भारत आ रही है नेतन्याहू की टीम, क्या बड़ा होने जा रहा है? पाकिस्तान के उड़ जाएंगे तोते
दुनिया दो खेमों में बट रही है। एक तरफ जंग, प्रतिबंध और ट्रेड वॉर और दूसरी तरफ देश चुपचाप अपने भविष्य के आर्थिक हथियार तैयार कर रहा है। इसी गेम चज़र मोमेंट में भारत एक और बड़ा दांव खेलने जा रहा है। भारत और इजराइल अब सिर्फ रणनीतिक दोष नहीं बल्कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए आर्थिक साझेदार बनने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक जनवरी में इजराइल से अधिकारियों की एक बड़ी टीम भारत आ रही है। जहां दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी कि एफटीए पर औपचारिक बातचीत शुरू होगी। यह सिर्फ एक समझौता नहीं होने वाला बल्कि यह भारत की उस ग्लोबल ट्रेड स्ट्रेटजी का हिस्सा है जिसका मकसद है चीन डिपेंडेंसी कम करना और भरोसेमंद पार्टनर्स के साथ गहरे रिश्ते बनाना।
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अधिकारी ने बताया कि बातचीत के लिए इज़राइल के व्यापार प्रतिनिधियों के आने की उम्मीद है। 2024-25 के दौरान, भारत का इज़राइल को निर्यात 52 प्रतिशत घटकर 2.14 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि 2023-24 में यह 4.52 अरब अमेरिकी डॉलर था। आयात में भी पिछले वित्त वर्ष में 26.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1.48 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। द्विपक्षीय व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारत एशिया में इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार में मुख्य रूप से हीरे, पेट्रोलियम उत्पाद और रसायन शामिल हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी और उच्च-तकनीकी उत्पादों, संचार प्रणालियों और चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में व्यापार में वृद्धि देखी गई है।
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भारत से इज़राइल को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में मोती और कीमती पत्थर, ऑटोमोबाइल डीज़ल, रासायनिक और खनिज उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, प्लास्टिक, वस्त्र, परिधान, धातु और परिवहन उपकरण तथा कृषि उत्पाद शामिल हैं। आयात में मोती और कीमती पत्थर, रासायनिक और खनिज/उर्वरक उत्पाद, मशीनरी और विद्युत उपकरण, पेट्रोलियम तेल, रक्षा सामग्री, मशीनरी और परिवहन उपकरण शामिल हैं। वहीं आपको बता दें कि आज दोनों देशों के बीच व्यापार, डायमंड्स, पेट्रोलियम और केमिकल्स तक सीमित नहीं रहा है। अब इसमें शामिल है मेडिकल डिवाइसेस, इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग। भारत से इजराइल जाता है पर्ल्स, प्रिशियस स्टोंस, केमिकल्स, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स। और इसके अलावा आपको बता दें कि इजराइल से भारत जो आता है उन सामानों में पेट्रोलियम, मशीनरी और डिफेंस इक्विपमेंट्स शामिल हैं।
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अगर 2024 और 25 में भारत और इजराइल ट्रेड की बात करें तो वो 3.62 रहै है। लेकिन असली तस्वीर यह है। यह आंकड़ा छोटा है। संभावनाएं बहुत बड़ी है और कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। भारत फरवरी में रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन यानी कि ईएईईयू के साथ एफडीए बातचीत का दूसरा दौर शुरू करेगा। इस ब्लॉक में है रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किरगिस्तान रहने वाले हैं। तो वहीं आपको बता दें कि इसका मकसद है 2030 तक भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन ट्रेड को 70 बिलियन से बढ़ाकर 100 बिलियन करना। और इसका सीधा फायदा भारत के छोटे व्यापारी, किसान और मछुआरों को होने वाला है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दिसंबर 2025 में माली और बुर्किना फासो समेत 19 देशों के नागरिकों पर अमेरिका में प्रवेश पर वीजा बैन लगाने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2026 से लागू हुए। इसके जवाब में पश्चिम अफ्रीकी देशों माली और बुर्किना फासो ने अमेरिकी नागरिकों पर तत्काल प्रभाव से वीजा और यात्रा प्रतिबंध लगा दिया। जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। माली ने अक्टूबर 2025 में अमेरिकी पर्यटकों पर 8.30 लाख रुपए तक का बॉन्ड अनिवार्य किया था। इससे पहले, नाइजर वीसा बैन कर अमेरिका के खिलाफ पलटवार करने वाला पहला देश बना था।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 16 दिसंबर को घोषणा की कि उसने 20 और देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं जिसमें फलस्तीनी प्राधिकरण भी शामिल है। अमेरिका की यात्रा करने और वहां प्रवास करने को लेकर इस साल पहले घोषित व्यापक प्रतिबंधों से प्रभावित देशों की संख्या ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा के बाद दोगुनी हो जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने उन देशों की सूची में पांच अन्य देशों को शामिल किया है जो यात्रा संबंधी पूर्ण प्रतिबंध झेल रहे हैं। इसके अलावा, फलस्तीनी प्राधिकरण द्वारा जारी दस्तावेजों पर यात्रा करने वाले लोगों को भी इस पूर्ण प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है, जबकि 15 अन्य देशों पर नयी पाबंदियां लगाई गई हैं। यह कदम यात्रा और आव्रजन के लिए अमेरिका में प्रवेश के मानकों को और सख्त करने के प्रशासन के जारी प्रयासों का हिस्सा है।
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जून में ट्रंप ने घोषणा की थी कि 12 देशों के नागरिकों को अमेरिका आने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा, जबकि सात अन्य देशों के नागरिकों पर यात्रा संबंधी पाबंदियां लगाई जाएंगी। उस समय प्रतिबंध की सूची में अफगानिस्तान, म्यांमा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल थे, जबकि बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला से आने वाले आगंतुकों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार घोषणा की कि अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध झेल रहे देशों की सूची का विस्तार करते हुए इसमें बुर्किना फासो, माली, नाइजर, दक्षिण सूडान और सीरिया को भी शामिल किया गया।
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