अब तक नहीं हिली ‘डॉक्टर हनुमान’ की प्रतिमा, अब IIT की टीम बताएगी राज, 10 दिन की कोशिश भी रही बेअसर
उज्जैन के कंठाल क्षेत्र में स्थित खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का बाहरी ढांचा हटाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को सुरक्षित दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की लेकिन करीब 10 दिनों तक चली मशक्कत के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। भारी क्रेन, जेसीबी और मजदूरों की पूरी ताकत भी नाकाम रही। इसके बाद प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया और IIT इंदौर की टीम को मौके पर बुलाया गया।
वहीं नगर निगम के मुताबिक प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसलिए अब वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
IIT इंदौर की जांच से तय होगा प्रतिमा कैसे हटेगी
दरअसल मंगलवार को IIT इंदौर के विशेषज्ञ खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे और करीब दो घंटे तक विशेष उपकरणों से प्रतिमा की गहराई और आसपास की संरचना की जांच की। टीम अब अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर यह तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से कैसे और कब दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि मंदिर के पुजारी के आग्रह पर विशेषज्ञों को बुलाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। दरअसल, कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है और मंदिर प्रस्तावित सड़क के हिस्से में आ रहा था। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद कार्रवाई प्रतिमा पर आकर रुक गई। प्रशासन अब ऐसी कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता जिससे प्रतिमा को नुकसान पहुंचे।
1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
वहीं विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी का कहना है कि प्रतिमा को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। उनके मुताबिक पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को कई बार इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था। यही वजह हो सकती है कि भारी मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। उन्होंने बताया कि प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह की प्रतिमाएं बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से चढ़ रहे सिंदूर की मोटी परत के कारण इसकी मूल बनावट भी पूरी तरह साफ नजर नहीं आती।
इधर, श्रद्धालुओं की नजर में यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं है। वर्षों से लोग इस मंदिर को ‘डॉक्टर हनुमान’ के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। मंदिर के पुजारी महेश बैरागी बताते हैं कि यहां छोटे बच्चों को झाड़नी की जाती है और तावीज दिया जाता है। उनका कहना है कि कई परिवारों ने यहां आकर अपनी मनोकामना पूरी होने का अनुभव साझा किया है।
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में तेज होगा चौड़ीकरण, 5 प्रमुख रास्तों पर जल्द शुरू होगा काम
उज्जैन में इन दिनों सिंहस्थ 2028 को लेकर चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों का दौर देखने को मिल रहा है। बाबा महाकाल के सवारी के चलते पिछले कुछ दिनों से प्रशासन का पूरा फोकस सवारी मार्गों के चौड़ीकरण पर था। कोई नया काम शुरू भी नहीं किया गया। लेकिन अब सवारी का क्रम खत्म होने के बाद नगर निगम की चौड़ीकरण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।
उज्जैन में कुछ रास्ते ऐसे हैं जिनका चौड़ीकरण किए जाने की घोषणा पहले ही हो चुकी है लेकिन अभी यहां पर काम शुरू नहीं हुआ है। गुदरी से लेकर हरसिद्धि पाल तक का रास्ता भी इस बीच आता है। शहर में पांच ऐसे मार्ग हैं, जहां पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
जल्द शुरू होगा चौड़ीकरण
जहां पर चौड़ीकरण किया जाने वाला है, वहां पर सेंट्रल लाइन से मार्किंग की जा चुकी है और भवन मालिकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। कुछ स्थान ऐसे हैं जहां ट्रैफिक डायवर्जन की स्थिति सामान्य होने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
इन मार्गों का होगा चौड़ीकरण
प्रशासन द्वारा चौबीस खंबा से लेकर छोटा रुद्र सागर का चौड़ीकरण किया जाने वाला है। इस मार्ग के चौड़ीकरण के बीच आने वाले भवनों से संबंधित लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं। इसी तरह गुदरी से लेकर हरसिद्धि पाल तक 570 मीटर लंबे मार्ग पर चौड़ीकरण किया जाने वाला है। यह मार्ग 15 मीटर चौड़ा होगा और लगभग 136 मकान प्रभावित होंगे। नीलकंठ द्वारा से लेकर महाकाल चौराहा तक 400 मीटर लंबा मार्ग है, जिसे 24 मीटर किया जाना है। सेंट्रल लाइन से मार्किंग की जा चुकी है इसमें लगभग 127 भवन प्रभावित होंगे।
इसी तरह खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक 730 मीटर मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाएगा। उधर दो तालाब से लेकर शांति नगर तक 650 मीटर लंबा रास्ता 18 मीटर तक चौड़ा होगा। इसके लिए मकान मालिकों को नोटिस दिया गया है। इसके अलावा तेलीवाड़ा से टंकी चौराहा के बीच पहले से चल रहा 150 से 200 मीटर और दानी गेट क्षेत्र का 300 मीटर का काम बाकी है, जिसे पूरा किया जा रहा है।
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