Responsive Scrollable Menu

Ganesh Chaturthi 2026: क्या आपको पता है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर कलियुग में भी मौजूद है? जानें अद्भुत रहस्य


Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है. कहा जाता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर ही शिव जी द्वारा गणेश जी के धड़ पर हाथी का सिर लगाया गया था और तब से गणेश जी का जन्म मनाया जाता है. यही दिन गणेश चतुर्थी का होता है. गणेश चतुर्थी के अवसर पर हमें भगवान गणेश से जुड़ी रहस्यमयी कहानी और कथाओं के बारे में जानना चाहिए. भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ था, ये तो सभी को पता है पर क्या आपको पता है उनका वो सिर आज भी कलियुग में मौजूद है. चलिए आपको इस कथा के बारे में बताते हैं और उस मंदिर के बारे में भी.

दरअसल, आज भी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक मंदिर है, जिसकी रहस्यमयी गुफा के बारे में कहा जाता है कि वहां पर लाखों सालों से महादेव द्वारा गणेश जी का कटा हुआ सिर मौजूद है. जब भगवान शिव ने गुस्से में गणेश जी के सिर को धड़ से अलग कर दिया था तो वह इस स्थान पर गिरा था. इस कहानी को जानने के लिए आपको पूरी घटना के बारे में शुरुआत से जानना होगा.

कैसे हुआ था भगवान गणेश का जन्म?

भगवान गणेश जी का जन्म माता पार्वती ने अपने हाथों से किया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक दिन माता जी जब स्नान करने गई थी तो उन्होंने अपने शरीर से उतरे हुए उबटन से एक आकृति का निर्माण किया था. उस बालक की आकृति में उन्होंने अपनी शक्तियों से जीवन भर दिया. इस प्रकार एक बालक का जन्म हुआ और उस बालक का नाम गणेश रखा गया. दरअसल, माता पार्वती को कोई ऐसा मनुष्य चाहिए था जो उनकी आज्ञा का पालन संपूर्ण रूप से करें क्योंकि भगवान शिव जी के गण कई बार उनकी आज्ञा की अवहेलना किया करते थे.

माता पार्वती जब तक स्नान कर रही थी तब तक के लिए भगवान गणेश जी को उन्होंने द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया और किसी को प्रवेश न करने के लिए कहा. बालक गणेश वहां पहरा देने लगे.

ये भी पढ़ें- Ganesh Chaturthi 2026: कब शुरू होगा गणेशोत्सव? जानें मूर्ति स्थापना से लेकर विसर्जन की तिथि, शुभ मुहूर्त व योग

भगवान शिव और गणेश जी का युद्ध क्यों हुआ?

इसी कहानी में आगे भगवान शिव वहां पहुंचे. वे अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन माता के आदेश का पालन करते हुए भगवान गणेश ने उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक दिया. भगवान शिव ने कई बार गणेश जी को समझाने का प्रयास किया लेकिन गणेश जी अपने स्थान से हट नहीं रहे थे. वहीं, इस बीच दोनों के बीच युद्ध भी हो गया. गणेश जी ने अपने पिता पर प्रहार भी किया. यह सब देख भगवान शिव क्रोधित हो गए लेकिन गणेश जी हटने को तैयार नहीं हुए. शिव जी ने उन्हें चेतावनी दी इसके बावजूद वे नहीं माने तो भगवान शिव ने त्रिशूल से प्रहार कर दिया. प्रहार से उनक सिर धड़ से अलग हो गया और शीष कहीं और जा कर गिर पड़ा.

धार्मिक मान्यता है कि त्रिशूल का प्रहार इतना तेज था कि उससे गणेश जी का सिर धड़ से अलग होने के बाद कैलाश से सीधे पाताल लोक पहुंच गया था. जब माता पार्वती स्नान करके बाहर आई और उन्हें इस पूरी घटना के बारे में पता लगा तो वह बेहद दुखी और क्रोधित हो उठी. अपने पुत्र की ऐसी स्थिति को देख माता पार्वती ने शिव जी से उनके बेटे का प्राण लौटाने के लिए कहा.

भगवान शिव ने गणों को भेजा सिर की खोज के लिए

पार्वती माता का दुख देख भगवान शिव ने अपने गणों को गणेश का सिर खोजने के लिए कहा. जब सभी गण खाली हाथ लौटे तो भगवान शिव ने आदेश दिया की रास्ते में जो भी प्राणी दिखाई दे उसका सिर लाने के लिए कहा. एक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने गणों से कहा था कि ऐसे प्राणी का सिर लाएं, जिसकी माता का मुख शिशु की तरफ न हो. इसके बाद गण हाथी के बच्चे का सिर लेकर आएं क्योंकि उसकी माता का मुख उसकी ओर नहीं था. भगवान शिव ने उस हाथी के सिर को गणेश जी के धड़ से जोड़ा और उन्हें पुन: जीवित कर दिया. इसके बाद से ही गणेश जी का नाम गजानन पड़ गया था. 

मान्यता है कि माता के शरीर से निकले उबटन में मैल भी था. इसलिए, पहले निर्मित गणेश जी की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी और इसलिए, वे उद्दंड बालक बन गए थे. इसलिए, उनका इस रूप में जन्म होना जरूरी था. गजानन रूप का जन्म होने के बाद सभी देवी-देवताओं ने उन्हें भर-भर के आशीर्वाद और वरदान दिए. कहा जाता है ये घटनाक्रम जिस दिन हुआ था, वह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी ही थी. 

पाताल भुवनेश्वर में आज भी है गणेश जी का सिर

इसी कथा के मुताबिक, जब गणेश जी का सिर अलग किया गया तो वह पाताल लोक में आ गिरा था. मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का मानव सिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद पाताल भुवनेश्वर मंदिर की गुफा में मौजूद है. जब भगवान शिव ने मस्तिष्क को काटा तो उनके मनुष्य रूपी मस्तक को यहां कि गुफा में स्थापित कर दिया गया था. भगवान गणेश यहां एक शिला के रूप में स्थापित है. यह गुफा आज भी मौजूद है. पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर ऊपर है. कलियुग में इस गुफा की खोज आदि शंकराचार्य जी ने की थी.

चार युगों से जुड़ा गुफा का रहस्य

इस रहस्यमयी गुफा में चारों युगों के प्रतीक के रूप में चार पत्थरों की स्थापना की गई है. इनमें एक पत्थर को कलियुग का प्रतीक माना जाता है. ये पत्थर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ रहा है. मान्यता है कि जिस दिन ये पत्थर पूरी तरह गुफा की छत से टकराएगा कलियुग का अंत हो जाएगा. हालांकि, ये सिर्फ एक धार्मिक मान्यता है. 

ये भी पढ़ें- Ganesh Chaturthi 2026 Puja Samagri: गणपति स्थापना से पहले तैयार कर लें पूजा की सामग्रियां, देखें पूरी लिस्ट

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Continue reading on the app

भारत को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के जरिए ग्लोबल साउथ के संबंधों को व्यापार, निवेश वृद्धि में बदलना चाहिए: इंडस्ट्री

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में होने वाला आगामी 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ग्लोबल साउथ के साथ बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव को निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के रूप में लाभ में बदलने का बड़ा अवसर है।

फियो ने कहा कि 12-13 सितंबर को होने वाले इस शिखर सम्मेलन में कारोबारियों के लिए कुछ व्यावहारिक परिणामों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेजी, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी, अधिक नियामकीय पारदर्शिता, मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन की पारस्परिक मान्यता, बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, डिजिटल व्यापार दस्तावेज और सीमा पार भुगतान को आसान बनाना शामिल हैं।

फियो के अध्यक्ष एससी रहलान ने कहा, “ब्रिक्स को रणनीतिक संवाद से आगे बढ़कर ऐसे वाणिज्यिक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें मापा जा सके। भारतीय कारोबारियों के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता आसान बाजार पहुंच, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी, निवेश प्रवाह, प्रौद्योगिकी सहयोग और कुशल भुगतान तंत्र में होगी।”

रहलान ने आगे कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग से भारत की महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, पूंजी और नई विनिर्माण साझेदारियों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।

रहलान ने कहा कि भारत के पास इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कपड़ा और परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में काफी अवसर हैं।

एशिया, अफ्रीका, खाड़ी, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं तक फैला विस्तारित ब्रिक्स समूह भारतीय निर्यातकों को काफी व्यापक आर्थिक पहुंच प्रदान करता है।

ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जिससे भारत को अपने पारंपरिक बाजारों से आगे निर्यात में विविधता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मिलता है।

उन्होंने कहा, “अवसर केवल ब्रिक्स देशों को अधिक सामान बेचने का नहीं है। भारत को इन अर्थव्यवस्थाओं में विकसित हो रही उत्पादन, सोर्सिंग और वैल्यू चेन का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए।”

रहलान ने स्थानीय मुद्राओं में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार के अधिक निपटान के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “भुगतान को लेकर अनिश्चितता खुद एक व्यापार बाधा बन सकती है। कुशल, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था लेनदेन की लागत कम कर सकती है और खासकर एमएसएमई सहित कारोबारियों का नए बाजारों में प्रवेश को लेकर भरोसा बढ़ा सकती है।”

फियो ने ब्रिक्स के भीतर कारोबारियों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए एक बेहतर बिजनेस-टू-बिजनेस व्यवस्था की भी मांग की। इसमें क्षेत्र-विशेष के खरीदार-विक्रेता सम्मेलन, निवेश के लिए साझेदार तलाशने की व्यवस्था, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम और नियमित व्यापार प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

Continue reading on the app

  Sports

रोहित-विराट-वैभव को देखने के लिए न्यूजीलैंड में स्टेडियम हाउसफुल, किवी बोर्ड को भारी मुनाफा मिलने की आस

ind vs nz series housfull: भारत के खिलाफ अक्टूबर के अंत में शुरू होने वाली महत्वपूर्ण श्रृंखला ने न्यूजीलैंड क्रिकेट मुख्यालय में नकदी के ढेर लगा दिए हैं, क्योंकि मूल संस्था ने दो सप्ताह पहले बिक्री शुरू होने के बाद से 50,000 से अधिक टिकटों की बिक्री की पुष्टि की है Wed, 9 Sep 2026 15:47:04 +0530

  Videos
See all

Bihar Flood News LIVE Updates: बिहार में बाढ़ के बीच बड़ी खबर, हुआ बुरा हाल | Ganga River | Munger #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T10:12:51+00:00

Iran America War : ईरान ने दागी 50 खैबर | Trump | IRGC | N18G | Shorts | #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-09T10:16:35+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers