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इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2km लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; नेतन्याहू बोले- मिशन पूरा, हैप्पी न्यू ईयर

इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग को ब्लास्ट कर तबाह कर दिया। ब्लास्ट के लिए करीब 1100 टन विस्फोटक इस्तेमाल किया गया था। यह विस्फोट इतना तेज था कि इलाके में 4.1 तीव्रता वाले भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, धमाके से आसपास के इलाकों में जमीन हिलने लगी। इस हमले के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर।’ इजराइली सेना के मुताबिक, सुरंग में ईरान में बने कई रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन रखे थे। यहां मशीनगन, एंटी-टैंक मिसाइल और सैकड़ों बारूदी सुरंगें व विस्फोटक भी मिले। सेना ने बताया कि इस परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी था। टनल में घुसे थे IDF सैनिक, तलाशी का फुटेज जारी किया इजराइली सेना (IDF) ने अली अल-ताहेर पहाड़ी के नीचे बने हिजबुल्लाह के टनल नेटवर्क का फुटेज जारी किया है। वीडियो में सैनिक सुरंगों के अंदर तलाशी लेते नजर आ रहे हैं। IDF के मुताबिक, जून में सीजफायर के बाद से यहां करीब 50 हिजबुल्लाह लड़ाके छिपे हुए थे। इस साइट पर कब्जे की कार्रवाई के दौरान कई लड़ाके मारे गए। सेना के मुताबिक, इनमें कुछ ऐसे थे जो सुरंगों से भागने की कोशिश कर रहे थे। तलाशी के दौरान सैनिकों को करीब 12 शव भी मिले। हालांकि, IDF का कहना है कि कुछ हिजबुल्लाह लड़ाके इलाके से भागने में कामयाब हो सकते हैं। इस टनल नेटवर्क को बनाने में 20 साल लगे थे नेतन्याहू के मुताबिक इस टनल नेटवर्क को बनाने में लगभग 20 साल लगे थे। इसके लिए ईरान ने फंडिग की थी। इजराइली रक्षामंत्री इजराइल काट्ज ने इसे आतंकी नेटवर्क बताया। इजराइल का कहना है कि इस इलाके जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह उसका कंट्रोल हो गया है। पिछले हफ्ते इजराइल ने दावा किया था कि उसने इलाके पर कब्जा कर लिया है। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक हिजबुल्लाह के कई लड़ाकों को हवाई हमलों में मार गिराया गया था, जबकि कुछ भाग निकले थे। हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट क्या है? हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट दक्षिणी लेबनान में संगठन की सबसे अहम सैन्य इकाइयों में से एक है। यह लिटानी नदी के उत्तर के इलाके में सक्रिय है। यूनिट का नाम 624 ईस्वी की बद्र की लड़ाई से लिया गया है। यह पैगंबर मुहम्मद के नेतृत्व वाली सेना और मक्का के कुरैश के बीच हुई थी। इजराइल ने लेबनान में फिर से हमले शुरू किए इजराइल ने पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में फिर से हमले तेज किए हैं। जून में ईरान और अमेरिका की बातचीत के बाद इजराइल-लेबनान में समझौता हुआ था। इस समझौते के बाद कुछ समय के लिए हमले रुक गए थे। AFP के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि अली अल-ताहेर पहाड़ी का कंट्रोल लेबनान की सेना को दिया जाए। हालांकि हिजबुल्लाह ने इसे नकार दिया था। लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए सिक्योरिटी जोन में अभी भी मौजूद है। 2006 के बाद हिजबुल्लाह ने क्यों बनाया अंडरग्राउंड नेटवर्क? सवाल: 2006 के युद्ध के बाद हिजबुल्लाह ने अपनी रणनीति क्यों बदली? जवाब: 2006 के इजराइल-हिजबुल्लाह युद्ध में इजराइली हवाई हमलों ने संगठन के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इससे हिजबुल्लाह को समझ आया कि खुले में मौजूद कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैन्य ठिकाने आसानी से निशाने पर आ सकते हैं। इसके बाद संगठन ने सैन्य ढांचे को ज्यादा से ज्यादा जमीन के नीचे ले जाने पर जोर दिया। सवाल: अंडरग्राउंड नेटवर्क से हिजबुल्लाह को क्या फायदा मिला? जवाब: सुरंग और बंकर ऊपर से होने वाली निगरानी और हवाई हमलों से सैन्य ढांचे को छिपाने में मदद करते हैं। इनमें हथियार, गोला-बारूद और लड़ाकों को रखा जा सकता है, जबकि कमांडर वहीं से सैन्य गतिविधियां चला सकते हैं। सवाल: क्या ये सुरंगें सिर्फ इजराइल पर हमला करने के लिए थीं? जवाब: नहीं। अंडरग्राउंड नेटवर्क का इस्तेमाल कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है—हथियार छिपाने, लड़ाकों की आवाजाही, कमांड सिस्टम चलाने और हमले के बाद सैन्य क्षमता बचाए रखने के लिए। यानी इसका मकसद सिर्फ हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक लड़ने की क्षमता बनाए रखना भी है। सवाल: सुरंगें इजराइली सेना के लिए इतनी बड़ी चुनौती क्यों हैं? जवाब: जमीन के ऊपर मौजूद सैन्य ठिकानों को ड्रोन और हवाई तस्वीरों से पहचानना अपेक्षाकृत आसान है। लेकिन सुरंगें जमीन के नीचे होती हैं और उनका पूरा नेटवर्क दिखाई नहीं देता। एक प्रवेश द्वार से कई अलग-अलग रास्ते और कमरे जुड़े हो सकते हैं। इसलिए किसी सुरंग को ढूंढना और उसका पूरा नेटवर्क नष्ट करना मुश्किल होता है। सवाल: इजराइल इन्हें खोजता कैसे है? जवाब: इसके लिए इजराइल कई तरह की खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करता है। इसमें मानव स्रोत, सिग्नल इंटेलिजेंस, ड्रोन और दूसरी निगरानी तकनीकें शामिल हैं। किसी संभावित जगह की पहचान होने के बाद जमीन पर मौजूद सुरागों और तकनीकी जानकारी से सुरंग के प्रवेश और उसके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाती है। ------------------ ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन BRICS समिट के लिए भारत पहुंचे:मोदी से मुलाकात करेंगे; Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस की डील हो सकती है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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चीन में आय में असमानता बढ़ी, माओ की किताबें लोकप्रिय:नौकरी और बढ़ती स्पर्धा से परेशान जेन-जी इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रहे

आधुनिक चीन के संस्थापक माओत्से तुंग (माओ जेदांग) की मृत्यु के 50 साल बाद उनकी किताबें और भाषण फिर चर्चा में हैं। खासकर जेन-जी और युवा प्रोफेशनल के बीच। वजहें साफ हैं। अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है। नौकरियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। शिक्षा और रोजगार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। आय असमानता की चिंता बढ़ी है। ऐसे में कुछ युवा माओ की रचनाओं को सिर्फ राजनीतिक दस्तावेज नहीं मान रहे। वे इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रहे हैं। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, माओ के विचार कई युवाओं के लिए ‘संकट से निपटने की ताकत का स्रोत’ बन रहे हैं। यह वापसी इसलिए भी खास है, क्योंकि जेन-जी माओ को निजी स्मृति की तरह नहीं जानती। वह उन्हें इतिहास के एक बड़े किरदार की तरह देखती है। उनके शब्दों को आज के दबाव के हिसाब से नए अर्थ में पढ़ती है। भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे युवाओं का बड़ा वर्ग माओ के पुराने विचारों को आज की मुश्किलों को समझने, उनसे जूझने और समाधान खोजने के तौर पर देख रहा है। मार्क्स ऑफ माओत्से तुंग’ रही। यह किताब सबसे ज्यादा बिकी भी है। वहीं, ई-कॉमर्स साइट ताओबाओ पर माओ के चित्रों और विचारों वाले 20,000 से ज्यादा मग बिक चुके हैं। सोशल मीडिया पर माओ के भाषणों और लेखों को नौकरी, निजी संघर्ष और रिश्तों की समस्याओं से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ऑनलाइन रीडिंग ग्रुप और एआई से बने ऑडियो-वीडियो भी युवा पीढ़ी तक पहुंच रहे हैं। युवाओं को माओ में ऐसा क्या मिल रहा एडिलेड यूनिवर्सिटी के चीनी अध्ययन के प्रोफेसर मोबो गाओ के अनुसार, कड़ी प्रतिस्पर्धा, संपत्ति की असमानता और रोजगार की सीमित संभावनाओं के बीच कुछ युवाओं को माओ के वर्ग और संघर्ष से जुड़े विचार अपने अनुभवों को समझने का तरीका दे सकते हैं। जेन-जी के लिए माओ एक ऐतिहासिक नेता से ज्यादा ऐसे व्यक्ति हैं, जिसके लेखन में मुश्किल हालात से लड़ने और असफलता के बाद आगे बढ़ने की बातें खोजी जा सकती हैं। गाओ कहते हैं कि जेन-जी माओ के कार्यों को जीवन की चुनौतियों से निपटने की गाइडबुक के रूप में पढ़ रहे हैं, न कि राजनीतिक दस्तावेज के तौर पर। अमेरिका से तनाव बढ़ा तो माओ के विचार फिर वायरल हुए - माओ ने 1946 में कहा था कि साम्राज्यवाद और परमाणु बम ‘पेपर टाइगर’ हैं- यानी वे ऊपर से खतरनाक लगते हैं, लेकिन असल में कमजोर हैं। हाल के ​वर्षों में जब अमेरिका से व्यापार तनाव बढ़ा तो माओ के साम्राज्यवाद संबंधी ‘पेपर टाइगर’ जैसा विचार चीन के सोशल मीडिया पर प्रमुखता से छाया रहा। -1938 में लिखी माओ की किताब ‘ऑन प्रोट्रैक्टेड वॉर’ के संदर्भ भी ऑनलाइन चर्चा में रहे। इससे माओ की छवि के दो पहलू सामने आते हैं- एक ओर निजी मुश्किलों में संघर्ष का प्रतीक और दूसरा- बाहरी दबाव के सामने चीन की ताकत और राष्ट्रीय स्वतंत्रता का प्रतीक। यह युवाओं को लुभा रहा है।

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सिडनी स्वीनी का बोल्ड स्पोर्ट्स एड देखकर भड़कीं महिला खिलाड़ी, बोलीं- यह एथलीट्स का अपमान है

सिडनी स्वीनी ने एक स्पोर्ट्स एडवर्टाइजमेंट किया है, जिसमें वह कई बार बिना कपड़ों की भी दिखाई दी हैं। इस पर महिला एथलीट्स का गुस्सा भड़क गया है। उनका कहना है यह हमारा अपमान है।  Tue, 15 Sep 2026 11:29:40 +0530

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Omar Abdullah On UCC: यूसीसी विवाद पर उमर की हुंकार, दे दी सीधी चुनौती | #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-15T07:15:35+00:00

Asaduddin Owaisi। Goa UCC। Amit Shah। AIMIM। शाह, BJP- RSS को ओवैसी की खुली चुनौती!। #shorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-15T07:16:49+00:00
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