Onion Black Spots: प्याज पर दिख रहे हैं काले धब्बे? काटकर फेंकने की गलती न करें, जानें कब इसे खाना है सुरक्षित
Onion Black Spots: सब्जी काटते समय अगर प्याज के ऊपर काले-काले निशान नजर आ जाएं, तो अक्सर लोग इसे मिट्टी या गंदगी समझकर उस हिस्से को काट देते हैं। लेकिन हर बार ये निशान सिर्फ गंदगी नहीं होते। कई मामलों में प्याज पर दिखाई देने वाले काले धब्बे फफूंद यानी मोल्ड का संकेत हो सकते हैं।
प्याज पर लगी फफूंद सिर्फ ऊपर की परत तक सीमित रहे, यह जरूरी नहीं है। इसलिए काले हिस्से को हटाकर बाकी प्याज इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। जानें कि इन काले निशानों की वजह क्या हो सकती है और ऐसे प्याज के साथ क्या करना चाहिए।
प्याज पर काले धब्बे क्यों पड़ते हैं?
प्याज को लंबे समय तक गर्म या नमी वाली जगह पर रखने से उस पर फफूंद लगने का खतरा बढ़ सकता है। शुरुआत में यह सतह पर छोटे-छोटे काले निशानों या परत के रूप में दिखाई दे सकती है।
फफूंद सूक्ष्म जीवों से बनती है और इसके बीजाणु हवा, पानी या कीड़ों के जरिए फैल सकते हैं। इसलिए प्याज पर दिखने वाला काला हिस्सा हमेशा सिर्फ ऊपर की सतह तक सीमित हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
क्या काले धब्बे वाला प्याज खा सकते हैं?
अगर प्याज पर फफूंद काफी ज्यादा फैल चुकी है या कई हिस्सों में काली परत दिखाई दे रही है, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है। सिर्फ ऊपर का काला हिस्सा काटकर बाकी प्याज खाने को सुरक्षित मानना सही नहीं है, क्योंकि फफूंद अंदर तक फैल सकती है और हर बार इसे आंखों से देख पाना संभव नहीं होता।
सिर्फ धोकर या रगड़कर साफ करना काफी नहीं
अगर काले निशान फफूंद की वजह से हैं, तो उन्हें केवल पानी से धोना या कपड़े से रगड़कर हटाना पर्याप्त नहीं माना जाता। फफूंद के बारीक हिस्से खाने के अंदर तक पहुंच सकते हैं। इसलिए ज्यादा फफूंद लगे प्याज को बचाने की कोशिश करने के बजाय उसे फेंक देना बेहतर विकल्प है।
फफूंद लगे प्याज को सूंघने से भी बचें
अगर प्याज पर साफ तौर पर फफूंद दिखाई दे रही है, तो उसे नजदीक ले जाकर सूंघने से बचें। फफूंद के बीजाणु हवा में फैल सकते हैं और कुछ लोगों में एलर्जी या सांस से जुड़ी परेशानी पैदा कर सकते हैं।
प्याज को कैसे रखें ताकि जल्दी खराब न हो?
प्याज को ऐसी जगह रखें जहां ज्यादा गर्मी और नमी न हो। जिस जगह पर फफूंद लगा प्याज रखा था, वहां की सफाई भी कर लें और आसपास रखी दूसरी सब्जियों या खाद्य चीजों को भी अच्छी तरह जांच लें।
अगली बार प्याज खरीदते समय रखें ध्यान
प्याज खरीदते समय बहुत नरम, गीला या खराब दिखने वाला प्याज लेने से बचें। घर लाने के बाद भी इसे सूखी और हवादार जगह पर रखें। अगर किसी प्याज पर काले धब्बे तेजी से बढ़ते दिखाई दें, तो उसे बाकी प्याज से अलग कर दें।
ध्यान दें: प्याज पर हर काला निशान एक जैसा नहीं होता। अगर फफूंद का शक हो और प्याज काफी खराब दिखाई दे रहा हो, तो उसे खाने का जोखिम लेने के बजाय फेंक देना बेहतर है।
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Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर क्यों की जाती है औजारों-मशीनों की पूजा? जानें उन्हें विश्राम देने की वजह
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में शिल्प, वास्तु और निर्माण का देवता माना जाता है। हर साल 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाने की परंपरा है। इस दिन खासतौर पर कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और दूसरे कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।
विश्वकर्मा पूजा की सबसे खास परंपराओं में औजारों, मशीनों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का पूजन शामिल है। कई जगह इस दिन मशीनों को बंद रखकर उन्हें आराम भी दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यंत्रों की पूजा क्यों की जाती है और उन्हें एक दिन विश्राम देने के पीछे क्या मान्यता है?
भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है पहला शिल्पकार
धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक परंपराओं में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला शिल्पकार और निर्माण का देवता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने सोने की लंका, द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी अद्भुत रचनाओं का निर्माण किया था।
इसी धार्मिक मान्यता के चलते शिल्प, निर्माण और तकनीकी काम से जुड़े लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों को भगवान विश्वकर्मा का प्रतीक मानते हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन इन यंत्रों की पूजा करके उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट किया जाता है।
मशीनों को क्यों दिया जाता है विश्राम?
विश्वकर्मा पूजा पर कई कारखानों, दुकानों और वर्कशॉप में काम बंद रखा जाता है। सुबह कार्यस्थल की सफाई करने के बाद मशीनों और औजारों को साफ किया जाता है और उनका पूजन किया जाता है।
पूरे साल काम में लगे रहने वाले उपकरणों को इस दिन इस्तेमाल न करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। धार्मिक दृष्टि से इसे यंत्रों के प्रति सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। वहीं व्यावहारिक रूप से भी यह दिन मशीनों की सफाई, रखरखाव और उनकी स्थिति जांचने के लिए उपयोगी हो सकता है।
कैसे करें औजारों और मशीनों की पूजा?
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले कार्यस्थल, दुकान या कारखाने की अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है।
इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, फूल और माला से भगवान की पूजा की जाती है। काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों पर भी तिलक लगाया जाता है। कई स्थानों पर यंत्रों पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और भगवान को फल व मिठाई का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है।
क्या होती है औजारों की पूजा की मान्यता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, काम में इस्तेमाल होने वाले औजार और मशीनें भगवान विश्वकर्मा की कृपा का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए इनकी पूजा करने से कार्यक्षेत्र में शुभता और समृद्धि आने की मान्यता है।
विश्वास किया जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा से कारोबार में तरक्की, कार्य में सफलता और कार्यस्थल पर सुख-शांति बनी रहती है। मशीनों और वाहनों की नियमित देखभाल को भी इस परंपरा से जोड़ा जाता है।
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