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Bihar Flood: RJD नेता Tejashwi Yadav ने पीड़ितों के लिए मांगा स्पेशल पैकेज, लगाया भेदभाव का आरोप

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को बिहार में बाढ़ पीड़ितों के लिए एक स्पेशल पैकेज की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य के साथ भेदभाव कर रही है और राज्य का खजाना खाली है। पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने कहा, "सरकार को बाढ़ पीड़ितों के लिए एक स्पेशल पैकेज देना चाहिए। केंद्र सरकार बिहार के साथ भेदभाव कर रही है। बिहार का सरकारी खजाना खाली है। उन्होंने आगे कहा कि वह और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जहां लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। "हम लगातार बाढ़ पीड़ितों के बीच जा रहे हैं और उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है... बातचीत में शामिल हों।

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आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, 14 ज़िलों के 84 ब्लॉक में 514 पंचायतों के 40 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हालाँकि गंगा और दूसरी बड़ी नदियों के बेसिन में बाढ़ का पानी कम होने लगा है, फिर भी प्रभावित इलाकों में राहत और मेडिकल ऑपरेशन तेज़ कर दिए गए हैं। भागलपुर सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िलों में से एक है, जहाँ 6.4 लाख से ज़्यादा लोग और लगभग 1.5 लाख परिवार प्रभावित हुए हैं। ज़िले में बाढ़ से प्रभावित पंचायतों की संख्या 82 से बढ़कर 92 हो गई है, जबकि प्रभावित गाँवों की संख्या 269 से बढ़कर 376 हो गई है। कुल 710 ज़िला परिषद वार्ड भी प्रभावित हुए हैं।

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मानवाधिकार उल्लंघनों पर यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को दी चेतावनी

नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। जबरन लापता किए जाने, राजनीतिक दमन और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के दमन जैसे मामलों में खराब रिकॉर्ड को लेकर यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है।

यूरोपियन कंजर्वेटिव में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यूरोपीय संसद और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद को स्पष्ट कर दिया है कि केवल अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर करने और कानून बनाने से अब यूरोपीय बाजार में पाकिस्तानी निर्यात को मिलने वाली विशेष व्यापारिक सुविधाएं सुरक्षित नहीं रह सकेंगी।

सितंबर की शुरुआत में स्पेन की यूरोपीय सांसद सैंड्रा गोमेज लोपेज ने यूरोपीय संसद की मानवाधिकार उपसमिति में सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान की प्रतिबद्धताओं के साथ समय सीमा, मापने योग्य लक्ष्य और जवाबदेही तय नहीं है तो उनकी क्या उपयोगिता है।

इसके दो दिन बाद पाकिस्तान में यूरोपीय संघ के राजदूत रायमुंडास कारोब्लिस ने कहा कि देश एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ठोस और सत्यापित सुधारों के बिना जीएसपी प्लस (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) का भविष्य बिल्कुल भी सुनिश्चित नहीं है।

लेख में कहा गया है कि यूरोपीय संघ की यह सख्त भाषा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।

पाकिस्तान को वर्ष 2014 से जीएसपी प्लस का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2024 में उसके लगभग 7.5 अरब यूरो मूल्य के निर्यात इस योजना के तहत पात्र थे, जबकि 7.1 अरब यूरो से अधिक के निर्यात ने वास्तव में इस सुविधा का उपयोग किया। यह करीब 95 प्रतिशत उपयोग दर को दर्शाता है। यूरोपीय आयोग के अनुसार, इससे पाकिस्तान ने उस वर्ष लगभग 73.2 करोड़ यूरो के शुल्क (टैरिफ) की बचत की।

पाकिस्तान के यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में कपड़ा और परिधान क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 70 से 76 प्रतिशत है। यदि यह व्यापारिक सुविधा समाप्त हो जाती है तो कुछ कपड़ा उत्पादों पर 9 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।

यूरोपीय आयोग की 2023-2025 अवधि को कवर करने वाली ताजा रिपोर्ट बताती है कि ब्रुसेल्स ने अपना रुख सख्त क्यों किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पीछे गया है। इनमें जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याएं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पत्रकारों पर दबाव, अल्पसंख्यकों के अधिकार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जबरन मजदूरी जैसी समस्याएं शामिल हैं।

यूरोपीय आयोग ने कहा कि जबरन गुमशुदगी के मामलों में अब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है। वहीं, ऐसे मामलों की जांच करने वाले पाकिस्तानी आयोग ने वर्ष 2025 में 273 नए मामले दर्ज किए हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

लेख के अनुसार, यूरोपीय संघ की नई जीएसपी प्लस व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी। इसके तहत लाभ प्राप्त करने वाले देशों को जिन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन करना होगा, उनकी संख्या 27 से बढ़ाकर 32 कर दी जाएगी।

पाकिस्तान को फिलहाल 2028 के अंत तक अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिलेगी, लेकिन इसके बाद उसे नए और अधिक कड़े नियमों के तहत दोबारा आवेदन करना होगा।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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