मन अशांत और नींद से हैं परेशान; भ्रामरी प्राणायाम है रामबाण, जानें करने का सही तरीका
नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लगातार तनाव के बीच मन की शांति सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में कई योगासन और प्राणायम हैं जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, उन्हीं में से एक है भ्रामरी प्राणायम। इसको करने से मन शांत, तनाव दूर और एकाग्रता बढ़ती है।
भ्रामरी का अर्थ है भौंरा, और इस प्राणायाम को करते समय निकलने वाली ध्वनि ठीक-भौंरे की गुंजन जैसी होती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया है। अगर किसी भी व्यक्ति को नींद की कमी, मन शांत या छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है, उनके लिए भ्रामरी प्राणायम किसी भी रामबाण से कम नहीं है। सिर्फ 2 मिनट का यह अभ्यास आपके दिमाग को कैसे शांत करने में मदद करता है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, भ्रामरी प्राणायाम दिमाग शांत करने में मदद करता है। तनाव कम होता है, गुस्सा कंट्रोल में रहता है, और मन की बेचैनी भी धीरे-धीरे दूर होने लगती है। इसके नियमित अभ्यास से दिमाग और नसों को आराम मिलता है, जिससे सोचने-समझने की ताकत भी बढ़ती है।
प्राणायाम योग शास्त्र में श्वास-प्रश्वास (भ्रामरी) को नियंत्रित और विस्तारित करने की एक प्राचीन प्रक्रिया बताया गया है। यह शब्द दो हिस्सों से मिलकर बना है, प्राण (जीवन शक्ति या ऊर्जा) और आयाम (विस्तार या नियंत्रण)। इसका अर्थ है शरीर में प्राण-शक्ति का प्रसार करना। महर्षि पतंजलि के योग दर्शन में इसे अष्टांग योग का चौथा चरण बताया गया है। इसे करने से ध्यान केंद्रित करने की ताकत बढ़ती है। खासतौर पर बच्चों और छात्रों के लिए यह बहुत फायदेमंद है। इससे याद रखने की शक्ति भी बेहतर होती है।
भ्रामरी प्राणायाम एक सरल और प्रभावी तकनीक है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मन को शांति और शरीर को राहत देती है। हालांकि, एक्सपर्ट भ्रामरी प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियां बरतने की भी सलाह देते हैं। इसे खाली पेट या भोजन के कुछ घंटों बाद करें। कान या साइनस के गंभीर रोगों से पीड़ित लोग इसे न करें। गर्भवती महिलाएं और हृदय रोग से ग्रसित लोगों को सलाह लेने के बाद ही करना चाहिए। गुनगुनाहट की ध्वनि को जबरदस्ती न बढ़ाएं, इसे सहज रखें। यदि चक्कर या असुविधा महसूस हो, तो अभ्यास रोक दें।
--आईएएनएस
एनएस/पीएम
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IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा मंजूर, 13 साल की सेवा के बाद अब किस राह पर बढ़ेंगी?
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की प्रशासनिक सेवा की 13 साल लंबी यात्रा अब आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई है. केंद्र सरकार ने उनके स्वैच्छिक इस्तीफे को मंजूरी दे दी है और यह 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है. दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को निजी कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था.
इस्तीफा मंजूर होने के बाद दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कवि जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध नाटक ‘चंद्रगुप्त’ की पंक्ति साझा की 'प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो.' इस पोस्ट को उनके जीवन के अगले पड़ाव की ओर बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
वैष्णो देवी पहुंचकर मांगा आशीर्वाद
इस्तीफा मंजूर होने से कुछ दिन पहले दिव्या मित्तल माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पहुंची थीं. वहां से उन्होंने अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, 'आगे की राह कठिन है... सदबुद्धि देना मां.'
उनकी इस पोस्ट ने उनके अगले कदम को लेकर चर्चा और तेज कर दी थी. हालांकि, फिलहाल उन्होंने अपने भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है.
IIT-IIM के बाद लंदन की नौकरी छोड़ी
दिव्या मित्तल की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने प्रतिष्ठित कॉरपोरेट करियर छोड़कर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना था. हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की.
विदेश में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने भारत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में उन्होंने UPSC परीक्षा पास कर IPS हासिल किया. गुजरात कैडर मिलने के बाद भी उन्होंने IAS बनने का लक्ष्य नहीं छोड़ा और अगले ही वर्ष 2013 में IAS में चयनित हुईं.
मिर्जापुर से देवरिया तक बनी अलग पहचान
उत्तर प्रदेश कैडर में आने के बाद दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक पदों पर काम किया और कई जिलों में जिम्मेदारी संभाली. वह मिर्जापुर, संतकबीरनगर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं.
मिर्जापुर में उनके कार्यकाल का एक काम विशेष रूप से चर्चा में रहा. लहुरिया दह के पहाड़ी क्षेत्र में ग्रामीण लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे थे. दिव्या मित्तल के प्रयासों से वहां पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया गया. बाद में उन्होंने अपने इस्तीफे के भावुक संदेश में इस अनुभव को भी याद किया.
देवरिया से लखनऊ तबादले के बाद बढ़ी चर्चा
मई 2026 में दिव्या मित्तल को देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव बनाया गया था. इसके कुछ महीनों बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने का फैसला किया. उनके इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चाएं जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने आधिकारिक तौर पर निजी और पारिवारिक कारणों को ही वजह बताया है.
पति भी छोड़ चुके हैं सरकारी नौकरी
दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भी सरकारी सेवा में रह चुके हैं. उन्होंने भारतीय व्यापार सेवा में काम किया और 2022 में नौकरी छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू किया.
दोनों की मुलाकात लंदन में हुई थी. दोनों ने प्रेम विवाह किया और बाद में भारत लौटकर अपने-अपने करियर की नई दिशा चुनी.
अब क्या करेंगी दिव्या मित्तल?
IAS से इस्तीफा देने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिव्या मित्तल अब किस क्षेत्र में कदम रखेंगी. राजनीति में आने को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन उन्होंने अभी भविष्य की योजना स्पष्ट नहीं की है.
फिलहाल इतना जरूर है कि एक प्रतिष्ठित कॉरपोरेट करियर छोड़कर UPSC और फिर IAS तक पहुंचने वाली दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा को भी अपनी इच्छा से अलविदा कहा है. उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में जिस “नई राह” की बात दिखाई देती है, वह आने वाले समय में उनके करियर की नई दिशा तय कर सकती है.
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