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Liver Damage का सबसे बड़ा Warning, ये 8 आदतें चुपके से कर रहीं हैं लिवर फेल, बदलें अपना Lifestyle

बिजी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण लोगों को अक्सर कई बीमारियां घेर ही लेती है। अगर सेहतमंद रहना चाहते हैं, तो इसके लिए यह जरुरी है कि हमारे शरीर के सभी अंग ठीक से फंक्शन करें। यदि बॉडी में विटामिन्स और मिनरल्स का लेवल सही हो और सभी हार्मोन्स बैलेंस हों। इसके लिए एक हेल्दी जीवनशैली को फॉलो करना भी जरुरी है। लिवर हमारे शरीर का एक जरूरी अंग है। इसका सही ढंग से काम करना हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। जब लिवर ढंग से काम नहीं करता, तो शरीर में टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। कई बार जाने-अनजाने में हम रोजमर्रा में कई ऐसी चीजें करते हैं, जो चुपचाप हमारे लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन इस तरफ हमारा ध्यान नहीं जाता है, तब तक लिवर डैमेज शुरु होने लगता है। आइए आपको बताते हैं किन वजहों से लिवर डैमेज होता है।

किन वजहों से लिवर खराब होता?

- लिवर डैमेज होने का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक एल्कोहल का सेवन करना है। एल्कोहल के कारण लिवर में फैट जमा होने लगता है और लिवर सेल्स में इंफ्लेमेशन हो जाता है।

- हम डाइट में सबसे ज्यादा चीनी लेने लगते हैं, तो इसकी वजह से भी लिवर डैमेज होने लगता है। अधिक शुगर के सेवन से ट्राईग्लिसाइड्स बढ़ने लगते हैं और फैटी लिवर की दिकक्त हो जाती है।

- यदि आप डॉक्टर की सलाह के बिना बहुत अधिक दवाईयों या सप्लीमेंट्स का सेवन करते हैं, तो इसका सीधा असर आपके लिवर हेल्थ पर पड़ता है और इसके चलते शरीर को डिटोक्स होने में दिक्कत भी आती है।

- नींद कम लेना या फिर नींद की कमी लिवर की कार्यक्षमता पर असर डालती है और जिसके कारण से लिवर खराब होने लगता है।

- मोटापे की वजह से नॉन-एल्कोहॉलिक लिवर डिजीज हो सकती हैं। इसके अलावा जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनका लिवर भी जल्दी डैमेज हो सकता है क्योंकि स्मोकिंग का असर लिवर सेल्स पर होता है।

- यदि आप एक ही जगह बैठी रहती हैं, फिजिकल एक्टिविटी न के बराबर हैं, तो भी इसकी वजह से लिवर खराब हो सकता है। क्योंकि इसकी वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है और लिवर से फैट बाहर नहीं निकल पाता है।

- तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल लेवल बढ़ने लगता है और इसकी वजह से लिवर में फैट जमा होने लगता है।

- इसके अलावा प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड्स जैसे मैदा, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाईयों का अधिक सेवन भी लिवर को खराब कर सकता है। जिस वजह से ट्राईग्लिसाइड्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने लगता है और लिवर में इंफ्लेमेशन हो जाता है। 

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लाइफस्टाइल और खानपान में होने वाली गड़बड़ी ने हमारे स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। वहीं पर्यावरणीय स्थितियों ने दोहरी मार दी है। भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं कोरोना के बाद तेजी से बढ़ने वाले प्रदूषण की स्थिति को वैज्ञानिकों ने गंभीर स्वास्थ्य संकट बताया था। वायु प्रदूषण के अलावा वातावरण में बढ़ते माइक्रो और नैनोप्लास्टिक के लेवल ने भी चिंता को बढ़ाया है।

कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि प्लास्टिक के छोटे कण हमारी शरीर में जमा होकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। वहीं रोजाना इस्तेमाल में आने वाली सिंगल यूज प्लास्टिक की चीजों ने इस खतरे को दोगुना कर दिया है। ऐसे में अगर समय रहते इसको कंट्रोल नहीं किया गया, तो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकते हैं।

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सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान

वहीं रोजाना इस्तेमाल में आने वाली सिंगल यूज पीईटी बोतलों से नैनोप्लास्टिक पैदा होती है। जोकि सीधे खून, आंतों और कोशिकाओं के बायोलॉजिकल सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। यह अदृश्य कण लंबी अवधि में शरीर में सूजन, डीएनए क्षति, मेटाबॉलिज्म की गड़बड़ी और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए खतरा बन सकते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

वैज्ञानिकों की मानें, तो सिंगल-यूज पीईटी बोतलों से निकलने वाले नैनोप्लास्टिक काफी खतरनाक होता है। यह शरीर के अहम जैविक तंत्रों को बाधित कर सकते हैं। यह कण आंतों में मौजूद गुड जीवाणुओं, एपिथेलियल सेल्स और रक्त कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को कमजोर करते हैं। जिसका इंसानी स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

प्लास्टिक के महीन कण दुनिया के करीब हर पर्यावरणीय माध्यम जैसे पानी, मिट्टी, नदियों, समुद्र, बादलों और इंसानी ब्लड और ऊतकों तक पहुंच चुके हैं।

गट माइक्रोब्स और इम्युनिटी को खतरा

नैनोप्लास्टिक की मौजूदगी माइक्रोब्स यानी आंतों के लाभकारी जीवाणुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। क्योंकि गट माइक्रोब्स पाचन, मेटाबॉलिज्म, प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए इसका नुकसान सीधे तौर पर शरीर को प्रभावित करने का काम करता है।

बता दें कि डीएनए क्षति और मेटाबॉलिज्म गड़बड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण हो सकती है। इन अदृश्य कणों का जोखिम अब सिर्फ पर्यावरण तक नहीं बल्कि पोषण, कृषि और व्यापक परिस्थितिक तंत्र पर भी असर डाल सकता है।

सेहत पर असर

हालिया अध्ययनों के मुताबिक नैनोप्लास्टिक के ये कण सिर्फ आपके पाचन तंत्र नहीं बल्कि हार्मोनल बैलेंस, कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम और न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं तक के लिए समस्याएं बढ़ा रही हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कण कोशिकाओं की मेम्ब्रेन को पार करके सीधे नाभिक तक जाते हैं। जिससे डीएनए क्षति और दीर्घकालिक सूजन का खतरा बढ़ जाता है।

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