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योगी सरकार एक और तोहफा, यूपी में आसान हुआ नया बिजली कनेक्शन लेना; मोबाइल से करें अप्लाई

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लोगों के जीवन को आसान करने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है. इसी कड़ी में योगी सरकार ने राज्य में बिजली का नया कनेक्शन करना आसान कर दिया है. अगर आप भी बिजली का नया कनेक्शन लेना चाहते हैं तो आपके लिए ये राहत की खबर है. क्योंकि अब बिजली के नए कनेक्शन के लिए आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. जिसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने नई बिजली कनेक्शन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. ऐसे में उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन से घर बैठे ही बिजली के नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे.

झटपट पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

उत्तर प्रदेश में बिजली के नए कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को यूपीपीसीएल के झटपट (Jhatpat) पोर्टल पर जाना होगा. जहां से आप नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं. यूपी विद्युत विभाग के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य कनेक्शन की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है.

आवेदन के वक्त जमा करने होंगे जरूरी दस्तावेज

नया बिजली का कनेक्शन लेने के लिए आवेदन करते करते समय आवेदक को आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने होंगे. आवेदन के दौरान मांगी गई जानकारी भरने के साथ संबंधित दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करना होगा. आवेदन से जुड़ी फीस या निर्धारित शुल्क का भुगतान भी आवेदक ऑनलाइन कर सकता है.

नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए बिचौलियों का झंझट खत्म

बता दें कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं को आवेदन कराने के लिए किसी एजेंट या बिचौलिए पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस व्यवस्था के लागू होने से बिचौलिया का झंझट खत्म हो गया है. क्योंकि अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जा सकेगी, जिससे उपभोक्ता के समय की बचत के साथ आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

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आवेदन के बाद निरीक्षण करेगा बिजली विभाग

जैसे ही कोई उपभोक्ता नए बिजली के कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करेगा, उसके बाद बिजली विभाग की ओर से संबंधित स्थान का निरीक्षण किया जाएगा. विभागीय अधिकारी साइट की स्थिति और कनेक्शन से जुड़ी तकनीकी जरूरतों की जांच करेंगे. इसके बाद निरीक्षण के आधार पर तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. अगर सभी जरूरी मानक और औपचारिकताएं पूरी पाई जाती हैं, तो आगे मीटर लगाने और बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस तरह नए घर में शिफ्ट होने या नया मकान बनवाने वाले लोगों के लिए नया बिजली कनेक्शन लेना पहले की तुलना में अब काफी आसान हो जाएगा.

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Ganesh Chaturthi 2026: क्या आपको पता है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर कलियुग में भी मौजूद है? जानें अद्भुत रहस्य


Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है. कहा जाता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर ही शिव जी द्वारा गणेश जी के धड़ पर हाथी का सिर लगाया गया था और तब से गणेश जी का जन्म मनाया जाता है. यही दिन गणेश चतुर्थी का होता है. गणेश चतुर्थी के अवसर पर हमें भगवान गणेश से जुड़ी रहस्यमयी कहानी और कथाओं के बारे में जानना चाहिए. भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ था, ये तो सभी को पता है पर क्या आपको पता है उनका वो सिर आज भी कलियुग में मौजूद है. चलिए आपको इस कथा के बारे में बताते हैं और उस मंदिर के बारे में भी.

दरअसल, आज भी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक मंदिर है, जिसकी रहस्यमयी गुफा के बारे में कहा जाता है कि वहां पर लाखों सालों से महादेव द्वारा गणेश जी का कटा हुआ सिर मौजूद है. जब भगवान शिव ने गुस्से में गणेश जी के सिर को धड़ से अलग कर दिया था तो वह इस स्थान पर गिरा था. इस कहानी को जानने के लिए आपको पूरी घटना के बारे में शुरुआत से जानना होगा.

कैसे हुआ था भगवान गणेश का जन्म?

भगवान गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने हाथों से किया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक दिन माता जी जब स्नान करने गई थी तो उन्होंने अपने शरीर से उतरे हुए उबटन से एक आकृति का निर्माण किया था. उस बालक की आकृति में उन्होंने अपनी शक्तियों से जीवन भर दिया. इस प्रकार एक बालक का जन्म हुआ और उस बालक का नाम गणेश रखा गया. दरअसल, माता पार्वती को कोई ऐसा मनुष्य चाहिए था जो उनकी आज्ञा का पालन संपूर्ण रूप से करें क्योंकि भगवान शिव जी के गण कई बार उनकी आज्ञा की अवहेलना किया करते थे.

माता पार्वती जब तक स्नान कर रही थी तब तक के लिए भगवान गणेश जी को उन्होंने द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया और किसी को प्रवेश न करने के लिए कहा. बालक गणेश वहां पहरा देने लगे.

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भगवान शिव और गणेश जी का युद्ध क्यों हुआ?

इसी कहानी में आगे भगवान शिव वहां पहुंचे. वे अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन माता के आदेश का पालन करते हुए भगवान गणेश ने उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. भगवान शिव ने कई बार गणेश जी को समझाने का प्रयास किया लेकिन गणेश जी अपने स्थान से हट नहीं रहे थे. वहीं, इस बीच दोनों के बीच युद्ध भी हो गया. गणेश जी ने अपने पिता पर प्रहार भी किया. यह सब देख भगवान शिव क्रोधित हो गए लेकिन गणेश जी हटने को तैयार नहीं हुए. शिव जी ने उन्हें चेतावनी दी इसके बावजूद वे नहीं माने तो भगवान शिव ने त्रिशूल से प्रहार कर दिया. प्रहार से उनक सिर धड़ से अलग हो गया और शीष कहीं और जा कर गिर पड़ा.

धार्मिक मान्यता है कि त्रिशूल का प्रहार इतना तेज था कि उससे गणेश जी का सिर धड़ से अलग होने के बाद कैलाश से सीधे पाताल लोक पहुंच गया था. जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आई और उन्हें इस पूरी घटना के बारे में पता लगा तो वह बेहद दुखी और क्रोधित हो उठी. अपने पुत्र की ऐसी स्थिति को देख माता पार्वती ने शिव जी से उनके बेटे का प्राण लौटाने के लिए कहा.

भगवान शिव ने गणों को भेजा सिर की खोज के लिए

पार्वती माता का दुख देख भगवान शिव ने अपने गणों को गणेश का सिर खोजने के लिए कहा. जब सभी गण खाली हाथ लौटे तो भगवान शिव ने आदेश दिया की रास्ते में जो भी प्राणी दिखाई दे उसका सिर लाने के लिए कहा. एक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने गणों से कहा था कि ऐसे प्राणी का सिर लाएं, जिसकी माता का मुख शिशु की तरफ न हो. इसके बाद गण हाथी के बच्चे का सिर लेकर आएं क्योंकि उसकी माता का मुख उसकी ओर नहीं था. भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को गणेश जी के धड़ से जोड़ा और उन्हें पुन: जीवित कर दिया. इसके बाद से ही गणेश जी का नाम गजानन पड़ गया था. 

मान्यता है कि माता के शरीर से निकले उबटन में मैल भी था. इसलिए, पहले निर्मित गणेश जी की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी और इसलिए, वे उद्दंड बालक बन गए थे. इसलिए, उनका इस रूप में जन्म होना जरूरी था. गजानन रूप का जन्म होने के बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें भर-भर के आशीर्वाद और वरदान दिए. कहा जाता है ये घटनाक्रम जिस दिन हुआ था, वह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी ही थी. 

पाताल भुवनेश्वर में आज भी है गणेश जी का सिर

इसी कथा के मुताबिक, जब गणेश जी का सिर अलग किया गया तो वह पाताल लोक में आ गिरा था. मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का मानव सिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद पाताल भुवनेश्वर मंदिर की गुफा में मौजूद है. जब भगवान शिव ने मस्तिष्क को काटा तो उनके मनुष्य रूपी मस्तक को यहां कि गुफा में स्थापित कर दिया गया था. भगवान गणेश यहां एक शिला के रूप में स्थापित है. यह गुफा आज भी मौजूद है. पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर ऊपर है. कलियुग में इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य जी ने की थी.

चार युगों से जुड़ा गुफा का रहस्य

इस रहस्यमयी गुफा में चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थरों की स्थापना की गई है. इनमें एक पत्थर को कलियुग का प्रतीक माना जाता है. ये पत्थर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा है. मान्यता है कि जिस दिन ये पत्थर पूरी तरह गुफा की छत से टकराएगा कलियुग का अंत हो जाएगा. हालांकि, ये सिर्फ एक धार्मिक मान्यता है. 

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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India tour of New Zealand: 6 साल बाद दौरे को लेकर फैंस में Craze, 50,000 से ज्यादा Tickets बिके

भारतीय टीम के इस साल अक्टूबर में होने वाले न्यूजीलैंड दौरे के लिए दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है और न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा कि तीनों प्रारूप में होने वाली इस श्रृंखला के लिए अब तक 50000 से अधिक टिकट बिक चुके हैं। भारत छह साल के अंतराल के बाद न्यूजीलैंड का दौरा करेगा, जहां वह पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेलेगा।

न्यूजीलैंड क्रिकेट की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘इस श्रृंखला के आम जनता के लिए टिकटों की बिक्री सोमवार को शुरू हो गई। और कई मैचों के सभी टिकट बिकने की पूरी संभावना है, जिसमें क्राइस्टचर्च में खेले जाने वाला दूसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी शामिल है, जिसके 75 प्रतिशत टिकट बिक चुके हैं।’’

इसमें आगे कहा गया है, ‘‘ईडन पार्क में टिकटों की अत्यधिक मांग के कारण स्टेडियम की छठी पंक्ति की सीटों को 2019 में भारत के न्यूजीलैंड दौरे के बाद पहली बार खोलना पड़ रहा है। भारत के खिलाफ 30 अक्टूबर को होने वाले चौथे टी20 मैच के लिए यह सीटें दर्शकों के लिए उपलब्ध रहेंगी।’’

न्यूजीलैंड क्रिकेट के मार्केटिंग प्रमुख टिम एलिस ने कहा कि भारतीय दौरे के लिए दर्शकों में जबरदस्त उत्साह बना हुआ है। एलिस ने कहा, ‘‘ कई वर्षों बाद पहली बार ईडन पार्क के शीर्ष तल को खोलना वास्तव में रोमांचक है। इससे इस दौरे को लेकर उत्साह का पता चलता है।

Wed, 09 Sep 2026 14:19:00 +0530

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