Back Neck Pain: कमर-गर्दन दर्द में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 5 गलतियां? बढ़ सकती है परेशानी
Back Neck Pain: कमर या गर्दन में दर्द हो तो सबसे पहले राहत पाने का मन करता है, लेकिन हर बार स्ट्रेचिंग करना सही तरीका नहीं होता। कई बार हमारी रोज की छोटी-छोटी आदतें ही दर्द को कम करने के बजाय और बढ़ा देती हैं।
लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना, घंटों स्क्रीन देखना या गलत तरीके से बैठने जैसी आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर आपको भी अक्सर कमर या गर्दन में दर्द रहता है, तो जानिए वो 5 गलतियां जो अनजाने में आपकी परेशानी बढ़ा सकती हैं।
1. दर्द होते ही जोर लगाकर स्ट्रेच करना
गर्दन या कमर में दर्द होने पर शरीर को जबरदस्ती खींचना या ज्यादा स्ट्रेच करना हमेशा सही नहीं होता। अगर किसी मूवमेंट से दर्द बढ़ रहा है, तो उसे जारी रखने के बजाय रुकना बेहतर है। हल्की और आरामदायक मूवमेंट ही करें।
2. घंटों एक ही जगह बैठे रहना
लंबे समय तक लगातार बैठने से मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर लैपटॉप या डेस्क पर काम करते समय गर्दन आगे झुकाने और पीठ को गोल करके बैठने से परेशानी बढ़ सकती है। बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना और पॉश्चर बदलना मददगार हो सकता है।
3. मोबाइल या लैपटॉप को नीचे रखकर देखना
फोन को लगातार नीचे की ओर देखकर चलाने या इस्तेमाल करने से गर्दन पर खिंचाव बढ़ सकता है। इसी तरह लैपटॉप की स्क्रीन बहुत नीचे होने पर भी व्यक्ति आगे झुककर बैठ सकता है। कोशिश करें कि स्क्रीन आंखों के करीब सही ऊंचाई पर हो और गर्दन को लंबे समय तक झुकाकर न रखें।
4. दर्द को नजरअंदाज करते रहना
हल्का दर्द कई बार आराम और रोजमर्रा की आदतों में सुधार से ठीक हो सकता है, लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौटता है या रोज के काम प्रभावित करने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चोट के बाद शुरू हुआ दर्द, हाथ-पैर में सुन्नपन या कमजोरी जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
5. हर दर्द का इलाज खुद करने की कोशिश
कमर और गर्दन के दर्द की वजह हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इसलिए इंटरनेट देखकर कोई भी एक्सरसाइज, स्ट्रेच या सपोर्ट बेल्ट लंबे समय तक खुद से इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है। अगर दर्द समझ नहीं आ रहा या लगातार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सही सलाह लें।
कमर और गर्दन को आराम देने के आसान तरीके
- लंबे समय तक एक ही पॉजिशन में न बैठें।
- काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें।
- लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के करीब सही ऊंचाई पर रखें।
- फोन इस्तेमाल करते समय गर्दन को ज्यादा नीचे न झुकाएं।
- दर्द बढ़ाने वाली एक्सरसाइज या स्ट्रेच तुरंत रोक दें।
- रोजमर्रा में हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
(Disclaimer): यह खबर सामान्य जानकारी के लिए है। अगर दर्द के साथ हाथ या पैर में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी हो, चोट के बाद तेज दर्द शुरू हुआ हो या दर्द लगातार बढ़ रहा हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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Relationship Tips: पार्टनर को खुश रखने के लिए कहीं खुद को तो नहीं खो रहे? इन बातों को समझना है ज़रूरी
Relationship Tips: रिश्ते में प्यार, समझ और एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र होना जरूरी है। पार्टनर को खुश रखने के लिए छोटी-छोटी चीजों में समझौता करना रिश्ते को मजबूत भी बना सकता है। लेकिन जब यही समझौते आपकी पसंद, सोच, दोस्तों, करियर या निजी आजादी को लगातार प्रभावित करने लगें, तो एक बार रुककर सोचने की जरूरत है।
कई बार इंसान रिश्ते को बचाए रखने के लिए अपनी पसंद को पीछे करने लगता है। धीरे-धीरे वह वही करने लगता है जो पार्टनर को पसंद है और अपनी इच्छाओं को नजरअंदाज करता रहता है। लंबे समय में ऐसा करने से भीतर नाराजगी, घुटन या अपनी पहचान खोने का एहसास पैदा हो सकता है। स्वस्थ रिश्ते में प्यार के साथ-साथ दोनों लोगों की व्यक्तिगत पहचान के लिए भी जगह होनी चाहिए।
अपनी पसंद को पूरी तरह नजरअंदाज न करें
पार्टनर की पसंद का सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन हर मामले में अपनी पसंद छोड़ देना जरूरी नहीं। अगर आपको कोई गतिविधि पसंद है, कोई खास शौक है या आप अपने तरीके से समय बिताना चाहते हैं, तो उसके लिए रिश्ते में जगह बनाएं।
हर बार सिर्फ इसलिए अपनी पसंद बदलना कि पार्टनर नाराज न हो जाए, धीरे-धीरे आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है।
दोस्तों और परिवार से दूरी न बनाएं
रिश्ते में आने के बाद पार्टनर के साथ समय बिताना स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पुराने दोस्तों या परिवार से संपर्क कम कर दिया जाए। अपने करीबी लोगों के साथ स्वस्थ संबंध बनाए रखना भावनात्मक संतुलन के लिए भी जरूरी है।
अगर पार्टनर आपकी हर दोस्ती या पारिवारिक रिश्ते पर सवाल उठाता है और आपको लोगों से मिलने से रोकता है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
करियर और सपनों से समझौता सोच-समझकर करें
कभी-कभी परिस्थितियों के कारण कपल्स को एक-दूसरे के करियर या योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। लेकिन हर बार सिर्फ एक व्यक्ति के सपनों को महत्व देना सही नहीं है।
अगर आप अपने करियर, पढ़ाई या किसी लंबे समय से देखे जा रहे लक्ष्य को सिर्फ इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि पार्टनर ऐसा चाहता है, तो इस फैसले पर खुलकर बातचीत करें। रिश्ते में दोनों के भविष्य की योजनाओं को महत्व मिलना चाहिए।
हर बात पर 'हां' कहना जरूरी नहीं
पार्टनर को खुश रखने के लिए हर बात मानना प्यार की निशानी नहीं है। स्वस्थ रिश्ते में दोनों लोगों को अपनी असहमति व्यक्त करने की आजादी होती है।
आप किसी बात से सहमत नहीं हैं तो सम्मान के साथ 'नहीं' कह सकते हैं। अपनी सीमाएं तय करना रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि आपसी सम्मान को मजबूत कर सकता है।
खुद के लिए भी समय निकालें
रिश्ते में रहते हुए अपनी पसंद के काम करने के लिए थोड़ा निजी समय निकालना जरूरी है। किताब पढ़ना, घूमना, एक्सरसाइज करना, दोस्तों से मिलना या कोई पुराना शौक पूरा करना आपको अपने व्यक्तित्व से जोड़े रख सकता है।
हर समय पार्टनर के साथ रहना ही अच्छे रिश्ते की पहचान नहीं है। एक-दूसरे को व्यक्तिगत स्पेस देना भी उतना ही जरूरी है।
प्यार में समझौता हो, आत्मसम्मान नहीं
रिश्ते में दोनों लोगों को कुछ समझौते करने पड़ते हैं, लेकिन आत्मसम्मान और बुनियादी व्यक्तिगत अधिकारों की कीमत पर समझौता करना स्वस्थ नहीं माना जा सकता। अगर आपको बार-बार लगता है कि पार्टनर को खुश रखने के लिए आपको अपने व्यक्तित्व का कोई हिस्सा छोड़ना पड़ रहा है, तो इस स्थिति पर गंभीरता से बातचीत करें।
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लेखक: (कीर्ति)
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