TMC सांसद की SC में अर्जी, ममता का EC पर आक्रमक रुख, पश्चिम बंगाल में कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा SIR!
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सुप्रीम कोर्ट से बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को 15 जनवरी से आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अभियान से बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की आशंका है, क्योंकि चुनाव आयोग को कथित तौर पर 1.36 करोड़ मतदाताओं के खिलाफ तार्किक विसंगतियां मिली हैं। याचिका में एसआईआर प्रक्रिया में शामिल बीएलओ और अन्य कर्मचारियों के साथ आधिकारिक संचार के लिए व्हाट्सएप के व्यापक उपयोग की भी आलोचना की गई है, जो आधिकारिक परिपत्र और पत्र जारी करने के नियम के विपरीत है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ, जिनके समक्ष तृणमूल नेता की याचिका को संबंधित एसआईआर मामलों के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, बुधवार या गुरुवार को इस पर सुनवाई कर सकती है। समय की कमी के कारण मंगलवार को इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
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अदालत में याचिका दायर
डेरेक ओ'ब्रायन ने यह आवेदन अपनी लंबित याचिका में दायर किया है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में एसआईआर कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेशों और दिशानिर्देशों को चुनौती दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को घोषणा की थी कि वह SIR के खिलाफ अदालत जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी फैली है, जिसके परिणामस्वरूप मौतें, अस्पताल में भर्ती होने की घटनाएं और आत्महत्या के प्रयास तक हुए हैं।
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हर तरह के हथकंडे अपना रहा आयोग, ममता का आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग राज्य में जारी एसआईआर कवायद को संचालित करने के लिए बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ द्वारा विकसित मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में आगामी गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने के लिए अपने दो दिवसीय दौरे के समापन से पहले बनर्जी ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हर तरह के गलत हथकडे अपना रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्वाचन आयोग योग्य मतदाताओं को मृत घोषित कर है और बुजुर्गों, बीमारो और अस्वस्थ लोगों को सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके लिए वह बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ द्वारा विकसित मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहा है। यह गैरकानूनी, असंवैधानिक और अलोकतात्रिक है। यह अब और नहीं चल सकता। बनर्जी ने कहा, 'मैं लोगों से आग्रह करती हूं कि वे एसआईआर में भाग लेते समय सावधानी बरतें।
AgustaWestland Case: अमीर लोग केस दर्ज होने पर कानून को चुनौती देने लगते हैं...SC ने अगस्ता वेस्टलैंड केस में याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में आरोपी वकील गौतम खैतान द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के एक प्रावधान की वैधता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने धनी आरोपियों द्वारा मुकदमे के बीच में ही कानूनों की वैधता पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की, जबकि उन्हें अभियोजन का सामना करना पड़ता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीएमएलए की धारा 44(1)(सी) को खैतान की चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें यह आवश्यक है कि एक आधार अपराध और संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की सुनवाई एक नामित विशेष न्यायालय द्वारा एक साथ की जाए।
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खेतान ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की एक धारा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इसे ट्रायल से बचने की कोशिश बताया और याचिका खारिज कर दी। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि यह नया चलन बन गया है कि अमीर आरोपी ट्रायल का सामना करने के बजाय कानून की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने लगते हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोग सोचते हैं कि वे सिस्टम को बायपास कर सकते हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। उन्हें आम नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करना चाहिए।
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वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि यह याचिका किसी विशेषाधिकार के लिए नहीं, बल्कि पहले से लंबित विजय मदनलाल चौधरी केस की समीक्षा याचिकाओं से जुड़ी है। लेकिन कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। सीजेआई ने कहा, 'यह एक अनोखे प्रकार का मुकदमा है। क्योंकि मैं अमीर हूं, इसलिए मुझे विशेष सुनवाई चाहिए, यह रवैया गलत है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। इसे बदलना होगा।'
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