US-Canada Trade War गहराया: Donald Trump ने कनाडाई प्रोडक्ट्स पर लगाया कड़ा बैन
अमेरिका ने कनाडा से आने वाले दुग्ध उत्पादों, अधिकतर मादक पेय और मोटरसाइकिलों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने मंगलवार को बताया कि यह प्रतिबंध तीन सप्ताह में लागू होगा। इससे पहले मंगलवार को कनाडा ने अमेरिका से आयात होने वाले 20 अरब डॉलर मूल्य के सामान पर जवाबी शुल्क लगा दिया था। इन कदमों से दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध और तेज हो गया है।
कनाडा के जवाबी शुल्क लागू होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के उत्पादों को अमेरिका की बड़ी और दीर्घकालिक सरकारी खरीद से बाहर करने की दिशा में मंगलवार को कदम उठाया। वहीं, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका पर देश की निर्भरता कम करने के प्रयासों में तेजी लाने का संकल्प जताया।
ट्रंप ने अमेरिकी सामान्य सेवा प्रशासन को निर्देश दिया कि वह कनाडा के उत्पादों को इन सरकारी ठेकों के लिए तब तक अयोग्य घोषित करे जब तक कनाडा, अमेरिकी उत्पादों के लिए ‘‘पूर्ण एवं उचित पारस्परिकता’’ की अनुमति नहीं देता। कार्नी ने मंगलवार को इससे पहले कहा था कि कनाडा की रणनीति अधिक आत्मनिर्भर बनने की है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी देश हमें बंधक न बना सके और हम अपनी जिंदगी अपनी इच्छा के मुताबिक जी सकें।’’
कनाडा के एक अधिकारी ने बताया कि कनाडा यूरोपीय संघ के साथ ऐसे संबंधों की संभावनाएं तलाश रहा है, जो सदस्यता से थोड़ा कम स्तर के हो सकते हैं। इन विकल्पों में मौजूदा समझौतों का विस्तार, नई संधि पर बातचीत या सहयोग के अन्य रूप विकसित करना शामिल हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि कनाडा पहले से ही प्रांतों, क्षेत्रों और श्रमिक संगठनों से इस बारे में विचार-विमर्श कर रहा है कि यूरोपीय संघ के साथ गहरे संबंध किस रूप में हो सकते हैं, लेकिन अभी किसी मॉडल का चयन नहीं किया गया है।
नाम उजागर न करने की शर्त पर अधिकारी ने यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें इन वार्ताओं के बारे में सार्वजनिक रूप से चर्चा करने की अनुमति नहीं थी। कार्नी अगले सप्ताह फ्रांस के स्ट्रासबर्ग जाएंगे। वहां वह 16 सितंबर को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के यूरोपीय संघ की स्थिति पर संबोधन में शामिल होंगे और अगले दिन यूरोपीय संसद को संबोधित करेंगे। इस विवाद ने दुनिया के सबसे करीबी संबंधों में से एक को झकझोर दिया है।
दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हैं और रक्षा तथा सुरक्षा के क्षेत्र में भी उनके करीबी संबंध हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने कनाडा के सामान पर कई शुल्क लगाए हैं, जबकि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने उत्तर अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत की थी और बार-बार उसकी सराहना की थी। इनमें से कई शुल्क उस समझौते का उल्लंघन करते हैं।
Crude Oil का संकट गहराने से Indian Share Market धड़ाम, Sensex में 500 अंकों की बड़ी गिरावट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंचने से घरेलू शेयर बाजारों सेंसेक्स और निफ्टी में बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 500.25 अंक फिसलकर 75,060.61 अंक पर और एनएसई निफ्टी 129.40 अंक लुढ़कर 23,506.10 अंक पर आ गया। सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर में सबसे अधिक गिरावट रही।
वहीं एनटीपीसी, लार्सन एंड टुब्रो, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स के शेयर बढ़त में रहे। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की 225 और चीन का एसएसई कम्पोजिट बढ़त में कारोबार कर रहे हैं जबकि हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहा। अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट में बंद हुए थे।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को शुद्ध रूप से 123.19 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। सेंसेक्स मंगलवार को 555.23 अंक और निफ्टी 144.05 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ था।
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