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Siddhartha Vihar Trust मामले में Karnataka High Court ने निचली अदालत के आदेश पर जताई आपत्ति

बेंगलुरु, आठ सितंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सत्र अदालत के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट से जुड़े भ्रष्टाचार और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच पर विचार करने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय जांच का निर्देश दिया गया था। इस ट्रस्ट के न्यासियों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, उनके बेटे और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे और उनके रिश्तेदार शामिल हैं। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने बेंगलुरु के एक अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश के 11 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को आंशिक रूप से अनुमति देते हुए कहा कि अदालत से शिकायतकर्ता को एक गलत हलफनामे को ठीक करने का अवसर मिलना चाहिए था और इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 के तहत आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी।

उच्च न्यायालय ने हाल में जारी एक आदेश में कहा, ‘‘शिकायतकर्ता को कमी को दूर करने और अदालत के समक्ष ठीक से सत्यापित हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया जा सकता था। प्रक्रिया निस्संदेह न्याय की सहायक होती है; इसे न्याय की समाप्ति का कारण नहीं बनने दिया जा सकता।’’ यह आदेश मंगलवार को सार्वजनिक किया गया। अदालत ने माना कि हलफनामे में मौजूद कमी को ठीक किया जा सकता था और इसके कारण कार्यवाही को पूरी तरह से बीएनएसएस की धारा 223 के तहत जांच की ओर नहीं मोड़ा जाना चाहिए था।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद शिकायत में जांच के लिए संदर्भ भेजे जाने की जरूरत है या नहीं, यह तय करना सत्र अदालत का काम है। यह मामला ‘लांचमुक्ता कर्नाटक वेदिके’ के अध्यक्ष विजयराघव मराठे की एक निजी शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बैंगलोर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को नागरिक सुविधा वाली जमीनें आवंटित करने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है।

शिकायत में बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत जांच का अनुरोध किया गया था। सत्र अदालत के आदेश में दर्ज शिकायत के अनुसार इस ट्रस्ट का गठन मूल रूप से 1994 में किया गया था और इसके पांच न्यासियों में मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल थे, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं। 2010 में एक पूरक ट्रस्ट दस्तावेज के जरिए राधाबाई एम. खरगे और उनके दो बेटों, राहुल खरगे और प्रियंक खरगे को न्यासी के तौर पर शामिल किया गया।

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‘भाई, मर रहा हूं’ मलबे में दबे नीरज का कॉल:दिल्ली बिल्डिंग हादसे में बचे 2 छात्रों की आपबीती, 4 घंटे बाद रेस्क्यू हुआ

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को जब हॉस्ट्ल डेज की बिल्डिंग भरभराकर गिरी, उस वक्त अपने रूम में मौजूद छात्रों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ सेकेंड पहले तक छात्र अपने कमरों में थे, वे अचानक कई टन मलबे के नीचे दब गए। इसी मलबे में नितेश छिब और नीरज बावा भी फंसे थे। 19 साल के नितेश की जान लेंटर और मलबे के बीच बने एक छोटे से गैप ने बचाई। उसका चेहरा खाली जगह में आ गया था, इसलिए वह सांस ले पा रहा था और मदद के लिए आवाज भी लगा पा रहा था। दूसरी तरफ कुछ दूरी पर नीरज भी मलबे में फंसा था। उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और उसे कई गंभीर चोटें थीं। बिल्डिंग गिरने के वक्त नितेश और नीरज के साथ क्या हुआ था और मलबे में फंसने के बाद 3 से 4 घंटे कैसे बीते...दोनों की आपबीती उनके चचेरे भाई रोहित छिब से हुई बातचीत पर आधारित है। रोहित ने दैनिक भास्कर को जैसा बताया, हम उसी आधार पर पूरी घटना बता रहे हैं। नितेश ने नीरज से पूछा- भाई पानी की आवाज आ रही है क्या हॉस्टल गिरने के कुछ मिनट पहले नितेश और नीरज दूसरी मंजिल पर अपने-अपने कमरे में थे। नितेश रविवार को दोपहर 12:30 बजे वह खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया था। तभी दीवारों की तरफ से पानी जैसी आवाज आने लगी। कुछ देर बाद आवाज तेज होने लगी। नितेश ने पास वाले कमरे में रहने वाले नीरज से पूछा कि क्या उसे भी पानी की आवाज सुनाई दे रही है। नीरज ने भी हां में जवाब दिया। इसके महज 2 सेकेंड बाद ही पूरी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। नितेश के मुताबिक, “मैं मलबे के नीचे फंस गया था। मेरे ऊपर लेंटर जैसा भारी मलबा गिरा था। मलबे और लेंटर के बीच एक गैप बन गया था। उसमें मेरा चेहरा फंस गया। इस वजह से मैं सांस ले पा रहा था। बोल भी पा रहा था। मेरे पैर मलबे में फंसे थे।” नीरज को आवाज दी तो बोला- ‘मुझे बहुत दर्द हो रहा है’ नितेश ने इसके बाद अपने दोस्त नीरज बावा को आवाज लगाई। नीरज ने जवाब दिया- "मुझे दर्द हो रहा है।" नितेश के मुताबिक, नीरज जिस जगह फंसा था, वहां मलबा ज्यादा था और धूल भी भरी हुई थी। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।" नितेश ने बताया, "मैंने मलबे के अंदर से लगातार मदद के लिए आवाज लगानी शुरू कर दी। कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम मलबे के ऊपर पहुंची। मैंने टीम के लोगों को आपस में बात करते सुना। वे कह रहे थे कि दूसरी बिल्डिंग भी गिरने वाली है। मेरे लिए यह सुनना और डराने वाला था। मैं पहले ही मलबे के नीचे फंसा अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था। मुझे डर था कि अगर दूसरी बिल्डिंग भी गिर गई तो मैं दोबारा नहीं बच पाऊंगा।" नीरज ने दोस्त को फोन किया- ‘भाई, मैं मर रहा हूं’ इस बीच नीरज ने अपने करीबी दोस्त वीर चतरथ को फोन लगाया। वीर ने दैनिक भास्कर को बताया कि दोपहर 1:45 बजे मुझे नीरज का फोन आया। कहा- ‘भाई, मैं मर रहा हूं।’ वीर ने बताया कि हम दोनों के बीच 5-6 बार फोन पर बात हुई। मैंने नीरज से उसकी लाइव लोकेशन भेजने को कहा। हमारी वॉटसऐप कॉल पर करीब 13 सेकेंड बात हुई। इसके बाद दोपहर 1:55 बजे नीरज ने अपनी लाइव लोकेशन भेजी। दोपहर 2:16 बजे मैंने दोबारा फोन किया, लेकिन इस बार कोई जवाब नहीं मिला। मैंने उसे आखिरी मैसेज भेजा था- ‘भाई, हिम्मत नहीं हारनी है तूझे।’ इसके बाद मैने और उसके दोस्तों ने नीरज को बचाने के लिए टीम बनाई। हम लोग घटनास्थल पर पर पहुंचे। पुलिस और NDRF की टीम भी रेस्क्यू में जुटी थी। करीब 3-4 घंटे बाद नीरज को मलबे से बाहर निकाला जा सका। नीरज को पहले प्राइमस अस्पताल ले जाया गया। वहां करीब 50 मिनट से एक घंटे तक इलाज चला। इसके बाद शाम करीब 6 बजे उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। AIIMS में रात करीब साढ़े 10 बजे उसकी सर्जरी शुरू हुई, जो रात करीब 1 बजे तक चली। नीरज की हालत गंभीर, एक सर्जरी हो चुकी; दूसरी की तैयारी नीरज की हालत बेहद गंभीर है। उसकी पीठ में गंभीर चोटें हैं। जांघ के ऊपरी हिस्से में भी गहरी चोट लगी है। पेट में भी गंभीर घाव है। एक सर्जरी हो चुकी है। डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं। शरीर में इंफेक्शन फैल चुका है और त्वचा काली पड़ चुकी है। एक और सर्जरी होगी। हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया हॉस्टलडेज के ठीक पहले बगल की ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था। वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- 'लगता है गिरने वाली है।' हादसे से पहले ‘कनक लता’ हॉस्टल की दीवारें भी दरकने लगी थीं, छात्राओं ने वीडियो बनाया हॉस्टलडेज के ठीक पहले बगल की ‘कनक लता’ हॉस्टल में रहने वाली दो छात्राएं अर्निका और मानसी ने हादसे से कुछ मिनट पहले अपने कमरे की दीवारों और छत पर आई दरारों का वीडियो बनाया था। वीडियो में कमरे की दीवारों पर लंबी और गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। दोनों दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेकेंड ईयर की छात्राएं हैं। वीडियो में 20 साल की अर्निका को कहते सुना जा सकता है- 'लगता है गिरने वाली है।' ---------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… छात्र बोले- 10 मिनट पहले निकले, नहीं तो दबे होते: बिल्डिंग से दरकने की आवाजें आ रही थीं शुक्र है हम बच गए....यह कहना है, दिल्ली के सत्य निकेतन के हॉस्टल से कुछ देर पहले निकले छात्रों का। इनके मुताबिक, इमारत गिरने से कुछ देर पहले दीवारों से दरकने यानी क्रैक की आवाजें भी आ रही थीं। कुछ छात्रों ने बताया कि वे हादसे से महज 10-20 मिनट पहले ही बिल्डिंग से बाहर निकले थे। लौटे तो सबकुछ बिखर गया था। पूरी खबर पढ़ें…

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Asian Games 2026: एशियन गेम्स में टीम इंडिया को नहीं मिलेगा 5-स्टार होटल, नागोया में इसी जगह ठहरेंगे खिलाड़ी

Asian Games 2026: भारतीय क्रिकेटरों को आमतौर पर विदेशी दौरों पर 5-स्टार होटल में ठहराया जाता है, लेकिन जापान के नागोया में होने वाले आगामी एशियन गेम्स में ऐसा नहीं होगा। भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों को आयोजकों की ओर से तय किए गए होटल में ठहराया जाएगा। BCCI उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।

राजीव शुक्ला ने बताया कि नागोया में अच्छे होटलों की कमी के कारण यह मामला सामने आया था। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि खिलाड़ियों के लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। BCCI ने होटल की तस्वीरें और वीडियो देखे हैं और टीमों को वहां मिलने वाली सुविधाओं से संतुष्ट है।

शुक्ला ने कहा कि होटल 5-स्टार श्रेणी के नहीं हैं, लेकिन अच्छी और आरामदायक व्यवस्था है। खिलाड़ियों को ट्विन शेयरिंग रूम में नहीं रखा जाएगा, बल्कि हर खिलाड़ी के लिए अलग कमरा होगा। उन्होंने कहा- विकल्प के तौर पर खिलाड़ियों को टोक्यो या ओसाका में ठहराया जा सकता था, लेकिन दोनों शहर नागोया से काफी दूर हैं।

भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा ने भी कहा कि खिलाड़ियों के ठहरने का इंतजाम हो चुका है। उन्होंने बताया- IOA ने अन्य खिलाड़ियों के लिए होटल बुक किए हैं, जबकि क्रिकेटरों के होटल की व्यवस्था BCCI ने की है। आयोजक खिलाड़ियों के लिए होटल के अलावा छोटे विला और एक शिप में ठहरने की व्यवस्था भी कर रहे हैं।

शुक्ला ने कहा कि एशियन गेम्स में सभी टीमें एक परिवार की तरह रहती हैं। ऐसे में कुछ खिलाड़ियों को टोक्यो और कुछ को ओसाका में ठहराना सही नहीं लगता। इसलिए भारतीय क्रिकेटरों को नागोया में ही रखा जाएगा। होटल की व्यवस्था IOA, एशियन गेम्स आयोजन समिति और जापान क्रिकेट एसोसिएशन के सहयोग से की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि असली चिंता होटल नहीं, बल्कि मैदान, पिच और ड्रेसिंग रूम को लेकर थी। एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की टीम ने वहां जाकर इन व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अब वह मैदान, विकेट और ड्रेसिंग रूम से संतुष्ट है।

भारतीय पुरुष टीम 20 सितंबर को जापान के लिए रवाना होगी। 22 सितंबर को वह जापान के खिलाफ ऐतिहासिक एकमात्र T20I मुकाबला खेलेगी। इसके बाद 28 सितंबर को एशियन गेम्स में अपना पहला मैच खेलेगी।

Wed, 09 Sep 2026 08:28:51 +0530

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