गद्दारी करने वाले बांग्लादेश के लिए भारत ने दबाया बिजली का बटन, ढाका में हाहाकार
उधर ढाका के सत्ता के गलियारों में बैठकर भारत के साथ हुए 101 समझौतों को फाड़कर रद्दी की टोकरी में फेंकने की कसमें खाई जा रही थी और इधर अचानक दिल्ली की तरफ से एक ऐसा साइलेंट बटन दबा कि पूरे बांग्लादेश में सन्नाटा पसर गया और बत्ती गुल हो गई। धमकी दिए अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि 1600 मेगावाट का अडानी पावर प्लांट अचानक से आधा हो गया। ढाका से लेकर चटकांव तक फैक्ट्रियों के सायरन खामोश हो गए और भारत को आंखें दिखाने वालों के पसीने छूट गए। जिस पाकिस्तान ने 1971 में बांग्लादेश की जमीन पर 30 लाख मासूमों का खून बहाया था। आज उसी दिवालिया मुल्क के साथ मिलकर भारत खिलाफ बंद कमरों में क्या खिचड़ी पक रही है और कोलकाता एयरपोर्ट से लेकर पावर ग्रिड तक भारत ने अचानक बांग्लादेश की आर्थिक सांसों पर शिकंजा क्यों कस दिया है? बांग्लादेश के जूनियर विदेश मंत्री मंच पर खड़े होकर बड़े घमंड से कहते हैं कि बांग्लादेश अब भारत की बात नहीं मानेगा और भारत उनके लिए दुनिया के किसी भी आम देश जैसा है। लेकिन इस बयान को आए अभी ठीक से 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि झारखंड में मौजूद अडानी पावर के 1600 मेगावाट कैपेसिटी वाले गोड्डा अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट की 800 मेगावाट की एक पूरी यूनिट अचानक से ट्रिप कर जाती है।
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बांग्लादेश को जो बिजली की सप्लाई 1400 मेगावाट से ऊपर मिल रही थी वह देखते ही देखते गिरकर 750 मेगावाट के नीचे आ गई है। पूरे बांग्लादेश के अंदर 136 पावर प्लांट होने के बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने और गैस कोयले की भयंकर कमी के कारण वे खुद की बिजली नहीं बना पा रहे हैं। जैसे ही भारत की तरफ से बिजली आदि हुई, नेशनल ग्रीड पूरी तरह से चरमरा गया,भारत सरकार और अडानी पावर ने कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया। बस शांत रहकर इतना कहा कि मरम्मत में 48 घंटे या कुछ दिन लग सकते हैं। लेकिन कूटनीति की दुनिया में यह सन्नाटा ही सबसे बड़ा जवाब होता है। भारत ने बिना एक गोली चलाए ढाका को यह साफ संदेश दे दिया कि तुम्हारी अर्थव्यवस्था का मेन स्विच कहां लगा हुआ है? अब अगला सवाल यह उठता है कि भारत को इतना सख्त रवैया क्यों अपनाना पड़ा बांग्लादेश के साथ? तो दोस्तों इसकी जड़ में है बांग्लादेश की नई सरकार का वो अहंकार जो सीधे भारत की संप्रभुता और नॉर्थ ईस्ट की सुरक्षा को चुनौती दे रहा था। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मानी ने खुले मन से ऐलान कर दिया कि पिछली सरकार के दौरान भारत के साथ साइन हुए 101 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू की समीक्षा की जा रही है और इन्हें बहुत जल्द ही रद्द कर दिया जाएगा और इसमें सबसे बड़ा और खतरनाक निशाना कौन सा है? चटगांव पोर्ट।
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वैसे हम सभी जानते हैं कि भारत को असम, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे अपने पूर्वोत्तर राज्यों तक जाने के लिए 1600 कि.मी. लंबे और बेहद पतले सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक से होकर गुजरना पड़ता है। जहां चीन की भी गिद्ध जैसी नजरें लगी रहती हैं। भारत ने बड़ी समझदारी और कूटनीति से चटगांव पोर्ट के इस्तेमाल का स्थाई समझौता किया था। जिससे समुद्र के रास्ते हमारा माल सीधे चटगांव और वहां से कुछ ही घंटों में नॉर्थ ईस्ट पहुंच जाता था। लेकिन अब बांग्लादेश की नई हुकूमत इस रणनीतिक समझौते को तोड़ने और भारतीय जहाजों को बाहर करने की धमकी दे रही है। शायद ढाका के नए आका ये भूल गए हैं कि जिस देश की सेना ने उन्हें कभी दुनिया के नक्शे पर पहचान दिलाई थी वो अपने रणनीतिक हितों से 1 इंच भी पीछे नहीं हटने वाला है। बांग्लादेश का रणनीतिक अंधापन सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। जिस पाकिस्तान की सेना ने ऑपरेशन सच के तहत लाखों मासूम बांग्लादेशियों पर जुल्म ढाए थे। आज ढाका की सत्ता उसी पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के खिलाफ साजिशें बुन रहे हैं।
ये हथकंडे...मसूद अजहर पर पाकिस्तान के 70 लाख वाले इनामी 'खेल' की भारत ने खोली पोल
भारत ने जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अज़हर पर इनाम की राशि बढ़ाने के पाकिस्तान के कदम को दिखावा और झूठी घोषणा करार दिया और इस्लामाबाद से कहा कि वह "खोखली" घोषणाएं करने के बजाय ठोस कार्रवाई करे। पाकिस्तान की फ़ेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने अपनी 2026 की सबसे ज़्यादा वांछित आतंकवादियों की सूची में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर का नाम शामिल किया है। उसे पकड़ने में मदद करने वाली जानकारी के लिए इनाम की राशि भी 20 लाख पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी गई है।
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भारत ने जैश पर पाकिस्तान के इनाम की घोषणा की आलोचना की
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे आंख में धूल झोंकने वाली हरकत (धोखा देने की कोशिश) बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से इस तरह के हथकंडे और लोगों को गुमराह करने की कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं। हमने पहले भी ऐसे हथकंडे देखे हैं। उन्होंने आगे कहा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश की ओर से ऐसी झूठी घोषणाएं किए जाने पर हम सभी जानते हैं कि वे कितनी खोखली होती हैं। पाकिस्तान को ऐसी घोषणाएं करने के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए, जिनका अंततः कोई नतीजा नहीं निकलता।
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पाकिस्तान ने अज़हर को सबसे ज़्यादा वांछित आतंकवादियों की सूची में शामिल किया
पाकिस्तान 2021 से ही यह कहता आ रहा है कि अज़हर अब देश में नहीं है और अफ़गानिस्तान भाग गया है। उस साल, FIA ने उसकी गिरफ़्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 50 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की थी। अज़हर को इस सूची में शामिल करने का यह कदम अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठक से पहले उठाया गया है, क्योंकि पाकिस्तान खुद को 'ग्रे लिस्ट' में वापस जाने से बचाना चाहता है। गौरतलब है कि FATF एक वैश्विक संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंडिंग को रोकने के लिए मानक तय करती है।
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