ऑफिस के बाद सिर में रहता है तेज दर्द? स्वामी रामदेव के इस आयुर्वेदिक उपाय से मिल सकती है राहत
Swami Ramdev Sirdard Ke Ayurvedic Upay: सिरदर्द की समस्या आम लग सकती है, लेकिन रोजाना ऑफिस से आने के बाद अगर ये समस्या परेशान करें, तो सुकून छिन जाता है और दूसरे काम करना भी मुश्किल हो जाता है. अगर आप भी सिरदर्द की समस्या को आयुर्वेदिक उपाय की मदद से दूर करना चाहते हैं, तो स्वामी रामदेव का उपाय आपके काफी काम आ सकता है.
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गर्भावस्था में एनीमिया हो तो शिशु के मस्तिष्क का आकार हो सकता है छोटा : स्टडी
लंदन, 9 सितंबर (आईएएनएस)। गर्भावस्था के दौरान मां में एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही है तो इसका असर शिशु के मस्तिष्क विकास पर पड़ सकता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि एनीमिया पीड़ित माताओं से जन्मे बच्चों का कुल मस्तिष्क आयतन अन्य बच्चों की तुलना में औसतन करीब चार प्रतिशत कम होता है।
यह अध्ययन ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन और दक्षिण अफ्रीका के यूनिवर्सिटी ऑफ केप टाउन के शोधकर्ताओं ने किया। शोधकर्ताओं ने केप टाउन में 300 से अधिक माताओं और उनके बच्चों का अध्ययन किया तथा बच्चों के मस्तिष्क की कई बार स्कैनिंग की। यह निगरानी बच्चों के करीब तीन महीने की उम्र से लेकर दो साल तक की गई।
खास बात यह है कि अध्ययन में शामिल एनीमिया से पीड़ित माताओं में बीमारी का स्तर हल्का था। इसके बावजूद उनके बच्चों के मस्तिष्क के कुल वॉल्यूम (आयतन) में अंतर देखा गया। इससे यह संकेत मिलता है कि गर्भावस्था के दौरान मां के शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन का पर्याप्त स्तर भ्रूण के मस्तिष्क के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
द गार्डियन में छपी रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं का ध्यान केवल पूरे मस्तिष्क के आकार पर ही नहीं है। इससे पहले इसी शोध समूह के काम में गर्भावस्था के दौरान मातृ एनीमिया और बच्चों के मस्तिष्क के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों, विशेष रूप से कॉर्पस कॉलोसम और कॉडेट न्यूक्लियस, के अपेक्षाकृत छोटे आयतन के बीच संबंध सामने आया था। बाद के अध्ययन में भी ये प्रभाव बच्चों के 6-7 वर्ष की उम्र तक बने रहने के संकेत मिले।
कॉर्पस कॉलोसम मस्तिष्क के दोनों हिस्सों के बीच कम्युनिकेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि कॉडेट न्यूक्लियस कई तरह की संज्ञानात्मक और मोटर प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है। हालांकि, इन निष्कर्षों का यह अर्थ नहीं है कि एनीमिया से पीड़ित मां का बच्चा निश्चित रूप से न्यूरोलॉजिकल या बौद्धिक समस्या से जूझेगा।
शोध में मुख्य रूप से संबंध देखा गया है। इससे सीधे तौर पर यह साबित नहीं होता कि मां का एनीमिया ही मस्तिष्क के छोटे आयतन का एकमात्र कारण है। बच्चे के विकास पर गर्भावस्था के दौरान पोषण, संक्रमण, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों का भी प्रभाव हो सकता है।
फिर भी विशेषज्ञों के लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया दुनिया के कई हिस्सों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी आम समस्या है।
शोध इस बात की ओर भी ध्यान दिलाता है कि गर्भावस्था के दौरान मां के स्वास्थ्य को केवल प्रसव तक सीमित मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मां के शरीर में पोषक तत्वों की उपलब्धता का असर बच्चे के शुरुआती मस्तिष्क विकास पर भी पड़ सकता है।
पहले के शोधों में भी गर्भावस्था के दौरान मातृ एनीमिया और बच्चों के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों के छोटे आयतन के बीच संबंध पाया गया है। एक अध्ययन में 2-3 वर्ष की उम्र के बच्चों में कॉडेट, पुटामेन और कॉर्पस कॉलोसम के छोटे आयतन की रिपोर्ट की गई थी।
--आईएएनएस
केआर/
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