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टीबी के खिलाफ जंग तेज, डब्ल्यूएचओ के साउथ-ईस्ट एशिया क्षेत्र के देशों ने मिलकर उठाए ठोस कदम

नई दिल्ली, 9 सितंबर (आईएएनएस)। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने बुधवार टीबी को खत्म करने के लिए एक ठोस कदम उठाया है, जिसके तहत बीमारी की जल्द पहचान, रोकथाम और इलाज की बेहतर सुविधा, परिवारों के लिए आर्थिक मदद और नई टीबी वैक्सीन की तैयारियों पर जोर दिया जाएगा।

डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नीलेश बुद्धा ने डब्ल्यूएचओ क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में कहा, टीबी का इलाज संभव है और इसे रोका भी जा सकता है, फिर भी हमारे क्षेत्र में हर साल लाखों लोगों की जान इससे चली जाती है और कई परिवार गरीबी में चले जाते हैं। हमारे पास इसे बदलने के साधन हैं। जरूरत इस बात की है कि ये साधन जरूरतमंद हर व्यक्ति तक समय पर, बराबरी से और अच्छी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के तहत पहुंचें।

डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी रहती है लेकिन साल 2024 में दुनिया में टीबी के कुल नए मामलों में से लगभग 34 प्रतिशत मामले यहीं से थे। अनुमान है कि यहां करीब 36.8 लाख नए मामले सामने आए और लगभग 4.33 लाख लोगों की मौत हुई हैं।

करीब 1.5 लाख लोगों में मल्टीड्रग और रिफाम्पिसिन-रेजिस्टेंट टीबी पाई गई, जो दुनिया के कुल मामलों का 38 प्रतिशत से ज्यादा है। देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि टीबी के मरीजों की जल्द और पूरी तरह से पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, ज्यादा जोखिम वाले और वंचित लोगों की व्यवस्थित जांच और सक्रिय रूप से मरीजों की खोज की जाएगी।

इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाई गई तेज जांच तकनीकों, जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट और डिजिटल तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने टीबी केयर को ज्यादा लोगों पर केंद्रित बनाने का भी वादा किया, जिसमें ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी के लिए बेहतर क्वालिटी का इलाज, न्यूट्रिशन और कम्युनिटी-बेस्ड सपोर्ट और लोगों को केयर पाने से रोकने वाली सामाजिक, फाइनेंशियल, ज्योग्राफिक और दूसरी रुकावटों को दूर करने के लिए पूरी कार्रवाई शामिल है।

रोकथाम को मजबूत करने के लिए घर में टीबी मरीज के संपर्क में आए लोगों और ज्यादा जोखिम वाले लोगों को टीबी से बचाव का इलाज मुहैया कराय जाएगा, संक्रमण की रोकथाम को बेहतर किया जाएगा और कुपोषण, डायबिटीज और तंबाकू के सेवन जैसे बड़े कारणों पर भी ध्यान दिया जाएगा। क्षेत्रीय मॉडल के अनुसार, टीबी के मामलों और मौतों में सबसे ज्यादा कमी तक आ सकती है, जब बेहतर इलाज और सरकारी-निजी भागीदारी, तेज जांच, लक्षित रोकथाम, ज्यादा जोखिम वाले लोगों में सक्रिय जांच और टीबी वैक्सीन का इस्तेमाल एक साथ किया जाए। इसलिए वैक्सीन लाने की तैयारी बहुत जरूरी है।

2015 के बाद से इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति हुई है। अब इलाज की पहुंच 85 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है और इलाज में सफलता की दर डब्लयूएचओ के सभी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा है। नए टीबी मामलों की दर में 16 प्रतिशत की कमी आई है, जो वैश्विक औसत 12 प्रतिशत से ज्यादा है और टीबी से होने वाली मौतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन ये सुधार अभी 2030 तक एंड टीबी स्ट्रेटजी के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काफी नहीं हैं। इसके तहत 2015 की तुलना में टीबी के मामलों में 80 प्रतिशत और मौतों में 90 प्रतिशत तक कमी लाना है।

टीबी जैसी बीमारी का बोझ पूरे परिवारों पर आर्थिक रूप से भी भारी देखने को मिलता है। लगभग 44 प्रतिशत टीबी प्रभावित परिवारों को भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है और दवा-प्रतिरोधी टीबी से पीड़ित परिवारों में यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है। टीबी के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद जरूरत से बहुत कम है। साल 2024 में क्षेत्र में टीबी से निपटने के लिए लगभग 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर उपलब्ध थे, जबकि जरूरत करीब 300 करोड़ डॉलर की है।

यह समझते हुए कि टीबी को खत्म करने के लिए सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी काम करना होगा, देशों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और सभी के लिए स्वास्थ्य कवरेज के अंदर टीबी सेवाओं को और बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया है।

टीबी के लिए फाइनेंसिंग अभी भी अनुमानित जरूरत से काफी कम है, इसलिए सदस्य देशों ने मजबूत घरेलू रिसोर्स जुटाने, उपलब्ध रिसोर्स का कुशल इस्तेमाल, पूल्ड प्रोक्योरमेंट और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर दिया ताकि क्वालिटी-एश्योर्ड दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और दूसरी ज़रूरी चीज़ों तक पहुँच बेहतर हो सके, खासकर उन देशों और हेल्थ सिस्टम के लिए जिनकी प्रोक्योरमेंट कैपेसिटी सीमित है।

डब्ल्यूएचओ साउथ-ईस्ट एशिया रीजन के ऑफिसर-इन-चार्ज डॉ. नीलेश बुद्ध ने कहा, टीबी को खत्म करने के लिए हेल्थ सिस्टम, कम्युनिटी सिस्टम और उससे भी आगे मजबूत क्षेत्रीय एकजुटता और एक्शन की जरूरत होगी। इक्विटी को सेंटर में रखकर, सस्टेनेबल रिस्पॉन्स में इन्वेस्ट करके, इनोवेशन को अपनाकर और यह पक्का करके कि कोई पीछे न छूटे, हम उन गैप को कम कर सकते हैं जो हमारे और 2030 तक टीबी को खत्म करने के लक्ष्य के बीच बने हुए हैं।

--आईएएनएसेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे

एनएस/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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योगी सरकार एक और तोहफा, यूपी में आसान हुआ नया बिजली कनेक्शन लेना; मोबाइल से करें अप्लाई

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लोगों के जीवन को आसान करने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है. इसी कड़ी में योगी सरकार ने राज्य में बिजली का नया कनेक्शन करना आसान कर दिया है. अगर आप भी बिजली का नया कनेक्शन लेना चाहते हैं तो आपके लिए ये राहत की खबर है. क्योंकि अब बिजली के नए कनेक्शन के लिए आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. जिसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने नई बिजली कनेक्शन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. ऐसे में उपभोक्ता अपने मोबाइल फोन से घर बैठे ही बिजली के नए कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे.

झटपट पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

उत्तर प्रदेश में बिजली के नए कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को यूपीपीसीएल के झटपट (Jhatpat) पोर्टल पर जाना होगा. जहां से आप नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं. यूपी विद्युत विभाग के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य कनेक्शन की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है.

आवेदन के वक्त जमा करने होंगे जरूरी दस्तावेज

नया बिजली का कनेक्शन लेने के लिए आवेदन करते करते समय आवेदक को आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा करने होंगे. आवेदन के दौरान मांगी गई जानकारी भरने के साथ संबंधित दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करना होगा. आवेदन से जुड़ी फीस या निर्धारित शुल्क का भुगतान भी आवेदक ऑनलाइन कर सकता है.

नया बिजली कनेक्शन लेने के लिए बिचौलियों का झंझट खत्म

बता दें कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से उपभोक्ताओं को आवेदन कराने के लिए किसी एजेंट या बिचौलिए पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस व्यवस्था के लागू होने से बिचौलिया का झंझट खत्म हो गया है. क्योंकि अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी की जा सकेगी, जिससे उपभोक्ता के समय की बचत के साथ आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी.

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आवेदन के बाद निरीक्षण करेगा बिजली विभाग

जैसे ही कोई उपभोक्ता नए बिजली के कनेक्शन के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करेगा, उसके बाद बिजली विभाग की ओर से संबंधित स्थान का निरीक्षण किया जाएगा. विभागीय अधिकारी साइट की स्थिति और कनेक्शन से जुड़ी तकनीकी जरूरतों की जांच करेंगे. इसके बाद निरीक्षण के आधार पर तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. अगर सभी जरूरी मानक और औपचारिकताएं पूरी पाई जाती हैं, तो आगे मीटर लगाने और बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. इस तरह नए घर में शिफ्ट होने या नया मकान बनवाने वाले लोगों के लिए नया बिजली कनेक्शन लेना पहले की तुलना में अब काफी आसान हो जाएगा.

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