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India-US Joint Military Exercise | रेगिस्तान से लेकर हिमालय की ऊंचाइयों तक, शुरू हुआ भारत-US का युद्ध अभ्यास 2026, क्यों थर्राएंगे ड्रैगन और पाकिस्तान?

भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले 'युद्ध अभ्यास 2026' (Yudh Abhyas 2026) के 22वें संस्करण की शुरुआत आज से हो गई है। 15 सितंबर से 28 सितंबर तक चलने वाला यह 14 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास कई मायनों में ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस साल के अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत इसका भौगोलिक विस्तार है। इतिहास में पहली बार यह सैन्य अभ्यास एक साथ दो अत्यंत चुनौतीपूर्ण और अलग-अलग थिएटर्स—राजस्थान के तपते रेगिस्तान और उत्तराखंड के ऊंचे बर्फ़ीले पहाड़ी इलाकों—में आयोजित किया जा रहा है।

'युद्ध अभ्यास 2026' में कितने सैनिक हिस्सा ले रहे हैं?
इस अभ्यास में लगभग 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें हर देश के 350 जवान शामिल हैं। अभ्यास का एक चरण राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है, जहां दोनों देशों के सैनिक रेगिस्तानी हालात में लंबी दूरी तक फायरिंग, सटीक हमले (precision strikes), युद्धाभ्यास और संयुक्त ऑपरेशन का अभ्यास कर रहे हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड के औली में सैनिक ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लड़ाई, मुश्किल पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन, एयर मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स पर ट्रेनिंग ले रहे हैं। औली, लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से लगभग 95 किलोमीटर दूर है।

इस साल के अभ्यास की मुख्य बात
इस साल के अभ्यास की एक मुख्य बात काउंटर-ड्रोन वॉरफेयर (ड्रोन-रोधी युद्ध) पर ज़ोर देना है। भारत में पहली बार, इस अभ्यास के दौरान अमेरिका में बने 'मोबाइल लो, स्लो, स्मॉल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट इंटीग्रेटेड डिफीट सिस्टम' (MLIDS) को तैनात किया जा रहा है। यह सिस्टम दोनों सेनाओं को ड्रोन के खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें बेअसर करने की ट्रेनिंग लेने में मदद करेगा।

'युद्ध अभ्यास' में कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़, फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ और कंबाइंड लाइव-फायर डेमोंस्ट्रेशन जैसे चरण शामिल हैं। इसका मकसद सिर्फ़ हथियारों की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कमांड, कम्युनिकेशन, फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं में दोनों सेनाओं के बीच तालमेल (interoperability) को बेहतर बनाना भी है।इसे भी पढ़ें: UCC पर Sanjay Jha जल्द मिलेंगे Amit Shah से, 14 सितंबर की रात तक की मुख्य खबरें

इससे भी अहम बात यह है कि यह अभ्यास दोनों सेनाओं को अपनी नई टेक्नोलॉजी, हथियार प्रणालियों और युद्ध के अनुभव को साझा करने का मौका देता है। 'युद्ध अभ्यास' का यह संस्करण यह भी दिखाता है कि आधुनिक युद्ध कैसे बदल रहा है, जिसमें संघर्षों के दौरान ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, सटीक हमले और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन अहम भूमिका निभा रहे हैं। US एंबेसडर सर्जियो गोर भी इस एक्सरसाइज़ के अहम ट्रेनिंग इवेंट्स में हिस्सा लेने वाले हैं, जो भारत और US के बीच बढ़ते डिफेंस सहयोग का संकेत है। US आर्मी के मुताबिक, उनकी मौजूदगी दोनों देशों के बीच डिफेंस पार्टनरशिप को दिखाती है।

'युद्ध अभ्यास' 2026 क्यों अहम है?
भारत और US के बीच 'युद्ध अभ्यास' सीरीज़ 2004 में शुरू हुई थी और तब से यह हर साल होने वाली दोनों देशों की जॉइंट एक्सरसाइज़ बनी हुई है, जिसकी मेज़बानी बारी-बारी से दोनों देश करते हैं। हालांकि, 2026 का एडिशन खास तौर पर अहम है क्योंकि पहली बार इसमें हिमालय से लेकर राजस्थान तक, अलग-अलग तरह के कॉम्बैट सिनेरियो (लड़ाई की स्थितियों) को एक ही एक्सरसाइज़ में शामिल किया गया है।इसे भी पढ़ें: Bihar Flood से 50 लाख लोग प्रभावित, Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने राहत कार्य में जुटने की अपील की

दूसरे शब्दों में, जहां एक्सरसाइज़ का एक हिस्सा पाकिस्तान बॉर्डर के पास राजस्थान के खुले रेगिस्तानी इलाके में हो रहा है, वहीं दूसरा हिस्सा चीन बॉर्डर के पास उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके में किया जा रहा है। इस बार, भारतीय और US सेनाएं दो अलग-अलग ऑपरेशनल इलाकों में अपनी जॉइंटनेस, इंटरऑपरेबिलिटी और मॉडर्न कॉम्बैट क्षमताओं को परख रही हैं।

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US Court ने विदेशी छात्रों और पत्रकारों के Visa नियमों पर लगाई अंतरिम रोक

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 15 सितंबर अमेरिका के एक संघीय न्यायाधीश ने विदेशी विद्यार्थियों और पत्रकारों के अमेरिका में पढ़ाई या काम करने की समयसीमा पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए नियम पर अंतरिम रोक लगा दी है। मैसाचुसेट्स जिला न्यायाधीश के सोमवार को आए इस फैसले से भारतीय छात्रों सहित अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह आदेश नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले जारी किया गया।

न्यायाधीश ने सरकार के इन दावों को खारिज कर दिया कि देश की सुरक्षा के लिए यह नियम आवश्यक है। उन्होंने फैसला सुनाया कि नई नीति से अमेरिकी अर्थव्यवस्था व उच्च शिक्षा प्रणाली को ‘‘विनाशकारी’’ क्षति पहुंचने का अंदेशा है। न्यायाधीश एफ. डेनिस सेलोर ने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें राहत को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रखने और पूरे देश में लागू न करने की बात कही गई थी।

अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहने तक प्रारंभिक स्थगन आदेश के जरिए नए नियम के कार्यान्वयन को रोक दिया गया है। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता लगभग 600 सार्वजनिक और निजी संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन अमेरिका में 5,000 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान हैं। न्यायाधीश सेलोर ने फैसला दिया कि केवल संबंधित पक्षों तक राहत को सीमित रखने के लिए समानांतर नियामक व्यवस्था बनाए रखनी होगी और बार-बार यह निर्धारित करना पड़ेगा कि कोई विशेष छात्र या संस्थान इस आदेश के दायरे में आता है या नहीं, जिससे परस्पर विरोधी फैसले आ सकते हैं।

जुलाई में ट्रंप प्रशासन के जिस नियम को अंतिम रूप दिया गया था, उसमें छात्र और ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ के लिए चार साल की समय-सीमा तय की गई है। ‘एक्सचेंज विजिटर वीजा’ अमेरिका का एक प्रकार का गैर-आप्रवासी वीजा है, जो ऐसे लोगों को दिया जाता है जो शैक्षणिक, सांस्कृतिक या पेशेवर कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आते हैं। इसके अलावा, चीन को छोड़कर अन्य देशों के पत्रकारों के वीजा के लिए 240 दिन की सीमा निर्धारित की गई थी।

अब स्थगित हो चुके इस नियम के अनुसार चीन के मीडियाकर्मियों के लिए जारी वीजा की अवधि 90 दिन की तय की गई है। ये नए नियम मंगलवार से लागू होने थे। इस नियम के तहत छात्रों और पत्रकारों को वीजा अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करने की अनुमति तो थी, लेकिन इसकी मंजूरी पूरी तरह से गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के विवेक पर निर्भर थी और अवधि बढ़ाने के आवेदन के खारिज होने पर अपील करने का कोई प्रावधान नहीं था।

मुख्य रूप से उच्च शिक्षा क्षेत्र और श्रमिक यूनियनों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों ने नियम को रद्द करने का अनुरोध करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। हार्वर्ड के अध्यक्ष एलन एम. गार्बर ने जुलाई में कहा था, ‘‘एक सामान्य पीएचडी कार्यक्रम में आमतौर पर कम से कम छह साल लगते हैं, इसलिए वीजा की अवधि घटाकर चार साल करना थोड़ा अजीब है।’’ दूसरी ओर, गृह सुरक्षा विभाग का कहना था कि ऐसा करके धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने और लोगों को वीजा अवधि से अधिक समय तक रुकने से रोकने में मदद मिलेगी।

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मेरी बीवी चिल्लाने लगी... वैभव सूर्यवंशी के प्लेइंग XI में नहीं होने से पूर्व क्रिकेटर के घर में क्लेश! मैच छोड़ मूवी देखने चले गए

अफगानिस्तान के खिलाफ पहले टी20 मैच में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका मिला था. वैभव की जगह संजू सैमसन मैदान पर उतरे थे. वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने से सिर्फ फैंस ही नहीं, पूर्व क्रिकेटर के श्रीकांत भी काफी हैरान थे. सिर्फ इतना ही नहीं, श्रीकांत की वाइफ तो चिल्लाने लगी थीं. Tue, 15 Sep 2026 11:27:03 +0530

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