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Chinese Military अपना अड्डा बनाने आ रही है, भारत हमारी मदद करे, Balochistan Leader Mir Yar ने Jaishankar को सीधे लिखा पत्र

बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हम आपको बता दें कि बलूच नेता मीर यार बलूच ने गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि चीन निकट भविष्य में बलूचिस्तान में अपनी सेना तैनात कर सकता है। उन्होंने इसे केवल आशंका नहीं बल्कि एक ठोस और उभरता हुआ खतरा बताया है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर न केवल स्थिति से अवगत कराया है बल्कि सीधे तौर पर भारत से समर्थन और हस्तक्षेप की अपेक्षा भी जताई है।

मीर यार बलूच का कहना है कि चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर सीपीईसी परियोजना को आगे बढ़ा रहा है और अब यह परियोजना आर्थिक दायरे से निकलकर सैन्य स्वरूप लेने की दिशा में बढ़ रही है। उनके अनुसार चीन अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा के नाम पर बलूचिस्तान में स्थायी सैन्य मौजूदगी की तैयारी कर रहा है। यह तैनाती बलूच जनता की इच्छा के खिलाफ होगी और इससे वहां पहले से जारी दमन और हिंसा और गहराएगी।

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पत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि बलूचिस्तान पिछले कई दशकों से उत्पीड़न का शिकार रहा है। उन्होंने कहा है कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद बलूच जनता को उसका लाभ नहीं मिला। पाकिस्तान की नीतियों और अब चीन की बढ़ती दखलअंदाजी ने बलूचिस्तान को एक खुले सैन्य क्षेत्र में बदलने का खतरा पैदा कर दिया है। मीर यार बलूच ने भारत को एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति बताते हुए अपील की है कि वह इस पूरे घटनाक्रम को केवल पाकिस्तान का आंतरिक मामला मानकर नजरअंदाज न करे।

देखा जाये तो मीर यार बलूच का पत्र साधारण कूटनीतिक संवाद नहीं है। यह दक्षिण एशिया की सामरिक राजनीति में एक धमाके की तरह है। पहली बार किसी प्रमुख बलूच नेता ने खुले तौर पर भारत के विदेश मंत्री से मदद की गुहार लगाई है। यह कदम अपने आप में ऐतिहासिक है और इसके निहितार्थ दूरगामी हैं। यह संकेत देता है कि बलूच आंदोलन अब वैश्विक मंच पर नए साझेदार तलाश रहा है और भारत को वह स्वाभाविक विकल्प मानता है।

चीन और पाकिस्तान की सांठगांठ अब किसी से छिपी नहीं है। सीपीईसी को लंबे समय तक विकास और आर्थिक सहयोग का प्रतीक बताया गया लेकिन वास्तविकता यह है कि यह परियोजना चीन को हिंद महासागर तक सीधी पहुंच देती है। यदि बलूचिस्तान में चीनी सेना की तैनाती होती है तो यह केवल एक प्रांत की समस्या नहीं रहेगी बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन जाएगी। इसका अर्थ होगा कि भारत के पश्चिम में एक नया सैन्य दबाव केंद्र उभर रहा है।

मीर यार बलूच द्वारा भारत से सीधे मदद मांगने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पाकिस्तान के उस दावे को कमजोर करता है कि बलूच आंदोलन केवल सीमित और आंतरिक विद्रोह है। जब एक आंदोलन अंतरराष्ट्रीय समर्थन की बात करता है तो वह खुद ब खुद वैश्विक विमर्श का हिस्सा बन जाता है। यदि भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता है तो इससे पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा और चीन की मंशा पर भी सवाल खड़े होंगे। लेकिन यदि भारत चुप रहता है तो चीन बलूचिस्तान में धीरे धीरे अपनी जड़ें जमा सकता है और एक दिन यह उपस्थिति स्थायी सैन्य अड्डे में बदल सकती है। इससे न केवल भारत की पश्चिमी सीमा बल्कि समुद्री सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा।

इसके संभावित परिणाम भी कई स्तरों पर दिखाई देते हैं। पहला परिणाम यह होगा कि बलूचिस्तान में हिंसा और अस्थिरता बढ़ेगी क्योंकि विदेशी सेना की मौजूदगी स्थानीय विरोध को और तीखा करेगी। दूसरा परिणाम यह होगा कि पाकिस्तान चीन पर और अधिक निर्भर हो जाएगा और उसकी संप्रभुता औपचारिक बनकर रह जाएगी। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह होगा कि भारत चीन के दोहरे दबाव के बीच घिर सकता है एक ओर पूर्वी सीमा और दूसरी ओर पश्चिम के नजदीक उभरता नया मोर्चा।

इस पूरे परिदृश्य में भारत के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि वह दर्शक बना रहे या रणनीतिक खिलाड़ी की भूमिका निभाए। मीर यार बलूच का पत्र दरअसल भारत के दरवाजे पर दस्तक है। इसे अनसुना करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।

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भारत आ रही है नेतन्याहू की टीम, क्या बड़ा होने जा रहा है? पाकिस्तान के उड़ जाएंगे तोते

दुनिया दो खेमों में बट रही है। एक तरफ जंग, प्रतिबंध और ट्रेड वॉर और दूसरी तरफ देश चुपचाप अपने भविष्य के आर्थिक हथियार तैयार कर रहा है। इसी गेम चज़र मोमेंट में भारत एक और बड़ा दांव खेलने जा रहा है। भारत और इजराइल अब सिर्फ रणनीतिक दोष नहीं बल्कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए आर्थिक साझेदार बनने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक जनवरी में इजराइल से अधिकारियों की एक बड़ी टीम भारत आ रही है। जहां दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी कि एफटीए पर औपचारिक बातचीत शुरू होगी। यह सिर्फ एक समझौता नहीं होने वाला बल्कि यह भारत की उस ग्लोबल ट्रेड स्ट्रेटजी का हिस्सा है जिसका मकसद है चीन डिपेंडेंसी कम करना और भरोसेमंद पार्टनर्स के साथ गहरे रिश्ते बनाना।

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अधिकारी ने बताया कि बातचीत के लिए इज़राइल के व्यापार प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। 2024-25 के दौरान, भारत का इज़राइल को निर्यात 52 प्रतिशत घटकर 2.14 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि 2023-24 में यह 4.52 अरब अमेरिकी डॉलर था। आयात में भी पिछले वित्त वर्ष में 26.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1.48 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। द्विपक्षीय व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारत एशिया में इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार में मुख्य रूप से हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायन शामिल हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी और उच्च-तकनीकी उत्पादों, संचार प्रणालियों और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में व्यापार में वृद्धि देखी गई है।

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भारत से इज़राइल को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में मोती और कीमती पत्थर, ऑटोमोबाइल डीज़ल, रासायनिक और खनिज उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, प्लास्टिक, वस्त्र, परिधान, धातु और परिवहन उपकरण तथा कृषि उत्पाद शामिल हैं। आयात में मोती और कीमती पत्थर, रासायनिक और खनिज/उर्वरक उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, पेट्रोलियम तेल, रक्षा सामग्री, मशीनरी और परिवहन उपकरण शामिल हैं। वहीं आपको बता दें कि आज दोनों देशों के बीच व्यापार, डायमंड्स, पेट्रोलियम और केमिकल्स तक सीमित नहीं रहा है। अब इसमें शामिल है मेडिकल डिवाइसेस, इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग। भारत से इजराइल जाता है पर्ल्स, प्रिशियस स्टोंस, केमिकल्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स। और इसके अलावा आपको बता दें कि इजराइल से भारत जो आता है उन सामानों में पेट्रोलियम, मशीनरी और डिफेंस इक्विपमेंट्स शामिल हैं।

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अगर 2024 और 25 में भारत और इजराइल ट्रेड की बात करें तो वो 3.62 रहै है। लेकिन असली तस्वीर यह है। यह आंकड़ा छोटा है। संभावनाएं बहुत बड़ी है और कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। भारत फरवरी में रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन यानी कि ईएईईयू के साथ एफडीए बातचीत का दूसरा दौर शुरू करेगा। इस ब्लॉक में है रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किरगिस्तान रहने वाले हैं। तो वहीं आपको बता दें कि इसका मकसद है 2030 तक भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन ट्रेड को 70 बिलियन से बढ़ाकर 100 बिलियन करनाऔर इसका सीधा फायदा भारत के छोटे व्यापारी, किसान और मछुआरों को होने वाला है। 

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BCCI का बड़ा फैसला, श्रीलंका में टीम इंडिया खेलेगी एक्स्ट्रा T20 मैच; जानिए क्या है वजह

IND vs SL: भारत बनाम श्रीलंका के बीच होने वाले मैच को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने बड़ा दिल दिखाया है। श्रीलंकाई लोगों की मदद के लिए भारतीय टीम श्रीलंका में एक्स्ट्रा मैच खेलती हुई नजर आएगी। Fri, 02 Jan 2026 23:37:15 +0530

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