चा

मई 2026 में दिव्या मित्तल को देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया था. इसके कुछ महीनों बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने का फैसला किया. उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने आधिकारिक तौर पर निजी और पारिवारिक कारणों को ही वजह बताया है.

पति भी छोड़ चुके हैं सरकारी नौकरी

दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भी सरकारी सेवा में रह चुके हैं. उन्होंने भारतीय व्यापार सेवा में काम किया और 2022 में नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू किया.

दोनों की मुलाकात लंदन में हुई थी. दोनों ने प्रेम विवाह किया और बाद में भारत लौटकर अपने-अपने करियर की नई दिशा चुनी.

अब क्या करेंगी दिव्या मित्तल?

IAS से इस्तीफा देने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिव्या मित्तल अब किस क्षेत्र में कदम रखेंगी. राजनीति में आने को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन उन्होंने अभी भविष्य की योजना स्पष्ट नहीं की है.

फिलहाल इतना जरूर है कि एक प्रतिष्ठित कॉरपोरेट करियर छोड़कर UPSC और फिर IAS तक पहुंचने वाली दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा को भी अपनी इच्छा से अलविदा कहा है. उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में जिस “नई राह” की बात दिखाई देती है, वह आने वाले समय में उनके करियर की नई दिशा तय कर सकती है.

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PM आवास पर विजय शर्मा VS भूपेश बघेल : रायपुर प्रेस क्लब में हो रही महाबहस, देखिए LIVE

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में PM आवास योजना को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही बयानबाजी अब आमने-सामने की बहस तक पहुंच गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने बहस हो रही है। 

विजय शर्मा ने दी थी खुली बहस की चुनौती
PM आवास योजना को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर सवाल उठाती रही है। वहीं, भाजपा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में 18 लाख PM आवास बनाने का ऐलान किया था। इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार पर लगातार आरोप लगाते रहे हैं। पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल को PM आवास के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि वे इस मुद्दे पर भूपेश बघेल से कहीं भी चर्चा के लिए तैयार हैं। बहस का मंच और विषय तय करने की जिम्मेदारी उन्होंने प्रेस क्लब पर छोड़ दी थी।

भूपेश बघेल ने स्वीकार की चुनौती
विजय शर्मा की चुनौती को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा था कि 15 सितंबर को रायपुर प्रेस क्लब में PM आवास के मुद्दे पर बहस के लिए वे तैयार हैं। बघेल ने यह भी कहा कि वे ही नहीं, बल्कि सभी कांग्रेसी इस बहस के लिए तैयार हैं। अब दोनों नेताओं के प्रेस क्लब पहुंचने के साथ ही यह सियासी मुद्दा सीधे आमने-सामने की बहस में बदलने जा रहा है। विजय शर्मा ने जारी किए PM आवास के आंकड़े
बहस से पहले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की ओर से PM आवास योजना से जुड़े आंकड़े जारी किए गए हैं। जारी दस्तावेज के अनुसार, 18 लाख आवासों के लक्ष्य से जुड़े विभिन्न घटकों में कुल 18,12,742 आवास शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, नई सरकार के गठन के बाद 13,17,352 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 11,51,431 आवास पूर्ण हो चुके हैं।

अधूरे आवासों को लेकर भी दिए आंकड़े
दस्तावेज के अनुसार, वर्ष 2016 से 2023 तक शेष बचे अधूरे आवासों की संख्या 2,46,215 थी। इनमें से 1,95,441 आवास पूर्ण किए गए हैं। वहीं, स्थायी प्रतीक्षा सूची में शामिल परिवारों के लिए 6,99,438 आवास का विवरण दिया गया है। इनमें से 5,86,788 आवास नई सरकार के गठन के बाद स्वीकृत हुए और 4,69,782 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। इसके अलावा दस्तावेज में आवास प्लस के तहत 8,19,999 परिवार और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 47,090 आवास का भी उल्लेख किया गया है।

प्रेस क्लब में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दोनों नेताओं के आमने-सामने होने को लेकर रायपुर प्रेस क्लब में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रेस क्लब परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा आसपास के क्षेत्र में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। आज होने वाली बहस में दोनों पक्ष PM आवास योजना से जुड़े अपने-अपने आंकड़े और दावे सामने रख सकते हैं। ऐसे में बहस के दौरान किसके आंकड़े भारी पड़ते हैं और दोनों नेता एक-दूसरे के आरोपों का किस तरह जवाब देते हैं, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी।

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F1 के लिए भारत ने खोला दरवाजा, 2028 में Grand Prix की वापसी पर सरकार का बड़ा प्लान

भारत में फॉर्मूला वन की वापसी की उम्मीद फिर जगी है. भारत में आखिरी F1 रेस 27 अक्टूबर 2013 को ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में हुई थी. केंद्र सरकार ने मोटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और F1 को दोबारा भारत लाने के लिए नीति आयोग की अध्यक्षता में करीब 10 सदस्यीय टास्क फोर्स बनाई है. युगल किशोर जोशी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है. Tue, 15 Sep 2026 18:48:23 +0530

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